सोनिया गांधी (फाइल फोटो)
– फोटो : पीटीआई

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में शुक्रवार को विपक्षी दलों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक शुरू हुई। इस बैठक में कोरोना वायरस महामारी के बीच प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों एवं आर्थिक पैकेज पर मुख्य रूप से चर्चा चल रही है। बैठक में, कुछ प्रदेशों में श्रम कानूनों में किए गए हालिया बदलावों को लेकर भी चर्चा होगी।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बैठक शुरू होते समय ट्वीट किया, 20 समान मानसिकता वाले राजनीतिक दलों की कोविड-19 और बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है। बैठक में अम्फान चक्रवात की वजह से ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मृत लोगों की याद में कुछ पल का मौन रखा गया। 

इस बैठक में देश के 22 विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया है। रणदीप सुरजेवाला ने एक और ट्वीट में बताया कि बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सीताराम येचुरी और द्रमुक नेता एमके स्तालिन, राजद नेता तेजस्वी यादव, नेकां के उमर अब्दुल्ला आदि बैठक में शामिल हुए।

बैठक में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर प्रवासी श्रमिकों से जुड़े इस संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया है। बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से रोकने के लिए गत 25 मार्च से देश में लॉकडाउन लगने के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक बड़े शहरों से अपने घर जाने के लिए पैदल निकले। कई जगहों पर हुई दुर्घटनाओं में कई मजदूरों की मौत भी हो गई है।

देश में कोरोना वायरस महामारी के चलते प्रवासी मजदूरों के पलायन और गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने यह बैठक बुलाई है। कोरोना महामारी आने के बाद यह पूरे विपक्ष को साथ करने की पहली कोशिश है। 

कोरोना के पहले से खराब थी अर्थव्यवस्था की स्थिति : सोनिया

बैठक की शुरुआत सोनिया गांधी ने बंगाल और ओडिशा में चक्रवात अम्फान से पीड़ित लोगों के प्रति दुख जता कर ती।  गांधी ने कहा, भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आने से पहले ही देश की अर्थव्यवस्था संकट में थी। नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण जीएसटी इसके प्रमुख कारण थे। आर्थिक गिरावट 2017-18 से शुरू हुई। सात तिमाही तक अर्थव्यवस्था का लगातार गिरना सामान्य नहीं था फिर भी सरकार गलत नीतियों के साथ आगे बढ़ती रही। 

जैसा कि हम जानते हैं कि 11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 को वैश्विक महामारी घोषित किया। पूरे विपक्ष ने सरकार को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। यहां तक कि जब 24 मार्च को केवल चार घंटे के नोटिस में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया, तब भी हमने इस फैसले का समर्थन किया। 

केजरीवाल, मायावती और अखिलेश ने किया बैठक से किनारा

केंद्र को घेरने की इस कोशिश में कुछ बड़े विपक्षी दलों ने शामिल होने से इनकार भी किया। उत्तर प्रदेश की सियासत के दो प्रमुख चेहरों बसपा प्रमुख मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए तो दूसरी ओर दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी ने भी इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। 

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में शुक्रवार को विपक्षी दलों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक शुरू हुई। इस बैठक में कोरोना वायरस महामारी के बीच प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों एवं आर्थिक पैकेज पर मुख्य रूप से चर्चा चल रही है। बैठक में, कुछ प्रदेशों में श्रम कानूनों में किए गए हालिया बदलावों को लेकर भी चर्चा होगी।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बैठक शुरू होते समय ट्वीट किया, 20 समान मानसिकता वाले राजनीतिक दलों की कोविड-19 और बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है। बैठक में अम्फान चक्रवात की वजह से ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मृत लोगों की याद में कुछ पल का मौन रखा गया। 

इस बैठक में देश के 22 विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया है। रणदीप सुरजेवाला ने एक और ट्वीट में बताया कि बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सीताराम येचुरी और द्रमुक नेता एमके स्तालिन, राजद नेता तेजस्वी यादव, नेकां के उमर अब्दुल्ला आदि बैठक में शामिल हुए।

बैठक में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर प्रवासी श्रमिकों से जुड़े इस संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया है। बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से रोकने के लिए गत 25 मार्च से देश में लॉकडाउन लगने के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक बड़े शहरों से अपने घर जाने के लिए पैदल निकले। कई जगहों पर हुई दुर्घटनाओं में कई मजदूरों की मौत भी हो गई है।

देश में कोरोना वायरस महामारी के चलते प्रवासी मजदूरों के पलायन और गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने यह बैठक बुलाई है। कोरोना महामारी आने के बाद यह पूरे विपक्ष को साथ करने की पहली कोशिश है। 

कोरोना के पहले से खराब थी अर्थव्यवस्था की स्थिति : सोनिया

बैठक की शुरुआत सोनिया गांधी ने बंगाल और ओडिशा में चक्रवात अम्फान से पीड़ित लोगों के प्रति दुख जता कर ती।  गांधी ने कहा, भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आने से पहले ही देश की अर्थव्यवस्था संकट में थी। नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण जीएसटी इसके प्रमुख कारण थे। आर्थिक गिरावट 2017-18 से शुरू हुई। सात तिमाही तक अर्थव्यवस्था का लगातार गिरना सामान्य नहीं था फिर भी सरकार गलत नीतियों के साथ आगे बढ़ती रही। 

जैसा कि हम जानते हैं कि 11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 को वैश्विक महामारी घोषित किया। पूरे विपक्ष ने सरकार को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। यहां तक कि जब 24 मार्च को केवल चार घंटे के नोटिस में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया, तब भी हमने इस फैसले का समर्थन किया। 

केजरीवाल, मायावती और अखिलेश ने किया बैठक से किनारा

केंद्र को घेरने की इस कोशिश में कुछ बड़े विपक्षी दलों ने शामिल होने से इनकार भी किया। उत्तर प्रदेश की सियासत के दो प्रमुख चेहरों बसपा प्रमुख मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए तो दूसरी ओर दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी ने भी इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। 

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