वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Updated Tue, 09 Jun 2020 09:36 PM IST

लद्दाख में तैनात भारतीय सेना का जवान
– फोटो : फाइल

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‘मॉडर्न वेपनरी’ पत्रिका के वरिष्ठ संपादक हुआंग गुओझी ने एक लेख में लिखा, ‘वर्तमान में, पठार और पर्वतीय सैनिकों के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा और अनुभवी देश अमेरिका या रूस या कोई और यूरोपीय पावरहाउस नहीं है, बल्कि भारत है।’ यह पत्रिका सरकार के अधीन आने वाली चाइना इंडस्ट्रियल ग्रुप कॉरपोरेशन लिमिटेड ( NORINCO ) से संबद्ध है। इसे एक व्यापक सैन्य और रक्षा जर्नल माना जाता है

यह लेख पर्वतीय क्षेत्र लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुए विवाद की पृष्ठभूमि में आया है। यह विवाद पिछले महीने शुरू हुआ था और इसे सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक माध्यमों से वार्ताओं के दौर चल रहे हैं।  दिपेपर डॉट सीएन (thepaper.cn) पर प्रकाशित हुआ यह लेख चीनी मीडिया में भारतीय सेना की सकारात्मक आलोचना का एक दुर्लभ उदारण है। 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार हुआंग ने लिखा, ‘भारतीय सेना की पर्वतीय टुकड़ियों में लगभग सभी सदस्यों के लिए पर्वतारोहण आना अनिवार्य है। इसके लिए भारत ने बड़ी संख्या में निजी क्षेत्र से पेशेवर और शौकिया पर्वतारोहियों की भी भर्ती की है।’ उन्होंने लिखा, 12 खंडों में दो लाख से ज्यादा सैनिकों के साथ भारत की पर्वतीय सेना दुनिया का सबसे बड़ा पर्वतीय युद्ध बल है। 

उन्होंने कहा कि 1970 के दशक से भारतीय सेना ने बड़े पैमाने पर पर्वतीय सेना के आकार को बढ़ाया है और वहां सैनिकों व अधिकारियों की संख्या भी बढ़ाई है।  भारत 50 हजार सैनिकों वाला एक माउंटेन स्ट्राइक फोर्स भी बनाने की योजना तैयार कर रहा है। सियाचिन ग्लेशियर का उदाहरण देते हुए हुआंग ने लिखा, भारतीय सेना ने सियाचिन क्षेत्र में पांच हजार मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर सैकड़ों आउटपोस्ट स्थापित किए हैं। यहां छह से सात हजार सैनिक तैनात हैं। 

हालांकि, हुआंग ने अपनी जानकारी का स्रोत साझा नहीं किया लेकिन हथियारों की एक सूची साझा कि जिसे लेकर उन्होंने दावा किया कि इन हथियारों को भारतीय सेना ने उंची लड़ाइयों में इस्तेमाल करने के लिए पहाड़ों में तैनात किया है। उन्होंने लिखा, ‘उपकरणों को लेकर भारतीय सेना ने विदेशों और घरेलू अनुसंधान और खरीद से पठार और पहाड़ों में लड़ाई के लिए उपयुक्त हथियार बड़ी संख्या में सुसज्जित किए हैं।’

हुआंग ने लिखा, भारतीय सेना ने अमेरिका से आधुनिक भारी हथियारों की खरीद पर भी खूब खर्च किया है। इसमें दुनिया का सबसे हल्का 155 एमएम होवाइत्जर एम777 और चिनूक जैसे हेलिकॉप्टर शामिल हैं जो हथियार ले जा सकते हैं और हमले की व सुरक्षा की क्षमताओं को बढ़ाते हैं। हुआंग ने हाई कैलिबर स्नाइपर रायफलों का भी जिक्र किया जो ऊंचे स्थानों पर तैनात भारतीय सैनिकों को दी गई हैं। 

सार

भारत की सैन्य क्षमताओं का लोहा अब चीन ने भी मान लिया है। चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के लिए उपकरण बनाने वाली कंपनी से संबद्ध सैन्य विशेषज्ञ ने कहा है कि भारत के पास पहाड़ी और ज्यादा ऊंचाई पर लड़ने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी और सर्वाधिक प्रशिक्षित सेना है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों पर तैनात हर भारतीय सैनिक के लिए पर्वतारोहण आना अनिवार्य होता है, जो कि पर्वतीय युद्ध में बहुत अहम कौशल होता है।

विस्तार

‘मॉडर्न वेपनरी’ पत्रिका के वरिष्ठ संपादक हुआंग गुओझी ने एक लेख में लिखा, ‘वर्तमान में, पठार और पर्वतीय सैनिकों के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा और अनुभवी देश अमेरिका या रूस या कोई और यूरोपीय पावरहाउस नहीं है, बल्कि भारत है।’ यह पत्रिका सरकार के अधीन आने वाली चाइना इंडस्ट्रियल ग्रुप कॉरपोरेशन लिमिटेड ( NORINCO ) से संबद्ध है। इसे एक व्यापक सैन्य और रक्षा जर्नल माना जाता है

यह लेख पर्वतीय क्षेत्र लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुए विवाद की पृष्ठभूमि में आया है। यह विवाद पिछले महीने शुरू हुआ था और इसे सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक माध्यमों से वार्ताओं के दौर चल रहे हैं।  दिपेपर डॉट सीएन (thepaper.cn) पर प्रकाशित हुआ यह लेख चीनी मीडिया में भारतीय सेना की सकारात्मक आलोचना का एक दुर्लभ उदारण है। 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार हुआंग ने लिखा, ‘भारतीय सेना की पर्वतीय टुकड़ियों में लगभग सभी सदस्यों के लिए पर्वतारोहण आना अनिवार्य है। इसके लिए भारत ने बड़ी संख्या में निजी क्षेत्र से पेशेवर और शौकिया पर्वतारोहियों की भी भर्ती की है।’ उन्होंने लिखा, 12 खंडों में दो लाख से ज्यादा सैनिकों के साथ भारत की पर्वतीय सेना दुनिया का सबसे बड़ा पर्वतीय युद्ध बल है। 

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