• पहले लॉकडाउन के बाद पहले सप्ताह में बिक्री में 79 प्रतिशत की वृद्धि हुई
  • लॉकडाउन के पूरे समय में बिक्री में 239 प्रतिशत का इजाफा हुआ

दैनिक भास्कर

11 मई, 2020, 02:02 अपराह्न IST

मुंबई। मुंबई- शहरों में रोजाना उपयोग में आनेवाली एफएमसीजी वस्तुओं की खरीदारी लॉकडाउन के समय में अच्छी खासी बढी है। पहली बार जब मार्च के अंतिम सप्ताह में 21 दिन का तालाडाउन हुआ था, उस समय एफएमसीजी उत्पादों की मांग में 79 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई थी। हालांकि पूरे लॉकडाउन के समय में इन उत्पादों में 239 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

रिटेलेलर्स के पास बल्क भर्ती में की उत्पादनों की बिक्री है

पारले प्रोडक्ट्स के कटेगरी हेड मयंक शाह ने बताया कि बल्कलाइन के मामले में रिटेलर्स को 8-10 प्रतिशत का मार्जिन मिला है। लॉकडाउन के कारण ग्राहक घर के अंदर बंद हैं। रेस्टोरेंट का ताला लगा है। इस कारण से चीज, टेट्रापैक, दूध, नूडल्स, फ्रोजन नॉन वेज ब्रेक, बटर, बिस्किट और चॉकलेट्स की मांग अप्रैल में 50 से 150 प्रतिशत बढ़ी है। पारले प्रोडक्ट्स के मुताबिक कई रिटेलरों ने बल्कलाइन में उत्पादनों की बिक्री की है।

अमूल ने हाउसिंग सोसाइटीज में डाइरेक्ट बिक्री की

हालांकि इस दौरान कुछ कंपनियों ने ग्राहकों को अपने उत्पादनों की बिक्री की है। दूध उत्पादन में अग्रणी अमूल ने 10 शहरों की 500 सोसाइटीज को दूध, चीज, आइस्क्रीम सहित अन्य उत्पादों की सीधी आपूर्ति की। अमूल के एमडी आर। एस। सोढ़ी ने बताया कि हमने जब से इसकी शुरुआत की है, तब से विभिन्न शहरों के रेसिडेंशियल कांपलेक्स से ज्यादा मांग आई।]उन्होंने बताया कि सोसाइटीज से अच्छी मार्जिन मिलने से वहां बेचने में हमें काफी पसंद आ रहा है।

एक-एक सोसाइटीज से 80,000 रुपए के मिले हुए नंबर

मुंबई, पुणे जैसे बड़े शहरों में रेड जोन वाले जो इलाके थे, उसमें बड़े-बड़े हाउसिंग सोसाइटीज ने बल्क में नंबर दिए थे। इन सोसाइटीज ने रोजाना 80,000-90,000 रुपयों की संख्या दी। वैश्विक कंज्यूमर रिसर्च कंपनी केंटार वर्ल्ड पैनल के मुताबिक लॉकडाउन के नियम जैसे-जैसे कड़क होते गए, वैसे-वैसे लोगों में घबराहट बढ़ी। इसकी वजह से खरीदारी बहुत ज्यादा होने लगी। आंकड़ों के अनुसार पहले लॉकडाउन के बाद पहले सप्ताह में एफएमसीजी उत्पादों की प्राप्ति में 47 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। जबकि लॉकडाउन जब उठता है तो उसके बाद इन उत्पादों में 239 प्रतिशत की ज्यादा बिक्री देखी गई।

मार्च में ज्यादातर कंपनियों ने उत्पादन किया था

केंटार के दक्षिण एशिया के एमडी के। रामक्रिष्णन ने बताया कि एक महीने में एफएमसीजी उत्पादों की जितनी मांग होती है, उसके 50 प्रतिशत की प्राप्ति लॉकडाउन के बाद पहले सप्ताह में की गई थी। ज्यादातर कंज्यूमर गुड्स कंपनियों ने मार्च में उत्पादन बढ़ा दिया था, इसलिए लोगों की मांग को पूरा किया जा सकता था। कोविड -19 के कारण ज्यादातर राज्यों ने ट्रांसपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया था और इसलिए लोगों ने रोजमर्रााना उपयोग की चीजों की जमकर खरीदारी की।

हालत सामान्य होने के बाद बिक्री में कैमगी गिरावट आई

पारले प्रोडक्ट के सीनियर कटेगरी हेड बी क्रिश्ना राव ने बताया कि शुरुआत में सप्लाई की समस्या थी, पर उसके बाद ग्राहकों ने जीवनोपयोगी वस्तुओं को जमा करना शुरू कर दिया था। हमारे अनुमान के मुताबिक ग्राहकों ने जितना स्टॉक अभी जमा किया है, लॉकडाउन खुलने के बाद इसकी मांग में कमी आने की आशंका है। एचयूएल और मैरिको सहित अन्य कंपनियों की बिक्री चौथी तिमाही में घटी है। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने के बाद वास्तविक मांग के बारे में स्पष्ट पता चलेगा।

सैनिटरीज़र्स, कूकिंग ऑयल्स कटेगरी में अच्छी बिक्री

एचयूएल के चेयरमैन संजीव मेहता ने फाइनेंशियल रिजल्ट की घोषणा के बाद अर्निंग कॉल में बताया था कि भविष्य में लॉकडाउन बढ़ेगा, इसलिए ग्राहकों ने जमकर खरीदी की है। जबकि सामान्य मांग की स्थिति सामान्य होने के बाद ही आएगी। केंटार के आंकड़ों के मुताबिक फ्लोर क्लीनर्स, सैनिटरीज़र्स, कूकिंग ऑयल्स, बिस्किट्स कटेगरी की बिक्री में मार्च के अंतिम सप्ताह से ज्यादा उछाल देखा गया है। आईटीसी, बिटानिया, डाबर, मैरिको, पारले, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी अग्रणी कंपनियों ने भी डाइरेक्ट को कंज्यूमर पर फोकस किया था। इन कंपनियों ने ग्राहकों तक उत्पादों को पहुंचाने के लिए जोमाटो, स्विगी और फ्लिपकार्ट के साथ पहले ही टाईअप किया था।





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