संजय दत्त जिन्हें प्यार से हिंदी फिल्म उद्योग से जुड़े ज्यादातर लोग ’बाबा’ कहकर ही अब भी बुलाते हैं, को फिल्मी स्क्रीन पर दिखे आने वाली जुलाई में 40 साल पूरे हो जाएंगे। ‘रेशमा और शेरा’ का ये स्वर्ण जुबली वर्ष चल रहा है। अपने पिता के निर्देशन में और उनके साथ किसी फिल्म में किया ये उनका पहला काम था। ‘रेशमा और शेरा की जिस साल रिलीज़ हुई थी उसके अगले ही साल यानी 1972 में अभिनेता विश्वजीत ने अमिताभ बच्चन और रेखा को लेकर एक फिल्म‘ रॉकी ’का एलान किया था। इस फिल्म के राष्ट्रीय भी आर डी बर्मन ही थे और वर्ष 1981 में जब संजय दत्त की बतौर हीरो पहली फिल्म हुई रॉकी ’की रिलीज हुई तो उसके वकील भी आर डी बर्मन ही बने। 8 मई 1981 को फिल्म की रॉकी ’की रिलीज हुई तो दत्त परिवार में मातम का माहौल था। फिर भी फिल्म की रिलीज रुकी नहीं। फिल्म की रिलीज़ डेट काफी पहले घोषित हो चुकी थी। देश दुनिया में फिल्म के प्रिंटर जा चुके थे। सिनेमाघरों की बुकिंग हो चुकी है। और, अब यह नहीं बदला जा सकता था। फिल्म का प्रीमियर भी रखा गया और फिल्म अपनी तय तारीख को रिलीज भी हुई। इस सवाल के बावजूद कि उसी महीने 3 मई को यानी फिल्म की रिलीज से ठीक पांच दिन पहले सुनील दत्त की पत्नी और संजय दत्त की मां नरगिस का देहांत हो गया था।





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