• 60 दिन के ग्रेस पीरियड में वीजाधारक और ग्रीनकार्ड एप्लीकेशनेंट अपना आवेदन वापस या फिर उसे निरस्त भी कर सकते हैं
  • अप्रैल में भी ट्रम्प सरकार ने एच 1-बी धारकों को छूट देते हुए वीजा विस्तार का फैसला किया था

दैनिक भास्कर

02 मई, 2020, 03:21 PM IST

वॉशिंगटन। अमेरिकी सरकार ने कोरोनावायरस के कारण एच -1 बी वीजाधारकों और ग्रीनकार्डेंट्स को 60 दिन की छूट दी है। हालाँकि, यह छूट सिर्फ उन लोगों को दी गई है, जिनके दस्तावेजों को जमा करने के कारण नोटिस दिया गया है। अमेरिका में कोरोनावायरस से स्थिति गंभीर है। देश में 11 लाख से ज्यादा संपत्ति हैं, करीब 66 हजार लोगों की जान जा चुकी है।

अमेरिकी सिटिजनशिप और इमिग्रेशन सर्विसेज (एनआईएसएस) ने शनिवार को कहा कि आवेदकों को 60 दिन का ग्रेस पीरियड दिया जाएगा। छूट में जिन लोगों को शामिल किया गया है, इसमें आवेदक अपने दस्तावेज़-सबूत जमा कर सकते हैं, अपना आवेदन वापस या फिर उसे रद्द कर देंगे। अमेरिकी इमिग्रेशन सेवा ने बयान में यह भी कहा कि हम अमेरिकियों की नौकरियों की सुरक्षा करना चाहते हैं।

अप्रैल में भी ट्रम्प सरकार ने राहत दी थी
अप्रैल में भी अमेरिकी सरकार ने एच -1 बी वीजाधारकों का वीजा विस्तार करने का फैसला लिया था। सरकार ने ऐसे एच -1 बी वीजाधारकों से आवेदन मांगे थे, जिनके वीजा परमिट खत्म हो रहे थे और ये लोग कोरोना के नेतृत्व वाले देश से निकल पाए थे। ऐसे लोगों को रुकने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया।

एच -1 बी वीजा क्या है?
एच -1 बी वीजा गैर-विदेशी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां इसके तहत दूसरे देशों के तकनीकी एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। नियुक्ति के बाद सरकार से इन लोगों के लिए एच -1 बी वीजा मांगा जाता है। अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी तरह के वीजा के जरिए करती हैं। नियम के अनुसार, अगर किसी एच -1 बी वीजाधारकों की कंपनी ने उसके साथ कांट्रैक्ट खत्म कर लिया है तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों के अंदर नई कंपनी में जॉब तलाशना होगा। बीएसआईएस के मुताबिक, एच -1 बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय ही हैं।





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