न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
अपडेटेड सोम, 04 मई 2020 11:42 AM IST

एस। जयशंकर, विदेश मंत्री (फाइल फोटो)
– फोटो: एएनआई

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भारत ने एक बार फिर कहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और गिल्ली-बल्टिस्तान सहित लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं। विदेश मंत्रालय ने गिल्टर-बल्टिस्तान पर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा कि पाकिस्तान को उन सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करना चाहिए जिन पर उसने अवैध कब्जा किया है। भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर एतराज जताते हुए इस्लामाबाद को आपत्तिजनक जारी किया है। साथ ही भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति में बदलाव लाने के प्रयासों के लिए पाकिस्तान के समक्ष विरोध दर्ज कराया और उन्हें खाली करने के लिए कहा।

एक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार या उसकी न्यायपालिका के पास अवैध रूप से और जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। जम्मू-कश्मीर के भारतीय क्षेत्र को पाकिस्तान द्वारा कब्जा कर वहाँ किए जा रहे परिवर्तन के प्रयासों और इस तरह की कार्यवाही की जाती है भारत पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है।

प्रेस प्रविष्टियों में कहा गया कि इसके बजाय, पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे के तहत आने वाले सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करना चाहिए। इस तरह की जायवाइयों न तो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान द्वारा किए गए अवैध कब्जों को छिपा सकते हैं और न ही पिछले सात दशकों से पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में रह रहे लोगों के स्वतंत्रता-हनन, शोषण, मानवाधिकार हनन और डेन को।

इस मामले में भारत सरकार की स्थिति 1994 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में परिलक्षित है।

भारत ने एक बार फिर कहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और गिल्ली-बल्टिस्तान सहित लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं। विदेश मंत्रालय ने गिल्टर-बल्टिस्तान पर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा कि पाकिस्तान को उन सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करना चाहिए जिन पर उसने अवैध कब्जा किया है। भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर एतराज जताते हुए इस्लामाबाद को आपत्तिजनक जारी किया है। साथ ही भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति में बदलाव लाने के प्रयासों के लिए पाकिस्तान के समक्ष विरोध दर्ज कराया और उन्हें खाली करने के लिए कहा।

एक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार या उसकी न्यायपालिका के पास अवैध रूप से और जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। जम्मू-कश्मीर के भारतीय क्षेत्र को पाकिस्तान द्वारा कब्जा कर वहाँ किए जा रहे परिवर्तन के प्रयासों और इस तरह की कार्यवाही की जाती है भारत पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है।

प्रेस प्रविष्टियों में कहा गया कि इसके बजाय, पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे के तहत आने वाले सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करना चाहिए। इस तरह की जायवाइयों न तो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान द्वारा किए गए अवैध कब्जों को छिपा सकते हैं और न ही पिछले सात दशकों से पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में रह रहे लोगों के स्वतंत्रता-हनन, शोषण, मानवाधिकार हनन और डेन को।

इस मामले में भारत सरकार की स्थिति 1994 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में परिलक्षित है।





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