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उत्तर प्रदेश सरकार ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का प्रस्ताव स्वीकार करके उनसे 1000 बसों की सूची मांगी, कांग्रेस महासचिव ने सूची दी, बसें भी यूपी बार्डर के पास आईं और राज्य सरकार की अनुमति न मिलने पर लौट गईं।

इस बारे में कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव, कर्नाटक के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार ने अच्छा मजाक किया? पहली बार पता चला कि राज्य सरकारें भी इस तरह का व्यवहार कर लेती हैं?

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर सवाल उठाया। पायलट ने कहा कि राज्य सरकार का रवैया बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रियंका गांधी ने भी बसें खाली लौट जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

प्रियंका ने कहा कि सैकड़ों बसें खाली लौट गईं। इनमें हजारों गरीब मजदूर अपने घर जा सकते थे। छोटे बच्चे, औरतों और लोगों को कड़ी धूप में पैदल न चलना पड़ता।

उन्होंने कहा है कि प्रवासी श्रमिकों की हालत देखकर आंखों में आसूं जाते हैं, लेकिन मजदूरों की इस दुर्दशा के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? प्रियंका गांधी ने इसके बाबत वीडियो भी जारी किया था।

जब बसें नहीं लेनी थीं तो यह ड्रामा क्यों किया?

सवाल लाख टके का है। कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि आखिर उत्तर प्रदेश सरकार को जब बस लेनी ही नहीं थीं, मजदूरों को उनके हाल पर ही छोड़ देना था तो कांग्रेस महासचिव के बसों का प्रस्ताव क्यों स्वीकार किया?

इस बारे में उत्तर प्रदेश सरकार के कई जिम्मेदार अफसर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पूरी क्षमता का पता चल गया। बसों के नाम पर हुए इस ड्रामे को प्रदेश की जनता ने देखा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रियंका गांधी के साथ मजाक किया था? समाजवादी नेता ने कहा कि वह कुछ नहीं कहना चाहते। क्योंकि इसमें मुख्यमंत्री और उनके काबिल अफसरों का भद्दापन ही दिखाई पड़ रहा है।

मायावती की बसपा सरकार में मंत्री रहे बसपा नेता सुधीर गोयल ने कहा कि एक तरफ सरकार मजदूरों को साधन नहीं दे पा रही है। वह अपने घर पैदल जा रहे हैं, दुर्घटना में मारे जा रहे हैं।

दूसरी तरफ एक राज्य सरकार संवेदनशील समय में इस तरह की राजनीति कर रही है। अब इसे क्रूर मजाक न कहें तो और क्या कहें?

सार

  • राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी उत्तर प्रदेश सरकार के रुख पर उठाया सवाल
  • प्रियंका ने कहा कि सैकड़ों बसें खाली लौट गईं। इनमें हजारों गरीब मजदूर अपने घर जा सकते थे
  • समाजवादी नेता बोले, बसों के नाम पर हुए इस ड्रामे को प्रदेश की जनता ने देखा

विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का प्रस्ताव स्वीकार करके उनसे 1000 बसों की सूची मांगी, कांग्रेस महासचिव ने सूची दी, बसें भी यूपी बार्डर के पास आईं और राज्य सरकार की अनुमति न मिलने पर लौट गईं।

इस बारे में कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव, कर्नाटक के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार ने अच्छा मजाक किया? पहली बार पता चला कि राज्य सरकारें भी इस तरह का व्यवहार कर लेती हैं?

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर सवाल उठाया। पायलट ने कहा कि राज्य सरकार का रवैया बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रियंका गांधी ने भी बसें खाली लौट जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

प्रियंका ने कहा कि सैकड़ों बसें खाली लौट गईं। इनमें हजारों गरीब मजदूर अपने घर जा सकते थे। छोटे बच्चे, औरतों और लोगों को कड़ी धूप में पैदल न चलना पड़ता।

उन्होंने कहा है कि प्रवासी श्रमिकों की हालत देखकर आंखों में आसूं जाते हैं, लेकिन मजदूरों की इस दुर्दशा के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? प्रियंका गांधी ने इसके बाबत वीडियो भी जारी किया था।

जब बसें नहीं लेनी थीं तो यह ड्रामा क्यों किया?

सवाल लाख टके का है। कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि आखिर उत्तर प्रदेश सरकार को जब बस लेनी ही नहीं थीं, मजदूरों को उनके हाल पर ही छोड़ देना था तो कांग्रेस महासचिव के बसों का प्रस्ताव क्यों स्वीकार किया?

इस बारे में उत्तर प्रदेश सरकार के कई जिम्मेदार अफसर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पूरी क्षमता का पता चल गया। बसों के नाम पर हुए इस ड्रामे को प्रदेश की जनता ने देखा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रियंका गांधी के साथ मजाक किया था? समाजवादी नेता ने कहा कि वह कुछ नहीं कहना चाहते। क्योंकि इसमें मुख्यमंत्री और उनके काबिल अफसरों का भद्दापन ही दिखाई पड़ रहा है।

मायावती की बसपा सरकार में मंत्री रहे बसपा नेता सुधीर गोयल ने कहा कि एक तरफ सरकार मजदूरों को साधन नहीं दे पा रही है। वह अपने घर पैदल जा रहे हैं, दुर्घटना में मारे जा रहे हैं।

दूसरी तरफ एक राज्य सरकार संवेदनशील समय में इस तरह की राजनीति कर रही है। अब इसे क्रूर मजाक न कहें तो और क्या कहें?

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