न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
अपडेटेड थू, 07 मई 2020 05:42 PM IST

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भारतीय रेलवे ने गुरुवार को कहा कि उसने 1 मई से अब तक 163 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई हैं। दावा किया गया है कि इस दौरान लॉकडाउन में फंसे 1.60 लाख प्रवासी मजदूरों ने इन ट्रेनों में यात्रा की है।

रेलवे ने बताया कि उसने बुधवार को 56 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें चलाईं। वहीं, गुरुवार को 14 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई गईं। कुल मिलाकर अब तक 163 ऐसी ट्रेनें प्रवासी मजदूरों के लिए चलाई गई हैं।

रेलवे के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम दिन के अंत तक कुछ और ट्रेनें चलाने की योजना बना रहे हैं।”

बुधवार रात तक रेलवे ने इस तरह की 149 ट्रेनें चलाई थीं।

बता दें कि हर स्पेशल ट्रेन में 24 कोच हैं। हर कोच में 72 सीटें हैं। लेकिन राष्ट्रीय संकाय की तरफ से एक कोच में केवल 54 लोगों को ही बैठाया जा रहा है। यह निर्णय सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके तहत किसी भी यात्री को मिडिल बर्थ नहीं दी गई है।

रेलवे ने देश के कई हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों को वापस उनके घरों की ओर ले जाने के लिए एक मई से मजदूरों की गाड़ियों को चलाने की शुरुआत की। इस दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर ट्रेन यात्रा के लिए मजदूरों से पैसे वसूलने का आरोप लगाया।

हालांकि, सरकार की ओर से बताया गया कि 85 प्रतिशत किराया रेलवे की तरफ से शुरू किया जा रहा है और शेष 15 प्रतिशत राज्य सरकार की तरफ से वित्तपोषण किया जा रहा है, जिसका अनुरोध पर एक ट्रेन चलाई जा रही है।

भारतीय रेलवे ने गुरुवार को कहा कि उसने 1 मई से अब तक 163 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई हैं। दावा किया गया है कि इस दौरान लॉकडाउन में फंसे 1.60 लाख प्रवासी मजदूरों ने इन ट्रेनों में यात्रा की है।

रेलवे ने बताया कि उसने बुधवार को 56 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें चलाईं। वहीं, गुरुवार को 14 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई गईं। कुल मिलाकर अब तक 163 ऐसी ट्रेनें प्रवासी मजदूरों के लिए चलाई गई हैं।

रेलवे के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम दिन के अंत तक कुछ और ट्रेनें चलाने की योजना बना रहे हैं।”

बुधवार रात तक रेलवे ने इस तरह की 149 ट्रेनें चलाई थीं।

बता दें कि हर स्पेशल ट्रेन में 24 कोच हैं। हर कोच में 72 सीटें हैं। लेकिन राष्ट्रीय संकाय की तरफ से एक कोच में केवल 54 लोगों को ही बैठाया जा रहा है। यह निर्णय सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके तहत किसी भी यात्री को मिडिल बर्थ नहीं दी गई है।

रेलवे ने देश के कई हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों को वापस उनके घरों की ओर ले जाने के लिए एक मई से मजदूरों की गाड़ियों को चलाने की शुरुआत की। इस दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर ट्रेन यात्रा के लिए मजदूरों से पैसे वसूलने का आरोप लगाया।

हालांकि, सरकार की ओर से बताया गया कि 85 प्रतिशत किराया रेलवे की तरफ से शुरू किया जा रहा है और शेष 15 प्रतिशत राज्य सरकार की तरफ से वित्तपोषण किया जा रहा है, जिसका अनुरोध पर एक ट्रेन चलाई जा रही है।





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