रैली को संबोधित करते अमित शाह
– फोटो : PTI

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बिहार में भाजपा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की वर्चुअल रैली से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए शंखनाद कर दिया। अमित शाह ने रविवार की शाम में देश की पहली वर्चुअल रैली को संबोधित किया। शाह ने अपने संबोधन में मोदी सरकार की उपलब्धियों को बिहार की जनता के सामने रखा साथ ही बिहार सरकार के कामों से भी लोगों को अवगत कराया। बिहार जनसंवाद रैली को संबोधित करते हुए शाह ने विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। अमित शाह के संबोधन की बड़ी बातें…

रैली का चुनाव से कोई संबंध नहीं

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इस रैली का चुनाव से कोई संबंध नहीं है। भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखती है। कोरोना संकट में हम जन संपर्क के अपने संस्कार को भुला नहीं सकते। मैं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जी को बधाई देता हूं कि 75 वर्चुअल रैली के माध्यम से उन्होंने जनता से जुड़ने का मौका दिया है। ये राजनीतिक दल के गुणगान गाने की रैली नहीं है। ये रैली जनता को कोरोना के खिलाफ जंग में जोड़ने और उनके हौसले बुलंद करने के लिए है

भारत और पूर्वी भारत के विकास में बहुत बड़ा अंतर

शाह ने कहा कि 2014 में मोदी जी ने कहा था कि भारत का विकास जो अब तक चला उसमें पश्चिमी भारत और पूर्वी भारत के विकास में बहुत बड़ा अंतर है। आजादी के समय जीडीपी के अंदर पूर्वी भारत का योगदान बहुत ज्यादा होता था, परंतु आजादी के बाद से जिस प्रकार से सरकारें चली उन्होंने पूर्वी भारत के विकास से मुंह मोड़ लिया था और परिणाम ये आया कि पूर्वी भारत पिछड़ता गया। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने छह साल के अंदर करोड़ों गरीबों के जीवन में प्रकाश लाने का एक प्रयास किया है, जिसका सबसे बड़ा फायदा अगर किसी को हुआ है तो वो मेरे पूर्वी भारत के लोगों को हुआ है।

जनता कर्फ्यू ऐतिहासिक

जनता कर्फ्यू भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के अंदर स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा कि देश के एक नेता की अपील पर कोई पुलिस बल प्रयोग किए बगैर पूरे देश ने घर के अंदर रहकर अपने नेता की अपील का सम्मान किया। चाहे मोदी जी ने थाली और घंटी बजाने को कहा, चाहे दीया जलाने को कहा, चाहे सेना के जवानों द्वारा आकाश से कोरोना वॉरियर्स पर फूल बरसाने की बात हो, ये सब मोदी जी की अपील ही थी।

एक देश-एक राशन कार्ड

मोदी जी ने अभी-अभी गत कैबिनेट में निर्णय लिया की ‘एक देश-एक राशन कार्ड’। बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा के मजदूर देश के कई हिस्सों में काम करते हैं। इससे अब श्रमिक भाई-बहन अपने हिस्से का राशन, देश में कहीं पर भी हों वहां से ले सकेंगे।

लालटेन युग से एलईडी युग तक आए हैं

शाह ने बिहार की जनता को संबोधित करते हुए कहा ‘बिहार में हम लालटेन युग से एलईडी युग तक आए हैं। लूट एंड ऑर्डर से लॉ एंड ऑर्डर तक की यात्रा हमने की है। जंगल राज से जनता राज तक हम आए हैं। बाहुबल से विकास बल तक आए हैं और चारा घोटाले से डीबीटी तक की यात्रा मोदी जी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक तय की है।

शाह का राहुल गांधी को जवाब

अमित शाह ने इस दौरान राहुल गांधी पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमेशा कहते थे कि किसानों का कर्ज माफ करो। जब 10 साल उनकी सरकार रही तो वो दावा करते हैं कि करीब तीन करोड़ किसानों के 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किए गए। वहीं, पीएम मोदी ने किसान सम्मान निधि के माध्यम से 9.5 करोड़ किसानों के बैंक खाते में 72,000 करोड़ रुपये हर साल डालने की व्यवस्था की।

देश के विकास में बिहार के पसीने की महक

बिहार की जनता को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि देश का कोई भी कोना हो, उसके विकास की नींव में बिहार के व्यक्ति के पसीने की महक है। जो लोग उन्हें अपमानित करते हैं वो प्रवासी मजदूरों के जज्बे को नहीं समझते हैं।

बिहार में भाजपा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की वर्चुअल रैली से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए शंखनाद कर दिया। अमित शाह ने रविवार की शाम में देश की पहली वर्चुअल रैली को संबोधित किया। शाह ने अपने संबोधन में मोदी सरकार की उपलब्धियों को बिहार की जनता के सामने रखा साथ ही बिहार सरकार के कामों से भी लोगों को अवगत कराया। बिहार जनसंवाद रैली को संबोधित करते हुए शाह ने विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। अमित शाह के संबोधन की बड़ी बातें…

रैली का चुनाव से कोई संबंध नहीं

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इस रैली का चुनाव से कोई संबंध नहीं है। भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखती है। कोरोना संकट में हम जन संपर्क के अपने संस्कार को भुला नहीं सकते। मैं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जी को बधाई देता हूं कि 75 वर्चुअल रैली के माध्यम से उन्होंने जनता से जुड़ने का मौका दिया है। ये राजनीतिक दल के गुणगान गाने की रैली नहीं है। ये रैली जनता को कोरोना के खिलाफ जंग में जोड़ने और उनके हौसले बुलंद करने के लिए है

भारत और पूर्वी भारत के विकास में बहुत बड़ा अंतर

शाह ने कहा कि 2014 में मोदी जी ने कहा था कि भारत का विकास जो अब तक चला उसमें पश्चिमी भारत और पूर्वी भारत के विकास में बहुत बड़ा अंतर है। आजादी के समय जीडीपी के अंदर पूर्वी भारत का योगदान बहुत ज्यादा होता था, परंतु आजादी के बाद से जिस प्रकार से सरकारें चली उन्होंने पूर्वी भारत के विकास से मुंह मोड़ लिया था और परिणाम ये आया कि पूर्वी भारत पिछड़ता गया। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने छह साल के अंदर करोड़ों गरीबों के जीवन में प्रकाश लाने का एक प्रयास किया है, जिसका सबसे बड़ा फायदा अगर किसी को हुआ है तो वो मेरे पूर्वी भारत के लोगों को हुआ है।

जनता कर्फ्यू ऐतिहासिक

जनता कर्फ्यू भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के अंदर स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा कि देश के एक नेता की अपील पर कोई पुलिस बल प्रयोग किए बगैर पूरे देश ने घर के अंदर रहकर अपने नेता की अपील का सम्मान किया। चाहे मोदी जी ने थाली और घंटी बजाने को कहा, चाहे दीया जलाने को कहा, चाहे सेना के जवानों द्वारा आकाश से कोरोना वॉरियर्स पर फूल बरसाने की बात हो, ये सब मोदी जी की अपील ही थी।

एक देश-एक राशन कार्ड

मोदी जी ने अभी-अभी गत कैबिनेट में निर्णय लिया की ‘एक देश-एक राशन कार्ड’। बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा के मजदूर देश के कई हिस्सों में काम करते हैं। इससे अब श्रमिक भाई-बहन अपने हिस्से का राशन, देश में कहीं पर भी हों वहां से ले सकेंगे।

लालटेन युग से एलईडी युग तक आए हैं

शाह ने बिहार की जनता को संबोधित करते हुए कहा ‘बिहार में हम लालटेन युग से एलईडी युग तक आए हैं। लूट एंड ऑर्डर से लॉ एंड ऑर्डर तक की यात्रा हमने की है। जंगल राज से जनता राज तक हम आए हैं। बाहुबल से विकास बल तक आए हैं और चारा घोटाले से डीबीटी तक की यात्रा मोदी जी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक तय की है।

शाह का राहुल गांधी को जवाब

अमित शाह ने इस दौरान राहुल गांधी पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमेशा कहते थे कि किसानों का कर्ज माफ करो। जब 10 साल उनकी सरकार रही तो वो दावा करते हैं कि करीब तीन करोड़ किसानों के 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किए गए। वहीं, पीएम मोदी ने किसान सम्मान निधि के माध्यम से 9.5 करोड़ किसानों के बैंक खाते में 72,000 करोड़ रुपये हर साल डालने की व्यवस्था की।

देश के विकास में बिहार के पसीने की महक

बिहार की जनता को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि देश का कोई भी कोना हो, उसके विकास की नींव में बिहार के व्यक्ति के पसीने की महक है। जो लोग उन्हें अपमानित करते हैं वो प्रवासी मजदूरों के जज्बे को नहीं समझते हैं।

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