• जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरमैन और देश के प्रमुख उद्योगपति सज्जन जिंदल ने कोरोना के कारोबार पर असर को लेकर बातचीत की

  • जिंदल ने कहा- वैक्सीन आने तक इंतजार नहीं कर सकते, न्यू नॉर्मल में ही काम करने के तरीके ढूंढेंगे

धर्मेंद सिंह भदौरिया

06 मई, 2020, 05:55 AM IST

नई दिल्ली। कोरोनावायरस के कारण देश 42 दिन से लॉकडाउन में है। इससे लोगों की व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में काफी बदलाव आए हैं। कारोबार में भी इसका असर देखा जा रहा है। इसके मद्देनजर भास्कर ने देश के प्रमुख उद्योगपति और 14 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपए की कंपनी जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल से बातचीत की। उनका कहना है कि हम वैक्सीन आने तक इंतजार नहीं कर सकते। वायरस आजीविकाओं के लिए न न बने इसलिए न्यू नॉर्मल के भीतर ही काम करने के तरीके ढूंढेंगे। बातचीत के प्रमुख अंश …

प्रश्न: कोरोना के बाद वर्क कल्चर में किस तरह के बदलाव की उम्मीद कर सकते हैं?
– लॉकडाउन ने जानकर बहुत सारे सेक्टरों के लोगों के लिए वर्क फ्रॉम होम को जरूरी कर दिया है। दूर से काम करने के दौरान कौशल से कार्य करने की कर्मचारियों की क्षमता हमें भविष्य में कामकाज संबंधी मज़ली नीति अपनाने पर जोर देती है। इससे ऐसे कामकाजी वातावरण बनेगा, जिसमें आने-जाने में होने वाले समय की बर्बादी खत्म होगी और उत्पादकता बढ़ेगी। जैसे-जैसे व्यवसायिक को घर से काम करने के वातावरण के सकारात्मक प्रभाव दिखने लगेंगे तो गृहणियों (गृहणियों) को भी नए अवसर मिलेंगे।

प्रश्न: आपके व्यवसाय पर अल्पावधि और अनुलग्नक अवधि का क्या असर होगा और आपकी योजना क्या है?
– लघु अवधि की बात करें तो आर्थिक गतिविधियों में अत्यधिक कमी आई है। कमजोर मांग के कारण उपयोगिता घटी है और मार्जिन भी। नतीजा ये है कि किट की स्थिति कमजोर हुई है। फिर खपत की शैली के स्तर पर मैं ग्राहकों के व्यवहार में भी बदलाव देखता हूं। यह भी दूर तक असर करेगा। ये जो अप्रत्याशित बदलाव आ रहे हैं, उनके लिए व्यवसाय जगत को भी कामकाज के अवैध-परम्परागत तरीके खोज होंगे। जिसे सरकारी नीतिगत कदमों के सहारे की भी जरूरत होगी, ताकि अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने को ’वी ‘के आकार के ग्राफ की तीव्र वृद्धि दी जा सके। जहां तक ​​लंबी अवधि के बदलाव की बात है तो सभी सेवाओं को इस तरह के दौर लंबे समय तक सहने के लिए संक्रमण का पर्याप्त स्कैनर निर्मित करने के साथ मजबूत बैलेंस शीट बनानी होगी।

अब तक तो व्यवसाय जगत इस तरह की लघटर्म उथल-पुथल के लिए कंटिंजेंसी प्लान (आकस्मिक योजनाएं) नहीं बनाता था। मुझे लगता है कि अब इस दिशा में परिवर्तन होगा। जेएसडब्ल्यू ग्रुप में हम भी नए नियम-परम्पराओं को अपना रहे हैं। हम बिल्कुल शुरू से अपने लागत आधार की पड़ताल कर रहे हैं और सीई, डिजिटलाइजेशन और इनोवेशन को फिर से देख रहे हैं ताकि सभी चुनौतियों से निपटा जा सके। मेरा मानना ​​है कि हम पहले से अधिक मजबूत होकर इस परिस्थिति से बाहर आएंगे।

प्रश्न: सरकार ने कोरोना से सामना के लिए जो कदम उठाए हैं उन्हें आप कैसे देखते हैं?
– सरकार ने संक्रमण के बढ़ते ग्राफ को नीचे लाने के लिए जो कदम उठाया है, वह काबिले तारीफ है। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सरकारी स्तर पर सरकारी निवेश की बहुत जरूरत है। उद्योग जगत को सस्ती ब्याज दरों पर कर्ज का प्रवाह सुनिश्चित हो। ज्यादातर विकसित देशों में ऋण वस्तुओं में जीरो के करीब है, जबकि भारत में अब यह भी लगभग 10% है। रिजर्व बैंक ने कैश की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है पर बैंक अभी भी जोखिम के खिलाफ ही हैं और उद्योगों खासतौर पर एमएसएमई को कर्ज नहीं दे रहे हैं। दुर्भाग्य से इसके कारण आर्थिक सुधार की रफ्तार धीमी हो जाएगी। अर्थव्यवस्था में तेज कैश फ्लो की तत्काल जरूरत है और इस बारे में प्राथमिकता के साथ कदम बढ़ाने होंगे।

प्रश्न: आपकी कंपनी पर कोरोना का क्या असर हुआ है? अपने सेक्टर को किस तरह देखते हैं?
– हमारे सेक्टर सहित व्यवसाय जगत पर असर के दो मुख्य बिंदु मुझे नजर आते हैं। एक, बहुत ही भरोसेमंद सप्लाई चेन अचानक अस्त-व्यस्त हो गई है और दूसरा विभिन्न बिजनेस प्रोसेक्ट्स में एक्सक्लूसिव यूनियन और डिजिटलाइजेशन की कमी है। मुझे लगता है कि इस अहसास के बाद सेक्टर इन दो चीजों को अपनाने की कोशिश तेज करेगा। इससे ग्राहकों को राहत देने की दिशा में सप्लाई चेन को सरल-सुगम बनाने, कार्यक्षमता में सुधार, उत्पादकता बढ़ाने और लागत घटाने में मदद मिली है। हालाँकि, डिजिटलाइजेशन का मतलब लेबर फोर्स को हटाना नहीं है, लेकिन यह ग्राहकों को सेवा प्रदान करने का वैकल्पिक तरीका है।

प्रश्न: इस दौरान 2020-21 के लिए बिजनेस प्लान को संशोधित किया गया है?
– इस नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत ही वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल लाने वाली हो रही है। मैं 2020-21 को लेकर आशावादी हूं। मुझे भरोसा है कि सेकंड हाफ के बाद अर्थव्यवस्था ग्राफ वी ’के ग्राफ की शैली में बहुत ही मजबूत वापसी करेगी। सरकारी नीतियां और वित्तीय पैकेज इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट को उभारने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। फिर हम अनुकूल मानसून, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में विस्तार खर्च से अर्थव्यवस्था को मिलने वाले सहारे और बेहतर विदेशी पूंजी निवेश (को विभाजित -19 से सामना में भारत के बेहतर प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में) की भी उम्मीद करते हैं।

प्रश्न: कोरोना के असर से उबरने के लिए आपकी कंपनी में कौन-से कदम उठाए जा रहे हैं?
– हमने अपने सभी प्लांट लोकेशन्स पर वैश्विक स्तर पर व्यावहारिक विभिन्न एसओपी (मानक संचालन प्रक्रियाएं) को अपनाया है। इसके तहत सोशल डिस्टेंसिंग, व्यापक स्तर पर तापमान स्क्रीनिंग, कार्यस्थल, टाउनशिप और लेबर कॉलोनियों का सैनिटरीकरण, कर्मचारियों, कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स व जरूरत हो तो आगंतुकों के प्रवेश और बाहर जाने की कड़ी प्रक्रिया शामिल है। हमने साल के शुरू से ही जीरो तिमाही नीति लागू कर दी है। जब तक इस नए वायरस का वैक्सीन नहीं खोजा जाता है, हम सबको इस ॉर्म न्यू नॉर्मल ’की सीमा में ही काम करने के तौर-तरीके ढूंढ लेते हैं। साथ ही संकट के बीच अवसरों की तलाश होनी चाहिए।

‘मैंने और परिवार ने स्क्रीन टाइम को सीमित कर दिया है’
– व्यावसायिक स्तर पर मुझे न न्यू नॉर्मल ’में काम करना पड़ रहा है। वर्तमान में बच्चों के पोते-पोतियों सहित परिवार के साथ मिल रहे समय का आनंद ले रहा हूं। लॉकडाउन ने हमें एक-दूसरे के साथ रहनेाने के लिए बहुत जल्द दिया है। मेरे परिवार और मैंने इस वक्त को एक सूत्र में बांधा है- स्क्रीन टाइम (मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर) को सीमित कर एक्सरसाइज को प्राथमिकता दी है। मैंने अपने समूह में विभिन्न टीमों को वैश्विक अपडेट रहने, हेल्दी मार्ग ठहराने और सकारात्मकता बनाए रखने की दिशा में प्रेरित किया है।

प्रश्न: सरकार ने कोरोना से सामना के लिए जो कदम उठाए हैं उन्हें आप कैसे देखते हैं?
– सरकार ने संक्रमण के बढ़ते ग्राफ को नीचे लाने के लिए जो कदम उठाया है, वह काबिले तारीफ है। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सरकारी स्तर पर सरकारी निवेश की बहुत जरूरत है। उद्योग जगत को सस्ती ब्याज दरों पर कर्ज का प्रवाह सुनिश्चित हो। ज्यादातर विकसित देशों में ऋण वस्तुओं में जीरो के करीब है, जबकि भारत में अब यह भी लगभग 10% है। रिजर्व बैंक ने कैश की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है पर बैंक अभी भी जोखिम के खिलाफ ही हैं और उद्योगों खासतौर पर एमएसएमई को कर्ज नहीं दे रहे हैं। दुर्भाग्य से इसके कारण आर्थिक सुधार की रफ्तार धीमी हो जाएगी। अर्थव्यवस्था में तेज कैश फ्लो की तत्काल जरूरत है और इस बारे में प्राथमिकता के साथ कदम बढ़ाने होंगे।

प्रश्न: आपकी कंपनी पर कोरोना का क्या असर हुआ है? अपने सेक्टर को किस तरह देखते हैं?
– हमारे सेक्टर सहित व्यवसाय जगत पर असर के दो मुख्य बिंदु मुझे नजर आते हैं। एक, बहुत ही भरोसेमंद सप्लाई चेन अचानक अस्त-व्यस्त हो गई है और दूसरा विभिन्न बिजनेस प्रोसेक्ट्स में एक्सक्लूसिव यूनियन और डिजिटलाइजेशन की कमी है। मुझे लगता है कि इस अहसास के बाद सेक्टर इन दो चीजों को अपनाने की कोशिश तेज करेगा। इससे ग्राहकों को राहत देने की दिशा में सप्लाई चेन को सरल-सुगम बनाने, कार्यक्षमता में सुधार, उत्पादकता बढ़ाने और लागत घटाने में मदद मिली है। हालाँकि, डिजिटलाइजेशन का मतलब लेबर फोर्स को हटाना नहीं है, लेकिन यह ग्राहकों को सेवा प्रदान करने का वैकल्पिक तरीका है।

प्रश्न: इस दौरान 2020-21 के लिए बिजनेस प्लान को संशोधित किया गया है?
– इस नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत ही वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल लाने वाली हो रही है। मैं 2020-21 को लेकर आशावादी हूं। मुझे भरोसा है कि सेकंड हाफ के बाद अर्थव्यवस्था ग्राफ वी ’के ग्राफ की शैली में बहुत ही मजबूत वापसी करेगी। सरकारी नीतियां और वित्तीय पैकेज इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट को उभारने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। फिर हम अनुकूल मानसून, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में विस्तार खर्च से अर्थव्यवस्था को मिलने वाले सहारे और बेहतर विदेशी पूंजी निवेश (को विभाजित -19 से सामना में भारत के बेहतर प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में) की भी उम्मीद करते हैं।

प्रश्न: कोरोना के असर से उबरने के लिए आपकी कंपनी में कौन-से कदम उठाए जा रहे हैं?
– हमने अपने सभी प्लांट लोकेशन्स पर वैश्विक स्तर पर व्यावहारिक विभिन्न एसओपी (मानक संचालन प्रक्रियाएं) को अपनाया है। इसके तहत सोशल डिस्टेंसिंग, व्यापक स्तर पर तापमान स्क्रीनिंग, कार्यस्थल, टाउनशिप और लेबर कॉलोनियों का सैनिटरीकरण, कर्मचारियों, कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स व जरूरत हो तो आगंतुकों के प्रवेश और बाहर जाने की कड़ी प्रक्रिया शामिल है। हमने साल के शुरू से ही जीरो तिमाही नीति लागू कर दी है। जब तक इस नए वायरस का वैक्सीन नहीं खोजा जाता है, हम सबको इस ॉर्म न्यू नॉर्मल ’की सीमा में ही काम करने के तौर-तरीके ढूंढ लेते हैं। साथ ही संकट के बीच अवसरों की तलाश होनी चाहिए।

प्रश्न: कोविड -19 से उबरने के लिए भारत को किस तरह के रोडवेज की जरूरत है?
– हमें यह देखना चाहिए कि भारत टेक्सटाइल, लेदर, एग्रो प्रोसेसिंग, दवाई, आईटी, मेटल, माइनिंग खासतौर पर स्टील सहित सभी क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर हब बन गया है। यह सरकार के साहसी नीतिगत कदमों और देशभर के बिज़नेस लीडर्स की ओर से प्रोएक्टिव एप्रोच यानी खुद सक्रियता से पहल करने से होगा। फिर चाहे कोई भी सेक्टर क्यों न हो और उद्योग कितना ही बड़ा-छोटा क्यों न हो।





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