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पूर्व हॉकी कप्तान और तीन बार ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट रहे 96 वर्षीय बलबीर सिंह सीनियर नहीं रहे। सुबह 6 बजकर 17 मिनट पर उनका देहांत हो गया। बलबीर सिंह सीनियर को गत 8 मई को तबीयत खराब होने के बाद मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इस बार वह शुरू से ही वेंटिलेटर पर रहे और इस दौरान उन्हें तीन बार हार्ट अटैक भी आया। इस बार उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही और सोमवार को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। बलबीर सिंह सीनियर सेक्टर 36 चंडीगढ़ में अपनी बेटी सुखबीर कौर और नाती कबीर के साथ रहते थे।

बलबीर सिंह के तीन बेटे कनाडा में रहते हैं। बलबीर सिंह सीनियर पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। पिछले साल भी वह पीजीआई में भर्ती रहे थे और उस समय वह जिंदगी की लड़ाई जीत कर वापिस अपने घर भी पहुंच गए थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया।

बलबीर सिंह सीनियर की उपलब्धियां
बलबीर सिंह सीनियर लंदन ओलंपिक 1948, हेलसिंकी ओलंपिक 1952 और मेलबर्न ओलंपिक 1956 में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। 1956 के ओलंपिक में वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान बने थे। इसके अलावा वह वर्ल्ड कप 1971 में ब्रॉन्ज और वर्ल्ड कप 1975 में गोल्ड जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच थे।

पूर्व हॉकी कप्तान और तीन बार ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट रहे 96 वर्षीय बलबीर सिंह सीनियर नहीं रहे। सुबह 6 बजकर 17 मिनट पर उनका देहांत हो गया। बलबीर सिंह सीनियर को गत 8 मई को तबीयत खराब होने के बाद मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इस बार वह शुरू से ही वेंटिलेटर पर रहे और इस दौरान उन्हें तीन बार हार्ट अटैक भी आया। इस बार उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही और सोमवार को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। बलबीर सिंह सीनियर सेक्टर 36 चंडीगढ़ में अपनी बेटी सुखबीर कौर और नाती कबीर के साथ रहते थे।

बलबीर सिंह के तीन बेटे कनाडा में रहते हैं। बलबीर सिंह सीनियर पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। पिछले साल भी वह पीजीआई में भर्ती रहे थे और उस समय वह जिंदगी की लड़ाई जीत कर वापिस अपने घर भी पहुंच गए थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया।

बलबीर सिंह सीनियर की उपलब्धियां
बलबीर सिंह सीनियर लंदन ओलंपिक 1948, हेलसिंकी ओलंपिक 1952 और मेलबर्न ओलंपिक 1956 में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। 1956 के ओलंपिक में वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान बने थे। इसके अलावा वह वर्ल्ड कप 1971 में ब्रॉन्ज और वर्ल्ड कप 1975 में गोल्ड जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच थे।

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