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लाॅकडाउन के दौरान शहर में होने वाले छोटे मोटे आपराधिक मामलों में लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। वजह यह कि पुलिस इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। संगीन अपराधों को छोड़ दें तो पुलिस चोरी, मारपीट और छेड़छाड़ के मामलों पर काम नहीं कर रही। ऑनलाइन शिकायतों का भी अंबार लगा हुआ है। पुलिस अधिकारी लाॅकडाउन के नियमों पर ही अमल कराने में जुटे हुए हैं। 

कोरोना काल में कोर्ट कचहरी हो या पुलिस अधिकारियों के यहां मिलने वाला इंसाफ सब अधर में लटके हैं। पीड़ित परेशान हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इंसाफ मांगने आखिर जाएं कहां।  
पुलिस अधिकारियों को फोन करते हैं तो जवाब मिलता है कि लॉकडाउन के बाद समस्या सुनी जाएगी।

मेरठ जनपद आइजीआरएस ऑनलाइन शिकायतों में के निस्तारण में हमेशा अव्वल रहता था। अब हालत यह है कि ऑनलाइन शिकायतों का भी निस्तारण नहीं हो रहा।

हत्या, लूट और डकैती की ताजा वारदातों को छोड़कर अन्य किसी घटना पर पुलिस का कोई फोकस नहीं है। एसपी का दावा है कि पुरानी विवेचना का निस्तारण कराने के लिए सभी सीओ और थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं।

शिकायतों का बड़ा है ग्राफ 
आइजीआरएस पोर्टल पर मेरठ जनपद में प्रतिमाह 3 से 4 शिकायतें आती थीं, जिसमें 98 से 99 फीसदी निस्तारण करना अनिवार्य था। लॉकडाउन में साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं।

साइबर अपराधी फोन करके ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। जनपद की साइबर सेल में रोजाना 1520 शिकायतें आ रही हैं। लेकिन यहां शिकायतें सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसे में समस्या निस्तारण का औसत भी शून्य है। 

नहीं हो रही सुनवाई 
पुलिस का परिवार परामर्श केंद्र दो माह से बंद पड़ा है। पारिवारिक मामलों की सुनवाई भी नहीं हो रही। पीपीके में करीब 5630 केस हैं जिनकी यहां अलग अलग तारीख लगती थी। फिलहाल पारिवारिक विवाद के मामले में पुलिस की तरफ से राहत नहीं मिल रही है।

पुलिस टीम लगी है 
ऑनलाइन शिकायतें आ रही हैं। इनकी सुनवाई के लिए पुलिस की एक टीम लगी है। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए पुलिस 12 12 घंटे ड्यूटी कर रही है। जल्द सभी शिकायतों को संज्ञान में लेकर निस्तारण किया जाएगा।  -अजय कुमार साहनी एसएसपी मेरठ 

सार

  • छोटे मोटे आपराधिक मामलों में लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा
  • शहर में होने वाली मारपीट, चोरी और छेड़छाड़ की घटनाओं पर पुलिस नहीं कर रही फोकस

विस्तार

लाॅकडाउन के दौरान शहर में होने वाले छोटे मोटे आपराधिक मामलों में लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। वजह यह कि पुलिस इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। संगीन अपराधों को छोड़ दें तो पुलिस चोरी, मारपीट और छेड़छाड़ के मामलों पर काम नहीं कर रही। ऑनलाइन शिकायतों का भी अंबार लगा हुआ है। पुलिस अधिकारी लाॅकडाउन के नियमों पर ही अमल कराने में जुटे हुए हैं। 

कोरोना काल में कोर्ट कचहरी हो या पुलिस अधिकारियों के यहां मिलने वाला इंसाफ सब अधर में लटके हैं। पीड़ित परेशान हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इंसाफ मांगने आखिर जाएं कहां।  

पुलिस अधिकारियों को फोन करते हैं तो जवाब मिलता है कि लॉकडाउन के बाद समस्या सुनी जाएगी।

मेरठ जनपद आइजीआरएस ऑनलाइन शिकायतों में के निस्तारण में हमेशा अव्वल रहता था। अब हालत यह है कि ऑनलाइन शिकायतों का भी निस्तारण नहीं हो रहा।

हत्या, लूट और डकैती की ताजा वारदातों को छोड़कर अन्य किसी घटना पर पुलिस का कोई फोकस नहीं है। एसपी का दावा है कि पुरानी विवेचना का निस्तारण कराने के लिए सभी सीओ और थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं।

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