• रिलायंस कम्युनिकेशन के 2012 के कॉरपोरेट लोन से जुड़ा है मामला
  • बैंकों ने अनिल अंबानी की पर्सनल गारंटी का हवाला देकर मांगी रकम

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 08:42 AM IST

नई दिल्ली. कर्ज के बोझ तले दबे रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पर्सनल गारंटी के मामले में लंदन की एक अदालत ने अनिल अंबानी ने 3 चीनी बैंकों को 21 दिनों के भीतर 717 मिलियन डॉलर यानी करीब 5448 करोड़ रुपए चुकाने का आदेश दिया है।

आरकॉम के कॉरपोरेट लोन से जुड़ा है मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाईकोर्ट ऑफ इंग्लैंड एंड वेल्स के कमर्शियल डिविजन के जस्टिस नीगेल टीयरे ने कहा कि अनिल अंबानी ने व्यक्तिगत तौर पर गारंटी दी है, ऐसे में उन्हें यह रकम चुकानी होगी। अनिल अंबानी के प्रवक्ता का कहना है कि यह मामले रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) की ओर से 2012 में लिए गए कॉरपोरेट लोन से जुड़ा है। प्रवक्ता का कहना है कि इस लोन के लिए अनिल अंबानी ने पर्सनल गारंटी नहीं दी थी।

इन बैंकों को करना है भुगतान

  • इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (आईसीबीसी) की मुंबई शाखा
  • चाइना डवलपमेंट बैंक
  • एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ चाइना

फरवरी में दिया था 100 मिलियन डॉलर जमा करने का आदेश

लंदन की कोर्ट ने इसी साल फरवरी में अनिल अंबानी को 100 मिलियन डॉलर की राशि 6 सप्ताह के अंदर भुगतान करने का आदेश दिया था। तब अनिल अंबानी ने कोर्ट से कहा था कि इस समय उनकी नेटवर्थ जीरो हो चुकी है और परिवार उनकी मदद नहीं कर रहा है। ऐसे में वह 100 मिलियन डॉलर का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं।

दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है आरकॉम

आरकॉम पर करीब 46 हजार करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है। अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि लंदन कोर्ट के आदेश के मुताबिक, पर्सनल गारंटी की फाइनल रकम का आंकलन आरकॉम के रेजोल्यूशन प्लान के आधार पर होगा।

रेजोल्यूशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद करेंगे भुगतान

प्रवक्ता ने कहा कि एक बार आरकॉम के रेजोल्यूशन की प्रक्रिया पूरी हो जाए, आदेशित राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। प्रवक्ता ने कहा कि आरकॉम के कर्जदाताओं की ओर मंजूर किए गए रेजोल्यून प्लान के मुताबिक इस कथित पर्सनल गारंटी की रकम करीब 50 फीसदी कम हो जाएगी।

कानूनी विकल्पों पर हो रहा विचार

अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि हम लंदन की कोर्ट के फैसले को लेकर कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा कि जहां तक यूके कोर्ट के फैसले का सवाल है, भारत में किसी भी प्रवर्तन का सवाल निकट भविष्य में नहीं उठता है।

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