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अनलॉक 1.0 के  दूसरे चरण के तहत आठ जून से देशभर के धार्मिक स्थल खुलने जा रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकारों के साथ ही मंदिर प्रशासनों ने भी तैयारी कर ली है। लॉकडाउन के दौरान कोविड-19 के खिलाफ जारी जंग में सभी धार्मिक स्थल भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

अभी तक लोगों को खाना एवं अन्य जरूरी सामान मुहैया कराने वाले मंदिर अब खुलने को तैयार हैं। इस दौरान वे कोविड-19 के खिलाफ तय मानक जैसे मास्क पहनना, भीड़-भाड़ न होने देना व सोशल डिस्टेंसिंग जैसे मानकों का ख्याल रखेंगे। मंदिरों ने अपने यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी तय कर दी है।  

करीब 11 सप्ताह बंद रहने के बाद उज्जैन स्थित भगवान महाकाल का मंदिर भक्तों के लिए सोमवार से फिर खोल दिया जाएगा। मंदिर प्रबंधक समिति के प्रशासक सुजान रावत ने बताया कि श्रद्धालु सुबह आठ से शाम छह बजे तक दर्शन कर सकेंगे।

हालांकि दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को पहले अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए मोबाइल एप्लीकेशन और एक टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा, ताकि भक्त मंदिर आने से पहले अपना समय बुक करा लें। लोग रविवार दोपहर से अपना पंजीकरण करा सकेंगे।

श्रद्धालु ना तो ‘भस्म आरती’ अनुष्ठान में शामिल हो सकेंगे और ना ही गर्भगृह में जा सकेंगे। इसके अलावा किसी को भी मूर्तियों और शास्त्र छूने व पवित्र जल छिड़कने और प्रसाद बांटने की अनुमति भी नहीं होगी। इसके अलावा अन्य मानकों का भी पालन करना होगा।

तिरुमला के पास स्थित भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) का मंदिर 11 जून को फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिर का प्रबंधन देखने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि कोविड-19 के मद्देनजर रोजाना केवल छह हजार श्रद्धालुओं को ही अनुमति दी जाएगी।

इस दौरान श्रद्धालु आपस में छह फुट की दूरी बनाए रखेंगे और उन्हें मास्क पहनना होगा। आम दिनों में यहां 60 हजार से ज्यादा लोग एक दिन में दर्शन के लिए आते हैं। हर दिन सुबह से 13 घंटे के लिए हर घंटे केवल 500 से कम लोगों को ही जाने की अनुमति होगी।

उन्होंने कहा कि 10 साल के कम उम्र के बच्चों और 65 साल से अधिक के बुजुर्गों को मंदिर में जाने की इजाजत नहीं होगी। श्रद्धालुओं को संभालने के काम में जुटे टीटीडी के सारे कर्मचारी पीपीई किट पहने रहेंगे। श्रद्धालुओं को मंदिर में जाने की मंजूरी देने से पहले टीटीडी उनके यात्रा इतिहास को खंगालेगा और औचक कोविड-19 टेस्ट भी करेगा। जिनमें बुखार के लक्षण मिलेंगे उन्हें तुरंत क्वारंटीन में भेज दिया जाएगा।

केरल में स्थित विश्व विख्यात सबरीमाला मंदिर 14 जून से श्रद्धालुओं और मासिक पूजा व उत्सव के लिए खुल जाएगा। 15 जून से मलयालम महीना मिधुनोम शुरू होगा। इस दौरान पांच दिनों तक चलने वाले मासिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा।

देवसोम मिनिस्टर के सुरेंद्रन ने बताया कि 19-28 जून के दौरान सबरीमाला उत्सव होगा। श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ ना हो इसके लिए मंदिर के सामने केवल 50 श्रद्धालुओं को ही इकट्ठा होने की अनुमति होगी। वर्चुअल क्यू प्रबंधन से भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा।

मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले लोगों की पांपा और शनिधाम में स्कैनिंग होगी। एहतियात के तौर पर लोगों को मास्क पहनने के लिए कहा जाएगा, साथ ही नियमित अंतराल पर सैनिटाइजेशन का काम किया जाएगा। भक्त दो चरणों में दर्शन कर सकेंगे।

सुबह चार से एक बजे तक और शाम चार बजे से रात ग्यारह बजे तक। दूसरे राज्यों से आने वालों को सरकार के कोविड जगराता पास के लिए पंजीकरण कराना होगा। इसके साथ ही आईसीएमआर से संबद्ध लैब से जारी सर्टिफिकेट जमा करना होगा कि वह पूरी तरह से संक्रमण मुक्त हैं।

मंदिर को खोलने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रशासन बैठक करेंगे। यहां भी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। एक दिन में 600 लोग ही दर्शन कर सकेंगे। हर घंटे 150 लोगों को परिसर में 15 मिनट के लिए जाने दिया जाएगा। इसके अलावा यहां दिन में 60 शादी भी कराई जा सकेंगी। शादी में वर-वधू के अलावा 10 लोग शामिल हो सकते हैं।

अनलॉक 1.0 के  दूसरे चरण के तहत आठ जून से देशभर के धार्मिक स्थल खुलने जा रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकारों के साथ ही मंदिर प्रशासनों ने भी तैयारी कर ली है। लॉकडाउन के दौरान कोविड-19 के खिलाफ जारी जंग में सभी धार्मिक स्थल भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

अभी तक लोगों को खाना एवं अन्य जरूरी सामान मुहैया कराने वाले मंदिर अब खुलने को तैयार हैं। इस दौरान वे कोविड-19 के खिलाफ तय मानक जैसे मास्क पहनना, भीड़-भाड़ न होने देना व सोशल डिस्टेंसिंग जैसे मानकों का ख्याल रखेंगे। मंदिरों ने अपने यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी तय कर दी है।  


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सुबह आठ से शाम छह बजे तक महाकाल के दर्शन

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