रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
– फोटो : एएनआई

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महाराष्ट्र सरकार के कोरोना वायरस प्रबंधन के तौर तरीकों पर सवाल उठाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य में वर्तमान स्थितियों से ऐसा लग रहा है कि सरकारी कामकाज के स्थान पर कोई सर्कस चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र में स्थिति सरकार से ज्यादा सर्कस की स्थिति है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार जैसा कुशल नेतृत्व होते हुए भी राज्य को इस स्थिति में देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।’

राजनाथ सिंह ने कहा, हमने यह सुनिश्चित किया था कि गरीबों को लॉकडाउन के दौरान समस्याओं का सामना न करना पड़े। हमारी रेलगाड़ियां प्रवासी मजदूरों को उनके घर ले जाने के लिए तैयार थीं, लेकिन महाराष्ट्र सरकार के असहयोग के चलते उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा। 

‘अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती राज्य सरकार’

सिंह ने कहा, मुंबई के अस्पतालों को हम टीवी पर देखते हैं, कुछ ऐसे अस्पताल देखने को मिले जहां शव पड़ा हुआ है और उसके पास कोरोना मरीज पड़ा हुआ है, क्या वहां सरकार नाम की चीज नहीं है, सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती हैं। उन्होंने कहा, कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हम महाराष्ट्र सरकार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।  

उन्होंने कहा, महाराष्ट्र सरकार को यह देखना चाहिए कि किस तरह उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की सरकारों ने कोरोना वायरस को नियंत्रित किया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह कहना सही नहीं होगा कि कोविड-19 की महाराष्ट्र में स्थिति सरकार की अक्षमता को दर्शाती है। प्रवासी मजदूरों की सहायता करने वाले अभिनेता सोनू सूद की भी महागठबंधन सरकार आलोचना कर रही है। 

बिना जिम्मेदारी के सत्ता राहुल गांधी का चरित्र : राजनाथ

वहीं, महाराष्ट्र सरकार में कांग्रेस की भूमिका के बारे में राहुल गांधी के बयान पर सिंह ने कहा कि जिम्मेदारी के बिना सत्ता उनका चरित्र है। उन्होंने कहा कि सारी दुनिया इस बात को स्वीकार कर रही है कि मोदी सरकार में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। साल 2013 में देश की जो आर्थिक स्थिति थी उसकी तुलना में साल 2019 में स्थिति बहुत बेहतर हुई है। 

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए सिंह ने कहा, ‘राहुल कह चुके हैं कि कांग्रेस महाराष्ट्र में प्रमुख फैसले नहीं ले सकती है। इसका क्या मतलब है? क्या वह ऐसे संकट के समय में अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं? यह कुछ नया नहीं है, बिना जिम्मेदारी के सत्ता उनका चरित्र है।’

चीन से विवाद पर बोले, देश का गौरव प्रभावित नहीं होने देंगे

वहीं, भारत और चीन के बीच बढ़ रहे सीमा विवाद को लेकर रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन के साथ सैन्य और राजनीतिक स्तर पर बातचीत चल रही है और अभी तक की बातचीत सकारात्मक रही है। भारत और चीन सीमा पर स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि हम भारत के गौरव को प्रभावित नहीं होने देंगे।

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बहुत लंबे समय से चल रहा है। हम इसे जल्द से जल्द हल करना चाहते हैं। ‘आज राहुल गांधी और कुछ विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारत और चीन सीमा पर क्या हो रहा है। देश का रक्षा मंत्री होने के नाते मैं यह कहना चाहता हूं कि मुझे जो कुछ भी कहना होगा मैं संसद में कहूंगा, मैं लोगों को धोखे में नहीं रखूंगा।’

उन्होंने कहा कि छह जून को हुई वार्ता बहुत सकारात्मक थी और भारत और चीन इस विवाद को हल करने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए थे। मैं लोगों को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि देश का नेतृत्व मजबूत हाथों में है और हम देश के आत्मसम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।

सार

भारतीय जनता पार्टी की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हो रही वर्चुअल महाराष्ट्र जन संवाद रैली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने कोरोना प्रबंधन को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठाए तो मोदी सरकार का बखान भी किया। साथ ही भारत-चीन विवाद पर उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है लेकिन हम झुकेंगे नहीं। पढ़िए रैली में और क्या बोले रक्षा मंत्री…
 

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार के कोरोना वायरस प्रबंधन के तौर तरीकों पर सवाल उठाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य में वर्तमान स्थितियों से ऐसा लग रहा है कि सरकारी कामकाज के स्थान पर कोई सर्कस चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र में स्थिति सरकार से ज्यादा सर्कस की स्थिति है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार जैसा कुशल नेतृत्व होते हुए भी राज्य को इस स्थिति में देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।’

राजनाथ सिंह ने कहा, हमने यह सुनिश्चित किया था कि गरीबों को लॉकडाउन के दौरान समस्याओं का सामना न करना पड़े। हमारी रेलगाड़ियां प्रवासी मजदूरों को उनके घर ले जाने के लिए तैयार थीं, लेकिन महाराष्ट्र सरकार के असहयोग के चलते उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा। 

‘अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती राज्य सरकार’

सिंह ने कहा, मुंबई के अस्पतालों को हम टीवी पर देखते हैं, कुछ ऐसे अस्पताल देखने को मिले जहां शव पड़ा हुआ है और उसके पास कोरोना मरीज पड़ा हुआ है, क्या वहां सरकार नाम की चीज नहीं है, सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती हैं। उन्होंने कहा, कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हम महाराष्ट्र सरकार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।  

उन्होंने कहा, महाराष्ट्र सरकार को यह देखना चाहिए कि किस तरह उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की सरकारों ने कोरोना वायरस को नियंत्रित किया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह कहना सही नहीं होगा कि कोविड-19 की महाराष्ट्र में स्थिति सरकार की अक्षमता को दर्शाती है। प्रवासी मजदूरों की सहायता करने वाले अभिनेता सोनू सूद की भी महागठबंधन सरकार आलोचना कर रही है। 

बिना जिम्मेदारी के सत्ता राहुल गांधी का चरित्र : राजनाथ

वहीं, महाराष्ट्र सरकार में कांग्रेस की भूमिका के बारे में राहुल गांधी के बयान पर सिंह ने कहा कि जिम्मेदारी के बिना सत्ता उनका चरित्र है। उन्होंने कहा कि सारी दुनिया इस बात को स्वीकार कर रही है कि मोदी सरकार में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। साल 2013 में देश की जो आर्थिक स्थिति थी उसकी तुलना में साल 2019 में स्थिति बहुत बेहतर हुई है। 

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए सिंह ने कहा, ‘राहुल कह चुके हैं कि कांग्रेस महाराष्ट्र में प्रमुख फैसले नहीं ले सकती है। इसका क्या मतलब है? क्या वह ऐसे संकट के समय में अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं? यह कुछ नया नहीं है, बिना जिम्मेदारी के सत्ता उनका चरित्र है।’

चीन से विवाद पर बोले, देश का गौरव प्रभावित नहीं होने देंगे

वहीं, भारत और चीन के बीच बढ़ रहे सीमा विवाद को लेकर रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन के साथ सैन्य और राजनीतिक स्तर पर बातचीत चल रही है और अभी तक की बातचीत सकारात्मक रही है। भारत और चीन सीमा पर स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि हम भारत के गौरव को प्रभावित नहीं होने देंगे।

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बहुत लंबे समय से चल रहा है। हम इसे जल्द से जल्द हल करना चाहते हैं। ‘आज राहुल गांधी और कुछ विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारत और चीन सीमा पर क्या हो रहा है। देश का रक्षा मंत्री होने के नाते मैं यह कहना चाहता हूं कि मुझे जो कुछ भी कहना होगा मैं संसद में कहूंगा, मैं लोगों को धोखे में नहीं रखूंगा।’

उन्होंने कहा कि छह जून को हुई वार्ता बहुत सकारात्मक थी और भारत और चीन इस विवाद को हल करने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए थे। मैं लोगों को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि देश का नेतृत्व मजबूत हाथों में है और हम देश के आत्मसम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।

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