न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Updated Fri, 22 May 2020 08:19 AM IST

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत-यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
– फोटो : Facebook

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भाजपा और कांग्रेस के बीच बसों को लेकर हो रही राजनीति बढ़ती ही जा रही है। दोनों पक्षों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को एक हजार बसें देने वाले प्रस्ताव को लेकर शुरू हुई राजनीति खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। 

अब इस राजनीति में राजस्थान सरकार भी कूद पड़ी है। दरअसल, राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को 36.36 लाख रुपये का बिल भेजा है। यह बिल कोटा से यूपी लाए गए बच्चों के लिए 70 बसें उपलब्ध करवाने का है। भाजपा राजस्थान सरकार की इस हरकत के बाद कांग्रेस को लेकर और अधिक हमलावर हो गई है। 

राजस्थान सरकार ने ये बिल उन छात्रों के नाम से भेजा है, जिन्हें राजस्थान परिवहन की बसों से कोटा से उत्तर प्रदेश भेजा गया था। दरअसल, यूपी सरकार ने कोटा में फंसे राज्य के छात्रों को लाने के लिए बसें भेजी थी, लेकिन छात्रों की संख्या अधिक होने की वजह से राजस्थान सरकार ने अपनी कुछ बसों से छात्रों को घर पहुंचाया। इसके लिए राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को कुल 36,36,664 रुपये का बिल भेजा है। 

छात्रों की संख्या अधिक होने पर राजस्थान सरकार ने 70 बसों का इंतजाम किया था
कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन लागू किया, जिस कारण राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में करीब 12 हजार छात्र फंस गए थे। इनकी घर वापसी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने  560 बसें भेजी थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण राजस्थान ने अपनी तरफ से 70 बसों का इंतजाम किया था। अब राजस्थान सरकार इन्हीं बसों का किराया मांग रही है। 

आधी रात दफ्तर खुलवाकर लिए 19 लाख रुपये
वहीं, बस विवाद पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कांग्रेस को निशाने पर लिया है। पात्रा ने दावा किया है कि यूपी सरकार पहले ही 19 लाख रुपये डीजल के बिल के रूप में चुका चुकी है। 

पात्रा ने ट्वीट किया, ‘कोटा से उत्तर प्रदेश के छात्रों को वापिस लाते समय यूपी के कुछ बसों को डीजल की आवश्यकता पड़ गई ..दया छोड़िए ..आधी रात को दफ्तर खुलवाकर प्रियंका वाड्रा की राजस्थान सरकार ने यूपी सरकार से पहले 19 लाख रुपए लिए और उसके बाद बसों को रवाना होने दिया, वाह रे मदद।’
 

 

भाजपा और कांग्रेस के बीच बसों को लेकर हो रही राजनीति बढ़ती ही जा रही है। दोनों पक्षों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को एक हजार बसें देने वाले प्रस्ताव को लेकर शुरू हुई राजनीति खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। 

अब इस राजनीति में राजस्थान सरकार भी कूद पड़ी है। दरअसल, राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को 36.36 लाख रुपये का बिल भेजा है। यह बिल कोटा से यूपी लाए गए बच्चों के लिए 70 बसें उपलब्ध करवाने का है। भाजपा राजस्थान सरकार की इस हरकत के बाद कांग्रेस को लेकर और अधिक हमलावर हो गई है। 

राजस्थान सरकार ने ये बिल उन छात्रों के नाम से भेजा है, जिन्हें राजस्थान परिवहन की बसों से कोटा से उत्तर प्रदेश भेजा गया था। दरअसल, यूपी सरकार ने कोटा में फंसे राज्य के छात्रों को लाने के लिए बसें भेजी थी, लेकिन छात्रों की संख्या अधिक होने की वजह से राजस्थान सरकार ने अपनी कुछ बसों से छात्रों को घर पहुंचाया। इसके लिए राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को कुल 36,36,664 रुपये का बिल भेजा है। 

छात्रों की संख्या अधिक होने पर राजस्थान सरकार ने 70 बसों का इंतजाम किया था
कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन लागू किया, जिस कारण राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में करीब 12 हजार छात्र फंस गए थे। इनकी घर वापसी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने  560 बसें भेजी थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण राजस्थान ने अपनी तरफ से 70 बसों का इंतजाम किया था। अब राजस्थान सरकार इन्हीं बसों का किराया मांग रही है। 

आधी रात दफ्तर खुलवाकर लिए 19 लाख रुपये
वहीं, बस विवाद पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कांग्रेस को निशाने पर लिया है। पात्रा ने दावा किया है कि यूपी सरकार पहले ही 19 लाख रुपये डीजल के बिल के रूप में चुका चुकी है। 

पात्रा ने ट्वीट किया, ‘कोटा से उत्तर प्रदेश के छात्रों को वापिस लाते समय यूपी के कुछ बसों को डीजल की आवश्यकता पड़ गई ..दया छोड़िए ..आधी रात को दफ्तर खुलवाकर प्रियंका वाड्रा की राजस्थान सरकार ने यूपी सरकार से पहले 19 लाख रुपए लिए और उसके बाद बसों को रवाना होने दिया, वाह रे मदद।’
 

 

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