काबुल: युद्धग्रस्त अफगानिस्तान (Afghanistan) में आतंकवाद की घटनाएं और बढ़ गई हैं. देश में पिछले 24 घंटों में 30 से अधिक लोग मारे गए हैं. ये घटनाएं ऐसे समय में हो रही हैं, जब देश में संकट के समाधान के लिए शांति वार्ता प्रयासों में तेजी आई है.

अफगानिस्तान में बढ़ रही हैं हिंसा की घटनाएं

शनिवार सुबह उरुजगान प्रांत में एक मिनी बस सड़क किनारे रखे बम की चपेट में आ गई. इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए. ये सभी आम नागरिक हैं. प्रांतीय सरकार ने एक बयान में घटना की पुष्टि की. इससे पहले शुक्रवार रात को हेरात शहर में विस्फोटकों से भरी एक कार को उड़ा दिया गया था. उस घटना में एक पुलिसकर्मी समेत 8 लोगों की मौत हो गई और 54 अन्य लोग घायल हो गए थे. पुलिस ने कहा कि महिलाओं और बच्चों समेत तीन और नागरिकों की मौत उस समय हो गई, जब शुक्रवार को कलात शहर के बाहर नूरक गांव में विद्रोहियों ने एक रिहायशी इलाके पर मोर्टार से गोले दागे.

तालिबान और IS का हिंसा से इनकार

इन हिंसक घटनाओं के लिए तालिबान और इस्लामिक स्टेट में से किसी ने भी जिम्मेदारी नहीं ली है. अफगानिस्तान में हिंसा (Afghanistan Violence) की घटनाएं ऐसे वक्त में बढ़ रही हैं, जब शांति स्थापना के लिए कई स्तर पर प्रयास चल रहे हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रूस 18 मार्च को अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों चीन, पाकिस्तान, ईरान, अमेरिका (US) और भारत समेत अन्य देशों के साथ अफगानिस्तान पर शांति सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है. 

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अफगानिस्तान से निकलना चाहता है US

इसके साथ ही तुर्की भी अप्रैल में अफगानिस्तान (Afghanistan) शांति प्रक्रिया पर सम्मेलन करने जा रहा है. इस सम्मेलन की अगुवाई अमेरिका कर रहा है. वह 20 सालों से अफगानिस्तान के आंतरिक संघर्ष से निकलने के लिए विभिन्न विकल्प ढूंढने में लगा है, जिससे युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में सबको मान्य कोई राजनीतिक समाधान ढूंढा जा सके.

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