नई दिल्ली: इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान (Pakistan) को चैन नहीं आया है. अब उसने भारत को बदनाम करने के लिए नई साजिशों को अंजाम देना शुरू कर दिया है. उसकी कोशिश भारत में भाजपा समर्थक और विरोधियों के बीच नफरत पैदा करने की है और इसके लिए वह धर्म का सहारा ले रहा है. पाकिस्तान ने ICO की बैठक में भारत पर इस्लामोफोबिया (Islamophobia) को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाकर इस्लामिक देशों का समर्थन जुटाने का प्रयास किया था, लेकिन वह अपनी इस चाल में बुरी तरह नाकाम रहा. सऊदी, UAE के साथ-साथ मालद्वीप ने भी पाक को खरी-खोटी सुनाई.     

अब पाकिस्तान भारत सरकार को बदनाम करने के लिए अलग -अलग हथकंडे अपना रहा है. उसके विदेशमंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के खिलाफ जहर उगलने में व्यस्त हैं. उन्होंने अपने एक ट्वीट कहा था, ‘पाकिस्तान लगातार @UN & @OIC_OCI से अपील करता आ रहा है कि वे मोदी की हिंदुत्व विचारधारा, इस्लामोफोबिया और हिंसा/क्षेत्रीय अक्षमता की निंदा करें’. प्रधानमंत्री इमरान खान भी सोशल मीडिया को भारत को बदनाम करने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. कुरैशी, जो खुद ऐसी विचारधारा के पक्षधर हैं जहां अल्पसंख्यकों का कोई अधिकार नहीं, ने भारतीय राजनीति के प्रति अपनी अज्ञानता का खुलासा करते हुए भारतीय PM मोदी की विचारधारा को लेकर टिप्पणी की थी, हालांकि बाद में उन्होंने अपने ट्वीट को संपादित कर दिया.  

भारत में सक्रिय हैं पाकिस्तानी एजेंसियां
बात केवल सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार की ही नहीं है. पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर यह झूठ फैलाने के लिए कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव हो रहा है, खास रणनीति तैयार की है. उसने बयाकादा कई लॉबिस्ट को नियुक्त किया है, जिनका काम पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और ब्रिटेन में भारत के खिलाफ झूठे और भ्रामक लेखों को प्रकाशित करवाना है. ताकि यह दर्शाया जा सके कि मोदी के राज में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है और अब भारत अब लोकतंत्र नहीं रह गया है. इसके अलावा, विभिन्न समुदायों के लोगों में विभाजन पैदा करने के लिए पाकिस्तानी एजेंसियां भारत में भी सक्रिय हैं.

दिल्ली दंगे का पाकिस्तानी लिंक
इससे पहले Zee News ने बताया है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को दिल्ली दंगों में पाकिस्तान एजेंसियों का डायरेक्ट लिंक मिला है. सुरक्षा एजेंसियों और साइबर विशेषज्ञों की एक संयुक्त जांच से पता चला है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (PTI) की छात्रसंघ इकाई ने दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों को भड़काने के लिए ISI के साथ मिलकर फर्जी ट्वीट्स और वीडियो वायरल किये. PTI की स्टूडेंट विंग इंसाफ स्टूडेंट्स फेडरेशन (ISF) ने कथित तौर पर फर्जी खबरें फैलाने और दिल्ली दंगे को मुस्लिम विरोधी नरसंहार के रूप में पेश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. साथ ही उसने दहशत और अफवाह फैलाने के लिए हिंदुओं के नाम से सैकड़ों फर्जी अकाउंट भी बनाए थे.

जांच में यह सामने आया है कि वह ISF था जिसने सबसे पहले हैशटैग #RSSkillingMuslims और #GenocideOfMuslims इस्तेमाल किए और अपने सदस्यों से उन्हें ज्यादा से ज्यादा रीट्वीट करने को कहा. ताकि भारत के खिलाफ माहौल तैयार किया जा सके. हाल ही में, मालदीव और यूएई ने OIC में अल्पसंख्यक और इस्लामोफोबिया जैसे विषयों पर भारत को बदनाम करने के लिए पाकिस्तान को खरीखोटी सुनाई. मालदीव की तरफ से कहा गया कि भारत पर इस्लामोफोबिया का आरोप लगाना गलत है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में 20 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम रहते हैं. लिहाजा भारत पर इस्लामोफोबिया का गलत आरोप दक्षिण एशिया में धार्मिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाएगा.

ध्यान भटकाने की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कई इस्लामिक देशों, जैसे सऊदी अरब, यूएई, अफगानिस्तान, फिलिस्तीन, मॉरीशस के साथ अच्छे संबंध स्थापित किये हैं. इन देशों ने भारतीय PM को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी नवाजा है. पाकिस्तान को यह रास नहीं आ रहा है, इसलिए हर संभव प्रयास करता रहता है कि अल्पसंख्यकों के बारे में झूठ फैला रहा है दुनिया को भारत के खिलाफ भड़काया जा सके. इसके पीछे एक वजह यह भी है कि वो बलूचिस्तान और सिंध में पाकिस्तानी सेना द्वारा किये जा रहे अत्याचार से अंतर्राष्ट्रीय मंच का ध्यान भटकाना चाहता है. कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने वैश्विक मंच पर यह मुद्दा उठाया है, जिसकी वजह से इमरान सरकार को आलोचना झेलनी पड़ रही है.

 

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