• बैंक बोले- 31 मई से पहले कामकाज शुरू करने की स्थिति में अधिकांश व्यवसाय नहीं हैं
  • आरबीआई ने एनबीएफसी, हाउसिंग फाइनेंस में लिक्विडिटी पर भी विचार किया

दैनिक भास्कर

03 मई, 2020, 07:56 AM IST

मुंबई। कोरोनावायरस के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से उपलब्ध कराई गई लोन मोराटोरियम की सुविधा को तीन और महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। मई के मध्य में इसकी घोषणा हो सकती है। टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों ने आरबीआई से कहा है कि ज्यादातर कारोबारियों का मानना ​​है कि इस महीने के अंतिम सप्ताह से पहले कारोबार शुरू होने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में वे पहले से जमा ब्याज राशि का 31 मई के बाद भुगतान करने की स्थिति में नहीं होंगे।

मोराटोरियम अवधि बढ़ाने का सुझाव दिया
शनिवार को आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांता दास ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में कई बैंकों ने आरबीआई को मोरोटोरियम सुविधा को 90 और दिनों के लिए बढ़ाने का सुझाव दिया था। बैंकों ने कहा था कि इस अतिरिक्त अवधि के बाद ही कारोबार में कैशफ्लो का मूल्यांकन किया जा सकता है। बैंकों का कहना है कि आरबीआई ने अभी तक कोई वादा नहीं किया है, लेकिन वह लॉकडाउन के विस्तार को देखते हुए उनकी समस्या से वाकिफ है।]

क्रेडिट फ्लो पर भी हुई चर्चा
आरबीआई गवर्नर ने बैंकों के प्रमुखों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दो अलग-अलग सत्रों में बैठक की। इस बैठक में लोन मोराटोरियम के अलावा अर्थव्यवस्था के अन्य सेक्टरों में क्रेडिट फ्लो पर भी चर्चा की गई। साथ ही नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज, माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूट, हाउसिंग फाइनेंस कंपनीज और म्यूचुअल फंड में लिक्विडिटी पर विचार विमर्श किया गया। साथ ही आरबीआई ने बैंकों से उनकी आंतरिक शाखाओं के कामकाज को लेकर बातचीत की।

कर्ज को प्रोत्साहित करने के लिए रेपो दर में 0.75% कटौती की गई है
बैंकों को अधिक से अधिक ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आरबीआई ने मुख्य नीतिगत ब्याज दर (रेपो दर) को 0.75 प्रतिशत प्रति दिन 4.4 प्रति कर दिया है, जो 11 साल का निम्नतम स्तर है। इसके अलावा रिवर्स रेपो दर को भी भास्कर 3.75 प्रति कर दिया गया, जिससे बैंक प्रणाली में मौजूद सरप्लस फंड का उपयोग कर्ज देने के लिए सही हो गया। रिवर्स रेपो दर बैक्टीरिया की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए एक प्रमुख मोनेटरी उपकरण है। रिवर्स रेपो दर कम हो जाने से बैंकों को आरबीआई के पास पूंजी रखने में अधिक लाभ नहीं होगा और वे अर्थव्यवस्था में ज्यादा से ज्यादा लोन देने के लिए उदाहरण देंगे।

अप्रैल-जून तिमाही में देश की इकोनॉमी में बहुत बड़ी गिरावट की आशंका
अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में लंबे समय के बाद बहुत बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि कोरोनावायरस लॉकडाउन के कारण आर्थिक आंदोलनों के लगभग पूरी तरह से ठप्प हैं। इससे पहले सरकार ने 1.7 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की है, जिसके तहत कोरोनावायरस की महामारी के कारण चुनौतियों से जूझ रहे गरीबों को मुफ्त अनाज देने की व्यवस्था की गई है और उनके हाथों में संक्रमण भी हो गया है।





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