सामाजिक दूरी हटी, महामारी बढ़ी … दो साल तक रहने वाला है कोरोना-काल

Bytechkibaat7

May 13, 2020 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


बंगलूरू में ट्रेन में सवार होने के लिए स्टेशन पहुंची महिला और बच्चे।
– फोटो: पीटीआई

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ताजा अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि कोरोना महामारी के लंबे समय तक बने रहने के आसार हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि जानने में सिर्फ एक दौर की सामाजिक दूरी से काम नहीं चलेगा। हमें अगले दो साल के लिए बचाव के इंतजाम करने होंगे।

उनका अनुमान है कि संक्रमण का पूर्वानुमान भौगोलिक स्थिति, मौसम से संबंधित नीतियों, सामाजिक दूरी और हर्ड इम्युनिटी जैसे अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है। लिहाजा, निकट भविष्य में चेतों की तादाद कम होने मात्र से निश्चिंत होकर नहीं बैठना चाहिए। आगे भी संक्रमण रह-रहकर सामने आता है या इसमें पहले के मुकाबले अचानक इजाफा भी देखने को मिल सकता है।

वायरस फैलने की तीन स्थितियां
हार्वर्ड एचटी चान स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ के महामारी विशेषज्ञ डॉ। मार्क लिपसिच के मुताबिक, निकट भविष्य में संक्रमण थम मुश्किल है। लिपसिच हाल ही में हुए दो अध्ययनों के सह-लेखक रहे हैं।

ये एक अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा और दूसरा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हुआ है। अध्ययन में आगामी महीनों में महामारी के संभावित स्वरूप पेश किए गए हैं। एक अध्ययन में कोरोना की तीन स्थितियां बताई गई हैं तो दूसरे में मौसम, हर्ड इम्युनिटी और सामाजिक दूरी पर ध्यान केंद्रित किया गया है।]

..तो ऐसे फलेगा कोरोना, योग और गर्त
इसके तहत कोरोना की मौजूदा लहर में ज्यादा मामले सामने आएंगे। फिर इसमें गिरावट के बाद इसी वर्ष पुनरावृत्तियों का ग्राफ ऊपर चढ़ने लगेगा। 2022 तक निरंतर उतार-चढ़ाव के बाद महामारी समाप्त हो जाएगी।

मौजूदा लहर कमजोर पड़ने के बाद संक्रमण सर्दियों में बड़ी ऊंचाई पर पहुंच जाएगी। फिर यह तेजी से नीचे जाएगा और इसके बाद दो साल तक महामारी छोटी-छोटी लहरों में रहेगी। इसे फॉल पीक मॉडल कहते हैं। यह स्थिति 1918-19 में स्पैनिश फ्लू महामारी जैसी होगी।

धीमी लहर …
मार्च से मई तक शीर्ष पर पहुंचने के बाद महामारी बिना उतार-चढ़ाव के 2022 तक बहुत मंथर गति से जारी रहेगी। इन संभावनाओं के मद्देनजर विशेषज्ञों का कहना है कि हमें अगले 18-24 महीने के लिए कोविड ट्रांसफर के लिए तैयार रहना चाहिए। इस दौरान विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में हॉट-डिस्प्ले फ्रंट आते रहेंगे।

दूसरे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा है कि आमतौर पर प्रति दस हजार लोगों में 35 मामले सामने आने पर सामाजिक दूरी अपनाई जाने लगती है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर इसका पैमाना अलग हो सकता है।

इसके बाद, प्रति दस हजार पांच मामले बने रहने पर सामाजिक दूरी में ढिलाई दी जाती है। वहीं, हर्ड इम्युनिटी का पैमाना 55 प्रति जनसंख्या में प्रतिरक्षा को माना जाता है।

महामारी के प्रसार में एक अन्य बड़ा कारक मौसम है। शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्म दिनों में वायरस कम हो जाता है।हालांकि, इस साल वायरस की अतिसुखता के कारण गर्मी में भी बड़ी आबादी जोखिम में रहेगी।

सतर्कता के साथ रियायत
एक दूसरे मॉडल के अनुसार, शोधकर्ताओं ने क्रिटिकल कैर क्षमता को दोगुना करने पर जोर दिया है ताकि सामाजिक दूरी के पैमानों में ढील दी जा सके। उनका कहना है कि इससे प्रति दस हजार 70 लोगों में संक्रमण होने पर सामाजिक दूरी अपनाई जा सकती है।

कुल मिलाकर शोधकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि महामारी नियंत्रक करने के लिए सामाजिक दूरी का एक चरण पर्याप्त नहीं होगा। इसे हटाने के फौरन बाद ज्यादा लोग संक्रमण के जोखिम में रहेंगे। हर्ड इम्युनिटी बनने में भी बहुत लंबा लगेगा। लिहाजा, वैक्सीन नहीं आई तो 2021-22 तक यह महामारी बनी रह सकती है।

मौसम और महामारी भविष्यवाणी में समान
विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्वानुमान और महामारी नेटवर्किंग में समानता है। दोनों को ही साधारण गणितीय व्याख्या से समझा जाता है। मौसम के मामले में यह व्याख्या फिजिक्स और कैमेस्ट्री आधारित होती है।

वहीं, संक्रामक रोगों की नेटवर्किंग और महामारी विज्ञान के आधार पर की जाती है। जाहिर तौर पर इंसान से मिलने को तो नहीं बदल सकता। लेकिन अपने व्यवहार, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारकों के बीच संतुलन से महामारी का भविष्य बदला जा सकता है।

सार

कोरोनावायरस को लेकर जानने के बारे में जानकर नवीनतम अध्ययनों से इस तरह के संकेत मिले हैं। शोधकर्ताओं ने संक्रमण फैलने की तीन संभावनाएं भी बताई हैं। वैज्ञानिकों ने इस संबंध में यह भी कहा है कि सभी देशों को अपनी क्रिटिकल कैर क्षमता को दोगुना करने की जरूरत है।

विस्तार

ताजा अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि कोरोना महामारी के लंबे समय तक बने रहने के आसार हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि जानने में सिर्फ एक दौर की सामाजिक दूरी से काम नहीं चलेगा। हमें अगले दो साल के लिए बचाव के इंतजाम करने होंगे।

उनका अनुमान है कि संक्रमण का पूर्वानुमान भौगोलिक स्थिति, मौसम से संबंधित नीतियों, सामाजिक दूरी और हर्ड इम्युनिटी जैसे अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है। लिहाजा, निकट भविष्य में चेतों की तादाद कम होने मात्र से निश्चिंत होकर नहीं बैठना चाहिए। आगे भी संक्रमण रह-रहकर सामने आता है या इसमें पहले के मुकाबले अचानक इजाफा भी देखने को मिल सकता है।

वायरस फैलने की तीन स्थितियां

हार्वर्ड एचटी चान स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ के महामारी विशेषज्ञ डॉ। मार्क लिपसिच के मुताबिक, निकट भविष्य में संक्रमण थम मुश्किल है। लिपसिच हाल ही में हुए दो अध्ययनों के सह-लेखक रहे हैं।

ये एक अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा और दूसरा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हुआ है। अध्ययन में आगामी महीनों में महामारी के संभावित स्वरूप पेश किए गए हैं। एक अध्ययन में कोरोना की तीन स्थितियां बताई गई हैं तो दूसरे में मौसम, हर्ड इम्युनिटी और सामाजिक दूरी पर ध्यान केंद्रित किया गया है।]

..तो ऐसे फलेगा कोरोना, योग और गर्त
इसके तहत कोरोना की मौजूदा लहर में ज्यादा मामले सामने आएंगे। फिर इसमें गिरावट के बाद इसी वर्ष पुनरावृत्तियों का ग्राफ ऊपर चढ़ने लगेगा। 2022 तक निरंतर उतार-चढ़ाव के बाद महामारी समाप्त हो जाएगी।


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