• फंड इंडस्ट्री का कुल एयूएम अप्रैल में 23.9 लाख करोड़ रुपए था
  • मई में यह करीबन 60,000 करोड़ रुपए बढ़कर 24.5 लाख करोड़ हुआ

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 08:43 PM IST

मुंबई. मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश 5,256.52 करोड़ रुपए रहा है। अप्रैल की तुलना में इसमें 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जबकि म्यूचुअल फंड के कुल असेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) में मामूली बढ़त आई है। अप्रैल में पूरी इंडस्ट्री का कुल एयूएम 23.9 लाख करोड़ रुपए था। यह मई में बढ़कर 24.5 लाख करोड़ हो गया। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एंफी) ने दी। सोमवार को यह आंकड़े जारी किए गए।

इक्विटी फंड पर बाजार की अस्थिरता का रहा असर

एंफी के सीईओ एन एस वेंकटेश ने कहा कि आर्थिक अनिश्चितता और बाजार में अस्थिरता के बावजूद मैच्योरिटी निवेश दिखाने वाले निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड में विश्वास जारी रखा है। इसे मासिक एसआईपी में भी देखा जा सकता है। डेट की ओर से जो निवेशक कम ब्याज दरों का लाभ लेने और उच्च क्वालिटी एएए रेटेड में निवेश की सोच रहे थे, उनके नेट इंफ्लो में लगातार वृद्धि हुई है। इक्विटी फंड्स के लिहाज से अच्छी बात यह रही कि सभी इक्विटी फंड कैटेगरी में मई महीने में नेट इंफ्लो रजिस्टर्ड हुआ।

लॉर्ज कैप फंड में 1,555 करोड़ रुपए आए

सबसे ज्यादा आय 1,555 करोड़ रुपए लॉर्ज कैप फंड्स में आई। मल्टी कैप फंड्स में 758 करोड़ रुपए का इंफ्लो आया। विश्लेषकों के मुताबिक निवेशक कोविड-19 महामारी के कारण बाजार में अस्थिरता और अनिश्चित आर्थिक माहौल को देखते हुए लॉर्ज और मल्टी कैप फंड्स को तरजीह दे रहे हैं। दूसरी ओर, क्रेडिट रिस्क फंड ने मई में कुछ राहत की सांस ली है। इसमें से निवेशक अब पैसा निकालना बंद कर दिए हैं। हाल के समय में इस कैटेगरी से निवेशक काफी पैसा निकाल रहे थे।

क्रेडिट रिस्क में 5,173 करोड़ का रहा आउटफ्लो

क्रेडिट रिस्क आउटफ्लो अप्रैल में 19,239 करोड़ रुपए से घटकर मई में 5,173 करोड़ रुपए रह गया। अप्रैल के महीने में क्रेडिट रिस्क फंड्स में बड़े पैमाने पर आउट फ्लो देखा गया। क्योंकि निवेशक फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया द्वारा अपनी 6 डेट स्कीम्स को बंद करने से डर गए थे। क्रेडिट रिस्क फंड एक ऐसा डेट फंड है जो एए-रेटेड से कम रेटिंग वाले पेपर्स में कुल निवेश का लगभग 65 प्रतिशत निवेश करता है। चूंकि कम रेटेड पेपर में निवेश से संबंधित जोखिम अधिक होता है, इसलिए इन पेपर्स पर रिटर्न भी ज्यादा होता है।

क्रेडिट रिस्क फंड रिडेंम्पशन के तनाव से गुजर रहा है 

फंड मैनेजर्स ने कहा कि क्रेडिट रिस्क फंड रिडेम्पशन के तनाव से जूझ रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर फंड हाउस का निवेश इललिक्विड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में था। भारतीय बांड बाजारों के कम क्रेडिट स्पेस में लिक्विडिटी के दबाव और आगामी जोखिम से परहेज के सेंटिमेंट को देखते हुए निवेशकों ने अपने आप को सुरक्षित रखने का फैसला लिया। इससे निवेशक अपने निवेश को उन रास्तों से भुनाने के लिए पहुंचे, जिसे उन्होंने उच्च जोखिम के रूप में माना था।

आरबीआई ने जारी की थी 50,000 करोड़ की सुविधा

हालांकि वेंकटेश का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक और सेबी द्वारा डर को शांत करने के लिए उठाए गए विश्वास बहाली के कदमों के कारण क्रेडिट रिस्क फंड्स के आउटफ्लो में कमी आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 27 अप्रैल को म्यूचुअल फंड के लिए 50,000 करोड़ रुपए की विशेष लिक्विडिटी सुविधा की घोषणा की थी। क्योंकि फ्रैंकलिन टेंपलटन बंद होने इसकी जरूरत महसूस की गई थी। आरबीआई की लिक्विडिटी सुविधा ने अधिकांश म्यूचुअल फंडों, विशेष रूप से रिडेम्पशन से जूझ रहे लोगों और ग्राहकों के बीच विश्वास पैदा किया। जिससे लिक्विडिटी पर दबाव कम हो गया।

सेबी ने भी उठाया कदम 

पूंजी बाजार नियामक सेबी भी सबसे आगे था और उसने उन स्कीम्स की म्यूचुअल फंड इकाइयों को लिस्टेड करने की अनुमति दी जो कारोबार समेटने की प्रक्रिया में थीं। इस कदम से फ्रैंकलिन टेंपलटन म्यूचुअल फंड को उन निवेशकों के लिए अपनी इकाइयों की लिस्ट बनाने की अनुमति मिली जो बाहर निकलना चाहते हैं।

ओवरनाइट फंड से भी हुई पैसों की निकासी

लिक्विडिटी फंड जिसका उपयोग कंपनियों द्वारा सरप्लस कैश को पार्क करने के लिए किया जाता है, उसमें लगातार दूसरे महीने नेट इंफ्लो दर्ज हुआ। क्योंकि निवेशकों ने आरबीआई से लिक्विडिटी बढ़ाने के उपायों के कारण निवेश को शिफ्ट कर दिया। इस कैटेगरी में 61,870 करोड़ रुपए का सबसे अधिक इंफ्लो दर्ज किया गया। अप्रैल में 68,848 करोड़ रुपए का इंफ्लो था। दूसरी ओर ओवरनाइट फंड्स में सबसे ज्यादा 15,880 करोड़ रुपए का आउट फ्लो देखा गया क्योंकि निवेशक इस फंड्स से लिक्विड फंड्स में शिफ्ट हो गए।

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