• एसबीआई ने ग्राहकों से किसी के साथ कोई व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने को कहा है।
  • शिशु विभाग ने कहा है कि टैक्सपेयर्स किसी भी फेक लिस्ट पर क्लिक न करें जो रिफंड देने का वादा करता है।

दैनिक भास्कर

05 मई, 2020, 09:47 AM IST

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने खाताधारकों को इनकम टैक्स रिफंड मैसेज के खिलाफ चेतावनी दी है। बैंक ने अपने ग्राहकों को धोखाधड़ी के खोज के बारे में प्रकट किया है। शिशु विभाग ने भी टैक्सपेयर्स को रिफंड का वादा करने वाले िंग फिशिंग ’(लालच देने वाले) ई-मेल और मेसेज के जाल से सावधान रहने की सलाह दी है।

एसबीआई ने किया ट्वीट
एसबीआई ने ट्वीट कर कहा है कि शिशु विभाग से कोई भी मैसेज मिला है, जिसमें आप से इनकम टैक्स रिफंड के लिए कोई फ़ैसला फोंट किया गया हो तो उस मैसेज को इग्नोर कर दें। क्योंकि वह फ्रॉड मेसेज है। एसबीआई ने ग्राहकों से अनुरोध किया है की ऐसी फर्जी सूची पर क्लिक नहीं करें और न ही किसी के साथ कोई व्यक्तिगत जानकारी साझा करें।

शिशु विभाग ने निजी जानकारी नहीं मांगी
शिशु विभाग ने ट्वीट कर कहा गया है कि टैक्सपेयर्स किसी भी फेक लिस्ट पर क्लिक न करें, जो रिफंड देने का वादा करता है।) ये संदेश इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नहीं भेजे गए हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ई-मेल के माध्यम से व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगता है। शिशु विभाग पिन नंबर, पासवर्ड या क्रेडिट कार्ड, बैंक या अन्य वित्तीय खातों की जानकारी मांगने वाला ई-मेल नहीं है।

सरकार ने जल्दी रिफंड देने को कहा
कोरोना संकट को देखते हुए सरकार ने शिशु विभाग को निर्देश जारी करते हुए जल्द से जल्द टैक्सपेयर्स को रिफंड देने को कहा है जिसके बाद भौतिकी विभाग की ओर से टैक्सपेयर को ई-मेल भेजी जा रही है साथ ही अब तक 1.74 लाख मामलों में कंफर्मेशन के मेल भेजे गए हैं।

क्या होता है रिफंड?
कंपनी अपने कर्मचारियों को वर्षभर वेतन देने के दौरान उसके वेतन में से का का हिस्सा हिस्साकरकर पहले ही सरकार के खाते में जमा कर देती है। कर्मचारी वर्ष के अंत में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं, जिसमें वे बताते हैं कि टैक्स के रूप में उनकी तरफ से कितनी देयता है। यदि वास्तविक भुगतान देयता पहले कट गई है टैक्स की राशि से कम है, तो शेष राशि रिफंड के रूप में कर्मचारी को मिलती है।





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