• 38.6 फीसदी ट्रैवल कंपनियां कर्मचारियों की संख्या में करेगी कटौती
  • 81 फीसदी ट्रैवल और पर्यटन कंपनियों की कमाई पूरी तरह बंद हो गई है

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 10:32 PM IST

नई दिल्ली. दो महीने बाद दोबारा डोमेस्टिक फ्लाइट्स शुरू किए जाने के बावजूद ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री को भारी नुकसान होने की संभावना है। एक इंडस्ट्री सर्वें रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरानावायरस महामारी के चलते ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर में करीब 40 फीसदी कंपनियों के अगले तीन से छह महीने तक खुलने की उम्मीद नहीं है। बता दें कि सरकार ने संक्रमण की रोक थाम के लिए लागू पाबंदियों में ढ़ील देनी शुरू की है और सोमवार से घरेलू मार्गों पर उड़ने फिर शुरू हो गई है।

15 फीसदी ट्रैवल कंपनियों की कमाई 75 फीसदी तक घटी
बीओटीटी ट्रेवल सेंटिमेंट ट्रैकर ने सात राष्ट्रीय संघों आईओटीओ, टीएएआई, आईसीपीबी, एडीटीओआई, ओटीओएआई, एटीओएआई और एसआईटीई के साथ मिलकर तैयार की है। इसके अनुसार इन क्षेत्रों में 36 प्रतिशत कंपनियां अस्थाई रूप से बंद हो सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 81 फीसदी ट्रैवल और पर्यटन कंपनियों की पूरी कमाई बंद हो गई है, जबकि 15 फीसदी कंपनियों की कमाई 75 प्रतिशत तक घट गई है।

कई कंपनियां अस्थायी रूप से अपना परिचालन बंद कर सकती हैं
बीओटीटी ट्रैवल सेंटीमेंट ट्रैकर सर्वेक्षण ने 10 दिनों में 2,300 से अधिक ट्रैवल-टूरिज्म कारोबारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ ऑनलाइन बातचीत की। रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के चलते यात्रा और पर्यटन क्षेत्र बूरी तरह प्रभावित हुआ है। तीन से छह महीनों के दौरान 40 फीसदी कंपनियों के ऊपर पूरी तरह बंद होने और 35.7 फीसदी अन्य कंपनियां अस्थायी रूप से अपना परिचालन बंद कर सकती हैं।

38.6 फीसदी ट्रैवल कंपनियां घटाएगी कर्मचारियों की संख्या
सर्वेक्षण के मुताबिक करीब 38.6 फीसदी ट्रैवल कंपनियां ने कहा कि वे कर्मचारियों की संख्या घटाने जा रही है। इसके अलावा अन्य 37.6 फीसदी कंपनियों का भी कहना है कि वे कर्मचारियों को नौकरी से हटाने पर विचार कर सकती हैं। ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की अध्यक्ष ज्योति मयाल ने कहा, ‘यह एक अभूतपूर्व स्थिति है और सरकार को हजारों कंपनियों के अस्तित्व के लिए कुछ राहत देनी चाहिए।’

यात्रा और पर्यटन कंपनियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार तुरंत एक पर्यटन राहत कोष बनाएगी। इसके अलावा उन्होंने जीएसटी में कमी और कर्ज की किस्तें चुकाने में 12 महीने की मोहलत जैसी मांगें भी की हैं।

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