किसान हरवीर सिंह साइकिल से पहुंचे गाजीपुर बॉर्डर
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तीन महीने से ज्यादा समय से चल रहे किसान आंदोलन में मीडिया की दिलचस्पी भले ही कुछ कम हो गई है, लेकिन किसानों का जोश अभी भी बरकरार है। रविवार को मेरठ के पलवाड़ी से साइकिल चलाकर गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे 73 वर्षीय बुजुर्ग किसान हरवीर सिंह ने कहा कि हमारा जोश थमा नहीं है और यह आंदोलन तभी रुकेगा जब सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करेगी।

हरवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने रविवार सुबह नौ बजे अपने घर से गाजीपुर बॉर्डर पर आने के लिए रवाना हुए थे और शाम होने तक यहां पहुंच गए। लेकिन इतनी लंबी यात्रा में भी उन्हें कोई थकान नहीं है क्योंकि वे एक ऐसे आंदोलन को समर्थन देने के लिए यहां आए हैं जो उनकी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लड़ा जा रहा है। हरवीर सिंह ने कहा कि यह एक प्रकार का युद्ध है और हर अन्नदाता इसका एक सैनिक बना हुआ है।

और सैनिकों को इसी बात के लिए जाना जाता है कि या तो वे जीतकर आते हैं या वहीं शहीद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन का भी यही लक्ष्य है। वे यहां से या तो कृषि कानून वापस करवाकर जाएंगे या यहीं शहीद हो जाएंगे। लेकिन कृषि कानूनों की वापसी के बिना वे अपने घर वापस जाने को तैयार नहीं हैं।

रविवार को ही महाराष्ट्र के छात्रों ने भी किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए महाराष्ट्र से गाजीपुर बॉर्डर तक की यात्रा पूरी की। भारतीय किसान यूनियन (युवा) के अध्यक्ष गौरव टिकैत ने महाराष्ट्र स्टूडेंट्स यूनियन (मासू) के सदस्यों के साथ बैठक की और कहा कि महाराष्ट्र के छात्र भी किसान आंदोलन में पूरी तरह देश के अन्नदाताओं के साथ हैं। जब-जब आवश्यकता होगी, महाराष्ट्र के छात्र किसानों का साथ देने के लिए यहां तक आएंगे।

मासू के अध्यक्ष सिद्धार्थ सोनाजी इंगले ने कहा कि देश का अन्नदाता पूरे देश को चलाने वाला होता है। अगर वह संकट में आता है तो पूरा देश ज्यादा देर तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए इस लड़ाई में वे किसानों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक किसानों की हर लड़ाई में छात्र उनके साथ खड़े हैं और वे किसानों का हर तरीके से समर्थन करेंगे।

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तीन महीने से ज्यादा समय से चल रहे किसान आंदोलन में मीडिया की दिलचस्पी भले ही कुछ कम हो गई है, लेकिन किसानों का जोश अभी भी बरकरार है। रविवार को मेरठ के पलवाड़ी से साइकिल चलाकर गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे 73 वर्षीय बुजुर्ग किसान हरवीर सिंह ने कहा कि हमारा जोश थमा नहीं है और यह आंदोलन तभी रुकेगा जब सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करेगी।

हरवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने रविवार सुबह नौ बजे अपने घर से गाजीपुर बॉर्डर पर आने के लिए रवाना हुए थे और शाम होने तक यहां पहुंच गए। लेकिन इतनी लंबी यात्रा में भी उन्हें कोई थकान नहीं है क्योंकि वे एक ऐसे आंदोलन को समर्थन देने के लिए यहां आए हैं जो उनकी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लड़ा जा रहा है। हरवीर सिंह ने कहा कि यह एक प्रकार का युद्ध है और हर अन्नदाता इसका एक सैनिक बना हुआ है।

और सैनिकों को इसी बात के लिए जाना जाता है कि या तो वे जीतकर आते हैं या वहीं शहीद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन का भी यही लक्ष्य है। वे यहां से या तो कृषि कानून वापस करवाकर जाएंगे या यहीं शहीद हो जाएंगे। लेकिन कृषि कानूनों की वापसी के बिना वे अपने घर वापस जाने को तैयार नहीं हैं।

रविवार को ही महाराष्ट्र के छात्रों ने भी किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए महाराष्ट्र से गाजीपुर बॉर्डर तक की यात्रा पूरी की। भारतीय किसान यूनियन (युवा) के अध्यक्ष गौरव टिकैत ने महाराष्ट्र स्टूडेंट्स यूनियन (मासू) के सदस्यों के साथ बैठक की और कहा कि महाराष्ट्र के छात्र भी किसान आंदोलन में पूरी तरह देश के अन्नदाताओं के साथ हैं। जब-जब आवश्यकता होगी, महाराष्ट्र के छात्र किसानों का साथ देने के लिए यहां तक आएंगे।

मासू के अध्यक्ष सिद्धार्थ सोनाजी इंगले ने कहा कि देश का अन्नदाता पूरे देश को चलाने वाला होता है। अगर वह संकट में आता है तो पूरा देश ज्यादा देर तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए इस लड़ाई में वे किसानों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक किसानों की हर लड़ाई में छात्र उनके साथ खड़े हैं और वे किसानों का हर तरीके से समर्थन करेंगे।

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