• लॉकडाउन के बीच लोगों ने अपने घरों में सबसे ज्यादा इसी बिस्किट को रखना पसंद किया
  • पारले-जी 1938 से ही लोगों के बीच एक फेवरेट ब्रांड रहा है

दैनिक भास्कर

Jun 09, 2020, 06:30 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस के कारण लागू लाॅकडाउन ने भले ही तमाम बिजनेस को नुकसान पहुंचाया है लेकिन बिस्किट कंपनी पारले जी को रिकाॅर्ड तोड़ फायदा पहुंचाया है। कंपनी के मुताबिक, लाॅकडाउन के दौरान उसकी सेल में पिछले 8 दशकों में से सबसे ज्यादा रही है। हालांकि, पारले कंपनी ने सेल्स नंबर तो नहीं बताए, लेकिन ये जरूर कहा कि मार्च, अप्रैल और मई पिछले 8 दशकों में उसके सबसे अच्छे महीने रहे हैं। बता दें कि पारले-जी 1938 से ही लोगों के बीच एक फेवरेट ब्रांड रहा है। 

5 रुपए कीमत रहना बड़ी वजह

लॉकडाउन के बीच लोगों ने अपने घरों में सबसे ज्यादा इसी बिस्किट को रखना पसंद किया। पांच रुपए कीमत होने से ये लोगों को सबसे ज्यादा सुलभ था। वहीं जिन जरूरतमंद लोगों को बिस्किट बांटे गए, वहां भी पारले जी सबसे ज्यादा वितरित किया गया। इतना ही नहीं पारले-जी बिस्कुट का पैकेट सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने वाले प्रवासियों के लिए भी खूब मददगार साबित हुआ। 

मार्केट शेयर में 5 फीसदी का इजाफा

पारले प्रोडक्ट्स के कैटेगरी हेड मयंक शाह ने कहा कि कंपनी का कुल मार्केट शेयर करीब 5 फीसदी बढ़ा है और इसमें से 80-90 फीसदी ग्रोथ पारले-जी की सेल से हुई है।
मयंक शाह ने कहा कि लॉकडाउन के बीच पारलेजी सबसे सुलभ खाने की वस्तु थी। कई लोगों के पास तो केवल ये ही बिस्किट लंच, डिनर और नाश्ते का काम कर रहा था। कई राज्य सरकारों ने भी पारलेजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए हमें लिखा साथ ही कई सारे एनजीओ ने भी इसको वितरित करने के लिए खरीदा है। उन्होंने कहा, ‘हम 25 मार्च से लगातार बिस्किट का उत्पादन कर रहे थे।’

ब्रिटानिया के बिस्किट भी खूब बिके

बता दें कि इस दौरान सिर्फ पारले-जी ही नहीं बल्कि अन्य बिस्किट कंपनियों के प्रोडक्ट्स भी खूब बिके। विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिटानिया का गुड डे, टाइगर, मिल्क बिकिस, बार्बर्न और मैरी बिस्किट के अलावा पारले का क्रैकजैक, मोनैको, हाइड एंड सीक जैसे बिस्किट भी खूब बिके। 

देश भर में 130 फैक्ट्री

पारले प्रोडक्ट्स की देश भर में कुल 130 फैक्ट्रियां हैं, इनमें से 120 में लगातार उत्पादन हो रहा था। वहीं 10 कंपनी के स्वामित्व वाली जगह हैं। पारले जी ब्रांड 100 रुपए प्रति किलो से कम वाली कैटेगिरी में आता है, जो बिस्किट उद्योग से एक-तिहाई आय अर्जित करता है। वहीं कुल बिस्किट की बिक्री में इसका शेयर 50 फीसदी है। 

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