लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के एक तरफ संक्रमण से बचाव में जुटी हुई है, वहीं दूसरी ओर इस बात का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है कि श्रमिकों को किसी तरह की दिक्कत न हो। शुक्रवार को कोविद -19 की टीम -11 के अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री योगी ने बैठक की।

बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने सभी प्रवासी कामगारों को सुरक्षित लाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी को मेडिकल जांच के बाद खाद्यान्न और भरण पोषण भत्ता देकर सुरक्षित घरों तक पहुंचाया जाए।

किसी में भी बीमारी के लक्षण मिलने पर उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराकर उपचार के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रवासी कामगार को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान बंद होने के दौरान कई औद्योगिक संस्थानों ने अपने सभी कार्यगारों और श्रमिकों को मानदेय उपलब्ध कराया है, उन उद्योगों व औद्योगिक संस्थानों (सूक्ष्म, लघु व मध्यम) में काम करने वाले कामगारों और श्रमिकों को आगे भी उनका मानदेय अवश्य मिलता है। रहे।

मुख्यमंत्री ने प्रवासी कामगारों और श्रमिकों से अपील करते हुए कहा कि प्रदेश का कोई भी कामगार श्रमिक जो प्रदेश या प्रदेश से बाहर हैं, वह पैदल, साइकिल या दो पहिया वाहन से ना चलेंगे। प्रदेश सरकार सभी राज्य सरकारों से समन्वय स्थापित करते हुए उनकी सुरक्षित वापसी की पूरी कार्रवाई को युद्धस्तर पर आगे बढ़ा चुकी है।

इसी का परिणाम है कि अब तक 56 ट्रेनों से 70 हजार प्रवासी कामगारों और श्रमिकों की सुरक्षित वापसी हो चुकी है। 79 और ट्रेनें आज से कल तक प्रवासी कामगारों और श्रमिकों को लेकर उत्तर प्रदेश पहुंच जाएगी। यह लगातार आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पैदल या साइकिल से चलना उनकी सुरक्षा या स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए कोई भी पैदल, दो पहिया वाहन या साइकिल से ना चल रहा है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की 10 हजार से अधिक बसें भी दिन रात काम कर रही हैं। अब तक 56 ट्रेनों से गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, आंध्र प्रदेश, केरल आदि राज्यों से 70 हजार प्रवासी कामगार और श्रमिक वापस लौट चुके हैं।

इसके अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना आदि राज्यों से उत्तर प्रदेश के प्रवासी कामगारों व श्रमिकों को 79 और ट्रेनें यूपी पहुंच रही हैं।





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