न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 09 Jun 2020 03:01 PM IST

भारत-चीन के बीच अगले कुछ दिनों में वार्ता होगी (फाइल फोटो)
– फोटो : social media

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पूर्वी लद्दाख में जारी सीमा विवाद को खत्म करने के लिए भारतीय सेना के कुछ सदस्य चुशुल में चीन के साथ अगले कुछ दिनों में वार्ता कर सकते हैं। सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘सैन्य दल के सदस्य चुशुल में हैं और वे अगले कुछ दिनों में होने वाली बातचीत की तैयारी कर रहे हैं।’
टीम को सेना मुख्यालय और सरकारी अधिकारियों से मामले के समाधान में मदद करने के लिए निर्देश और आदेश दिए गए हैं। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच छह जून को सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत हुई। जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया था। वहीं चीन की तरफ से दक्षिण झिंजियांग सैन्य जिला कमांडर मेजर जनरल लियू लिन थे। यह बैठक मोल्डो में हुई थी।

इस वार्ता का जमीन पर कोई तत्कालिक परिणाम नहीं निकला क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के विपरीत गतिरोध की स्थिति में बने हुए हैं। दोनों पक्ष समस्या का हल खोजने के लिए राजनयिक और सैन्य दोनों स्तरों पर बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए थे। सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि चीन के साथ सैन्य और राजनयिक स्तरों पर वार्ता जारी है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ‘छह जून को सैन्य स्तर पर वार्ता हुई है। हम किसी भी देश के मान, सम्मान और स्वाभिमान को न चोट पहुंचाते हैं और न ही हम चोट बर्दाश्त करेंगे। कांग्रेस के कई नेता सवाल पूछ रहे हैं कि भारत-चीन सीमा पर क्या हो रहा है? मैं देश की जनता को आश्वस्त करना चाहूंगा कि संसद में इस बारे में विस्तार से जानकारी दूंगा।’

इससे पहले महाराष्ट्र जनसंवाद रैली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए राजनाथ ने कहा कि चीन से बातचीत सकारात्मक रही और यह जारी रहेगी। हम जल्द से जल्द सीमा विवाद के मसले को सुलझा लेंगे। मैं देश की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि देश का नेतृत्व मजबूत हाथों में हैं। देश के स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुंचने दूंगा।

यह मुद्दा पिछले महीने की शुरुआत में तब शुरू हुआ था जब चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सैन्य निर्माण करना शुरू कर दिया और एलएसी के साथ कई स्थानों पर सेना को तैनात करना शुरू कर दिया। इसमें पेगोंग त्सो झील और गलवां घाटी शामिल हैं। चीनी सैनिक विवादित क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बलों के साथ कई बार आमने-सामने हो चुके हैं। जिसमें दोनों देशों के जवान घायल हुए हैं।

पूर्वी लद्दाख में जारी सीमा विवाद को खत्म करने के लिए भारतीय सेना के कुछ सदस्य चुशुल में चीन के साथ अगले कुछ दिनों में वार्ता कर सकते हैं। सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘सैन्य दल के सदस्य चुशुल में हैं और वे अगले कुछ दिनों में होने वाली बातचीत की तैयारी कर रहे हैं।’

टीम को सेना मुख्यालय और सरकारी अधिकारियों से मामले के समाधान में मदद करने के लिए निर्देश और आदेश दिए गए हैं। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच छह जून को सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत हुई। जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया था। वहीं चीन की तरफ से दक्षिण झिंजियांग सैन्य जिला कमांडर मेजर जनरल लियू लिन थे। यह बैठक मोल्डो में हुई थी।

इस वार्ता का जमीन पर कोई तत्कालिक परिणाम नहीं निकला क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के विपरीत गतिरोध की स्थिति में बने हुए हैं। दोनों पक्ष समस्या का हल खोजने के लिए राजनयिक और सैन्य दोनों स्तरों पर बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए थे। सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि चीन के साथ सैन्य और राजनयिक स्तरों पर वार्ता जारी है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ‘छह जून को सैन्य स्तर पर वार्ता हुई है। हम किसी भी देश के मान, सम्मान और स्वाभिमान को न चोट पहुंचाते हैं और न ही हम चोट बर्दाश्त करेंगे। कांग्रेस के कई नेता सवाल पूछ रहे हैं कि भारत-चीन सीमा पर क्या हो रहा है? मैं देश की जनता को आश्वस्त करना चाहूंगा कि संसद में इस बारे में विस्तार से जानकारी दूंगा।’

इससे पहले महाराष्ट्र जनसंवाद रैली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए राजनाथ ने कहा कि चीन से बातचीत सकारात्मक रही और यह जारी रहेगी। हम जल्द से जल्द सीमा विवाद के मसले को सुलझा लेंगे। मैं देश की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि देश का नेतृत्व मजबूत हाथों में हैं। देश के स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुंचने दूंगा।

यह मुद्दा पिछले महीने की शुरुआत में तब शुरू हुआ था जब चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सैन्य निर्माण करना शुरू कर दिया और एलएसी के साथ कई स्थानों पर सेना को तैनात करना शुरू कर दिया। इसमें पेगोंग त्सो झील और गलवां घाटी शामिल हैं। चीनी सैनिक विवादित क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बलों के साथ कई बार आमने-सामने हो चुके हैं। जिसमें दोनों देशों के जवान घायल हुए हैं।

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