नई दिल्ली: पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने एक बार पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) एजेंसी को देश की फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस कहा था. अब, यही एजेंसी कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ भी फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस होगी. 

पाकिस्तान सरकार ने खुफिया एजेंसी पर कोरोना वायरस रोगियों पर नजर रखने की जिम्मेदरी सौंपी है. ISI कोरोना वायरस रोगियों पर नजर रखने के लिए सीक्रेट सर्विलेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है. 

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यह एक ऐसी तकनीक है जो आमतौर पर आतंकवादियों का पता लगाने के लिए उपयोग की जाती है, हालांकि, इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की जानकारी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई है, लेकिन आईएसआई के कुछ अधिकारियों ने कुछ समाचार एजेंसियों को जानकारी लीक कर दी है.

रोगियों का पता लगाने के लिए आईएसआई जियो-फेंसिंग और फोन-मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है. फोन मॉनिटरिंग सिस्टम को तो सब जानते ही हैं, वहीं जियो-फेंसिंग एक ऐसा ट्रैकिंग सिस्टम है जो किसी व्यक्ति के किसी खास जगह छोड़ने पर अधिकारियों को तुरंत अलर्ट करता है.

पाकिस्तान का कहना है कि इन तरीकों का सहारा लेने की वजह उनके नागरिक ही हैं जिनमें जागरूकता की कमी है और जिस कारण वो अस्पतालों से भाग रहे हैं या सेल्फ आइसोलेशन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमरान खान ने खुद इस प्रोग्राम की तारीफ की है.

एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के अनुसार इन तरीकों का अब प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा रहा है.
 
आईएसआई और पाकिस्तान की सेना का प्रभाव पहले से ही देश के सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन पर है. उन पर बार-बार आतंकियों का समर्थन करने और उन्हें छिपाने का आरोप लगाया जाता रहा है.
 
वास्तव में, पाकिस्तान में मानवाधिकार समूहों को डर है कि आईएसआई राजनीतिक विरोधियों का पता लगाने के लिए सर्विलेंस शक्तियों का इसतेमाल करेगी. कुछ पूर्व सांसद जैसे अवामी नेशनल पार्टी के अफरासियाब खट्टक ने भी  इस तरह के चलन के खिलाफ आवाज उठाई है.

खट्टक का कहना है कि- ‘मरीजों और संदिग्ध मामलों को ट्रैक और ट्रेस करने का काम प्रांतीय सरकारों और स्थानीय समुदायों को करना चाहिए. खुफिया एजेंसियों को वही करने दें जो उसका असल काम है.’

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सच तो ये है कि पाकिस्तान वायरस को नियंत्रित करने के लिए एक एकजुट राष्ट्रीय रणनीति बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है. इमरान खान ने व्यापक लॉकडाउन लागू करने और हटाने में खास रुचि नहीं दिखाई, उन्होंने तर्क दिया कि देश इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता और मस्जिदों को भी बंद नहीं किया.

अब कोई समाधान नहीं मिलने की सूरत में, वह पाक सेना और आईएसआई की मदद ले रहा है. ये वो दो संगठन हैं जो मानवाधिकार हनन पर अपने खराब ट्रैक रिकॉर्ड के लिए बदनाम हैं.

पहले से ऐसी कई रिपोर्ट हैं जो कहती हैं कि सरकार ने विरोधी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए कोरोना वायरस का सहारा लिया. 

आईएसआई पर महामारी के दौरान बलूच कार्यकर्ताओं पर हमले करने का आरोप है. 1 मई को, प्रमुख बलूच पत्रकार साजिद हुसैन को स्वीडन में रहस्यमयी तरीके से मार दिया गया था. अगले दिन, पश्तून तहाफुज आंदोलन के नेता आरिफ वजीर को दक्षिण वजीरिस्तान में गोली मार दी गई थी.

उसी सप्ताह पाकिस्तान में दो अन्य छात्र कार्यकर्ता इहसान बलूच और शाहदद बलूच को भी मार दिया गया था. 

कोरोना वायरस ने भले ही देश की अर्थव्यवस्था की गति को धीमा कर दिया है, लेकिन इससे पाकिस्तान की मानसिकता पर कोई फर्क नहीं पड़ा है, पाकिस्तान की कारिस्तानियां बदस्तूर जारी हैं.

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