• जम्मू में रहने वाले फोटोग्राफर चन्नी आनंद 20 साल से न्यूज एजेंसी एपी के साथ काम कर रहे हैं
  • श्रीनगर के यासीन डार ने बताया- इंटरनेट बंद होने से दिल्ली कार्यालय तक फोटो भेजना काफी मुश्किल था

दैनिक भास्कर

05 मई, 2020, 03:00 बजे IST

न्यूयॉर्क। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में महीनों तक कर्फ्यू और लॉकडाउन की स्थिति रही। ऐसे हालात में कश्मीर के तीन फोटोग्राफरों ने कैमरे के जरिए लोगों को प्रदेश का माहौल दिखाया। ये तीनों फोटोग्राफर यासीन डार, मुख्तार खान और चन्नी आनंद न्यूज एजेंसी एपी के लिए काम करते हैं। अब उन्हें कश्मीर कवरेज के लिए पत्रकारिता का प्रतिष्ठित पुलित्जर फीचर फोटोग्राफी अवॉर्ड दिया गया है।

घाटी में विपरीत परिस्थितियों के बाद भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम दिया। कई बार तो प्रदर्शनकारियों से बचने के लिए सब्जी की टोकरियों में कैमरा छिपाए। तीनों फोटोग्राफर ने प्रदर्शन, पुलिस-अर्धसैनिक बलों की कार्रवाई और लोगों की जिंदगी की फोटो एजेंसी के दिल्ली कार्यालय तक पहुंचाईं।

‘काम से किसी के सामने चुप न रहने की प्रेरणा मिली’
श्रीनगर में रहने वाले यासीन डार ने ईमेल के जरिए बताया कि यह काम बिल्कुल चूहे और बिल्ली की लुकाछिपी की तरह था। इंटरनेट बंद रहने से फोटो दिल्ली तक पहुंचाने में काफी मुश्किल होती थी। हम मेमोरी कार्ड से फोटो दिल्ली भेजने के लिए टर्मिनल पर दिल्ली जाने वाले किसी यात्री को मनाते थे। हमारे काम से यह प्रेरणा मिली है कि कभी किसी के सामने चुप्पी नहीं साधनी है। वहीं, जम्मू में रहने वाले चन्नी आनंद बताते हैं कि 20 साल एपी के साथ काम करने के बाद यह प्रतिष्ठित मिला। इसकी खुशी जाहिर करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।

फोटोग्राफर यासीन डार (फाइल फोटो)
फोटोग्राफर मुख्तार खान (फाइल फोटो)

न्यूज एजेंसी के सीईओ गेरी प्रयुत ने कहा कि यह सम्मान हमारे लिए संस्थान की महान कार्यशैली का हिस्सा है। कश्मीर में काम करने वाली हमारी पूरी टीम इसके लिए जीत की पात्र है। इस अवॉर्ड के लिए न्यूज एजेंसी के फोटोग्राफर दिऊ नलियोरी और रेबेका ब्लैकवेल भी फाइनलिस्ट में थे। उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान कवरेज किया गया था। तबरी को गोली भी लगी थी, लेकिन वह अपना काम कर रही थी। इन पांचों फोटोग्राफरों ने संस्थान के लिए बेहतर काम किया।

5 अगस्त के बाद कश्मीर में महीनों तक इंटरनेट बंद रहा
5 अगस्त को मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया था। इसके बाद सरकार ने प्रदेश को दो केंद्र शासित प्रदेशों के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। इससे पहले ही कश्मीर के प्रमुख लोगों को नजरबंद कर दिया गया था। यहां महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा और संचार के साथ-साथ इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगी रही थी। ऐसे में कश्मीर के पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया था कि इंटरनेट बंद रहने से उनका काम प्रभावित हो रहा है।





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