किरण मोरे 58 साल के हुए

टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे (Kiran More) 58 साल के हुए

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 4, 2020, 7:28 AM IST

नई दिल्ली. टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे (Happy Birthday Kiran More) का आज जन्मदिन है. 4 सितंबर, 1962 को बड़ौदा में जन्मे मोरे आज 58 साल के हो गए हैं. मोरे को भारत के सबसे बेहतरीन विकेटकीपरों में से एक माना जाता है. इस खिलाड़ी ने 49 टेस्ट और 94 वनडे मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. मोरे ने टेस्ट में 1285 और वनडे में 563 रन बनाए. अपने इंटरनेशनल करियर में वो एक भी शतक नहीं लगा सके लेकिन बतौर विकेटकीपर उन्होंने टीम इंडिया की जीत में अहम योगदान दिये. मोरे ने टेस्ट में कुल 130 शिकार किये और वनडे में उन्होंने 90 बल्लेबाजों को आउट करने में योगदान दिया. मोरे के क्रिकेटिंग करियर और रिटायरमेंट के बाद कई दिलचस्प घटनाएं घटित हुई. आइए डालते हैं उनपर एक नजर.

1982-83 में किरण मोरे वेस्टइंडीज दौरे पर सैयद किरमानी के विकल्प के तौर पर गए, हालांकि उन्हें मौका नहीं मिल पाया. साल 1983-84 रणजी सीजन में मोरे ने कमाल प्रदर्शन करते हुए 153 और 181 रनों की पारी खेली और उन्होंने अपनी टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया. हालांकि किरण मोरे साल 1986 में इंग्लैंड दौरे पर स्टार बने. जहां उन्होंने बतौर विकेटकीपर और बल्लेबाजी में भी आलोचकों के मुंह बंद किये. किरण मोरे ने इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में 16 कैच लपकने के साथ-साथ 52 की औसत से 156 रन भी बनाए.

साल 1988 में किरण मोरे ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. चेन्नई में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच में मोरे ने 6 बल्लेबाजों को स्टंप आउट किया, जो कि एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है. वैसे बतौर विकेटकीपर उन्होंने अपने करियर में एक ऐसी गलती की, जिसका पछतावा उन्हें हमेशा रहा. बात 1990 लॉर्ड्स टेस्ट की है जब उन्होंने ग्राहम गूच का कैच महज 36 रन पर टपका दिया. इस जीवनदान के बाद गूच ने भारत के खिलाफ 333 रनों की विशाल पारी खेल डाली. भारत ये टेस्ट 247 रनों से हारा.

साल 1992 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में किरण मोरे और जावेद मियांदाद की नोंकझोंक हर किसी के जहन में आज भी ताजा है. इस मुकाबले में मोरे लगातार अपील कर रहे थे जिसके बाद जावेद मियांदाद ने परेशान होकर अचानक पिच पर उछलना शुरू कर दिया था.

किरण मोरे ने संन्यास के बाद भारतीय चयन समिति भी संभाली. बतौर चीफ सेलेक्टर उन्होंने सौरव गांगुली को टीम से बाहर करने का फैसला किया, जिसके बाद फैंस उनसे नाराज हो गए. देशभर में उस वक्त के कोच ग्रेग चैपल और किरण मोरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई.

किरण मोरे को बीसीसीआई का भी बैन झेलना पड़ा. साल 2007 में किरण मोरे बागी इंडियन क्रिकेट लीग के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बन गए, जिसके बाद बीसीसीआई ने उन्हें और कपिल देव को बैन कर दिया.

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