• एच -1 बी वीजा गैर-विदेशी वीजा है। अमेरिकी कंपनियों के दूसरे देशों के तकनीकी एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में 53,000 से अधिक लोगों को एच -1 बी वीजा दिया गया।

दैनिक भास्कर

06 मई, 2020, शाम 05:03 बजे IST

वॉशिंगटन। कोरोनावायरस के कारण कई भारतीय दूसरे देशों में पारित हुए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक, Google, एपल और वर्ल्ड जैसी प्रमुख कंपनियां जहां एच -1 बी वीजाधारकों की बड़ी मात्रा में काम करते हैं। इकॉनोमिक नीति इंस्टीट्यूट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार ये कपनियां यहां चलाई जा रही योजना का लाभ उठाकर अपने एच -1 बी कर्मचारियों को बाजार से कम सैलरी का भुगतान कर रही हैं।

60 प्रति कामगार की कीमत पर काम कर रहा है
रिपोर्ट के अनुसार कई बड़ी कंपनियां अमेरिका में काम करने वाले एच -1 बी वीजाधारकों के प्रवासी कामगारों को स्थानीय कार्यक्रम का फायदा उठाकर बाजार दर से कम वेतन दे रही हैं। संदेह के कारण प्रवासी कर्मचारी कम मेहनताने पर नौकरी करने को मजबूर हैं। एच -1 बी वीज़ा और प्रेविल्लिंग वेज लेवल्स नाम से जारी इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी श्रम विभाग ने एच -1 बी वीजा प्रोग्राम के तहत 60 प्रति कामगारों को बाजार दर से कम हार्डाने पर काम करने के लिए प्रमाणित किया है।

हर 4 में से 1 एच -1 बी वीजाधारक शीर्ष कंपनियों में काम कर रहे हैं
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में 53,000 से अधिक लोगों को एच -1 बी वीजा दिया गया। अमेरिका के सिटीजन और माइग्रेशन डिपार्टमेंट ने 2019 में एच -1 बी पर काम करने वालों की संख्या 3,89,000 तय की थी। इसमें हर चार में से एक कामगार अमेजन, दुनिया, वालमार्ट, गूगल, एपल और फेसबुक जैसी शीर्ष 30 कंपनियों में काम कर रहे हैं।

थर्ड पार्टी के जरिए कपनियों के हाथ काम कर रहे हैं
इन 30 शीर्ष नियोक्ताओं में से भी आधे एच -1 बी वीजाधारकों के कामगार को काम पर नहीं रखते हैं, बल्कि थर्ड पार्टी (किसी और कंपनी को ठेका देकर) के आधार पर काम करते हैं। इन लोगों को लेवल 1 और 2 के तहत काम किए जाते है जिसमें इनहे स्थानीय मजदूरी से कम पैसा दिया जाता है।

एच -1 बी वीजा क्या है?
एच -1 बी वीजा गैर-विदेशी वीजा है। अमेरिकी कंपनियों के दूसरे देशों के तकनीकी एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। नियुक्ति के बाद सरकार से इन लोगों के लिए एच -1 बी वीजा मांगा जाता है। अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी तरह के वीजा के जरिए करती हैं।

इसको क्या नियम हैं?
नियम के अनुसार, यदि कोई एच -1 बी वीजाधारकों की कंपनी ने उसे साथ कांट्रैक्ट खत्म कर लिया है। तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसके लिए 60 दिनों के अंदर नई कंपनी में जॉब तलाशना होगा। भारतीय आईटी वर्कर्स इस 60 दिन की अवधि को बढ़ाकर 180 दिन करने की मांग कर रहे हैं। यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (आईआईएस) के मुताबिक, एच -1 बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय ही हैं।]





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