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नई दिल्ली19 मिनट पहले

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अयाज ममन

BCCI के सबसे महत्वपूर्ण अधिकारियों में शामिल अध्यक्ष सौरव गांगुली, सचिव जय शाह और कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने IPL की असफलता से यह कहते हुए पक्षों को कर लिया कि उन्हें कोरोना की दूसरी लहर की तीव्रता का पता ही नहीं था। वेणु विज्ञान और महामारी के विशेषज्ञ नहीं है। लेकिन कोरोना की शुद्धता की चर्चा एक्सपर्ट जनवरी से कर रहे थे।

यह बात का भी रहस्योद्मुख हो गया है कि गवर्निंग काउंसिल के कुछ लोगों ने भी आईपीएल के देश में संगठित का विरोध किया। उन्होंने सुझाव दिया था कि दौरे को एक बार फिर यूएई शिफ्ट कर दिया जाएगा।

भारत में कोरोना के खतरे की अनदेखी करना बीसीसीआई की मूर्खता थी। बोर्ड ने सामान्य सी समस्या को जटिल बना दिया। इसलिए पिछले सप्ताह बायो-बबल के उल्लंघन की वजह से यात्राओं को अनिश्चित समय के लिए सुरक्षित कर दिया गया है। अब बाकी सीजन के लिए क्या होता है, इसकी कई संभावनाएं हैं।

बीसीसीआई टूर्नामेंट को पूरा करने के लिए 15-20 दिन की खिड़की तलाश रही है, जो व्यस्त इंटरनेशनल कैलेंडर में आसान नहीं होगा। बड़ी चुनौती बीसीसीआई के सामने यह है कि वह को विभाजित के दौर में इतना बड़ा टूर्नामेंट प्रदान करने में सक्षम है या नहीं।

ऐसी भी चर्चा है कि भारत में अगस्त-सितंबर में को विभाजित की तीसरी लहर आ सकती है। हर कोई प्रार्थना कर रहा है कि ऐसा न हो। लेकिन चांस नहीं ले सकते। बीसीसीआई को तैयारी आनन-फानन में नहीं करना चाहिए, जैसे उसने इस सीजन में की थी। उसे सभी शिकायतों को ध्यान में रखते हुए तैयार होना चाहिए। आईपीएल के विज्ञापन होने से बीसीसीआई को जो आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई उसके लिए कठिन नहीं होगी। उसकी विश्वसनीयता में भी कोई विशेष कमी नहीं आई है।

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