अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
Updated Sat, 23 May 2020 09:04 PM IST

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कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन को शनिवार को दो महीने पूरे हो गए। इस 60 दिनों में राजधानी दिल्ली में 12 हजार से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं। अच्छी बात यह है कि पिछले एक महीने में दिल्ली में कोरोना से उबरने वालों की दर 20 फीसदी तक बढ़ गई है, जो महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात से काफी बेहतर है।  

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शनिवार तक कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 12,910 तक पहुंच गई। इनमें से 6267 लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, एक माह पहले कोरोना संक्रमितों की संख्या 2156 थी। इनमें से महज 611 मरीज ही ठीक हो पाए थे। 

उस समय कोरोना से उबरने वालों की दर 28 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 48 हो गई है। अपोलो अस्पताल के डॉक्टर पीके सिंघल बताते हैं कि मरीजों के ठीक होने का सबसे बड़ा कारण है कि दिल्ली में 70 फीसदी से अधिक मरीज 50 साल से कम उम्र के हैं। 

इसका फायदा डॉक्टरों को इनकी इम्युनिटी बढ़ाने से मिल रहा है। ऐसा करने से मरीज आसानी से ठीक हो रहे हैं।  

कंटेनमेंट जोन की संख्या भी घटी  
दिल्ली सरकार ने लॉकडाउन के 60 दिनों के दौरान राजधानी में कई कंटेनमेंट क्षेत्र बनाए। एक समय यह आकंड़ा 100 के पार पहुंच गया था। इसके बाद कुछ क्षेत्रों को सरकार और लोगों के प्रयासों से ग्रीन जोन में भी बदला गया। 

राजधानी में फिलहाल कंटेनमेंट जोन की संख्या 86 है और 33 इलाके ऐसे हैं, जिन्हें कंटेनमेंट जोन से ग्रीन जोन में तब्दील किया जा चुका है। दक्षिण पूर्वी व दक्षिणी दिल्ली जिला हॉटस्पॉट के लिहाज से संवेदनशील हैं। वर्तमान में दिल्ली के 86 हॉटस्पॉट में से 28 इन्हीं जिलों से हैं। 

कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन को शनिवार को दो महीने पूरे हो गए। इस 60 दिनों में राजधानी दिल्ली में 12 हजार से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं। अच्छी बात यह है कि पिछले एक महीने में दिल्ली में कोरोना से उबरने वालों की दर 20 फीसदी तक बढ़ गई है, जो महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात से काफी बेहतर है।  

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शनिवार तक कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 12,910 तक पहुंच गई। इनमें से 6267 लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, एक माह पहले कोरोना संक्रमितों की संख्या 2156 थी। इनमें से महज 611 मरीज ही ठीक हो पाए थे। 

उस समय कोरोना से उबरने वालों की दर 28 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 48 हो गई है। अपोलो अस्पताल के डॉक्टर पीके सिंघल बताते हैं कि मरीजों के ठीक होने का सबसे बड़ा कारण है कि दिल्ली में 70 फीसदी से अधिक मरीज 50 साल से कम उम्र के हैं। 

इसका फायदा डॉक्टरों को इनकी इम्युनिटी बढ़ाने से मिल रहा है। ऐसा करने से मरीज आसानी से ठीक हो रहे हैं।  

कंटेनमेंट जोन की संख्या भी घटी  
दिल्ली सरकार ने लॉकडाउन के 60 दिनों के दौरान राजधानी में कई कंटेनमेंट क्षेत्र बनाए। एक समय यह आकंड़ा 100 के पार पहुंच गया था। इसके बाद कुछ क्षेत्रों को सरकार और लोगों के प्रयासों से ग्रीन जोन में भी बदला गया। 

राजधानी में फिलहाल कंटेनमेंट जोन की संख्या 86 है और 33 इलाके ऐसे हैं, जिन्हें कंटेनमेंट जोन से ग्रीन जोन में तब्दील किया जा चुका है। दक्षिण पूर्वी व दक्षिणी दिल्ली जिला हॉटस्पॉट के लिहाज से संवेदनशील हैं। वर्तमान में दिल्ली के 86 हॉटस्पॉट में से 28 इन्हीं जिलों से हैं। 

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