• कोरोना की वजह से शहर छोड़कर जाने वालों की संख्या बढ़ी, सूने हुए गांवों में बढ़ रही रौनक
  • संस्कृति मंत्रालय कर रहा है ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन, उद्योग और सुविधाओं को बढ़ाने पर विचार

दैनिक भास्कर

09 मई, 2020, सुबह 06:13 बजे IST

रोम। कोरोना संकट के बीच अन्य राज्यों और देशों में फंसे लोगों के अपने घर और देश वापसी का सिलसिला जारी है। कभी कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वाले इटली में भी लोग अब गांवों की तरफ लौट रहे हैं। उनका कहना है कि इससे भविष्य में किसी भी महामारी या संक्रमण से निपटने में मदद मिलेगी।

इनमें से एक बड़ा तबका युवाओं का भी है। ज्यादातर युवाओं का कहना है कि वे शहरों में भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी, हिंसा-आतंकवाद और नशे जैसी चीजों से छुटकारा चाहते हैं। दूसरा, अब गांवों में भी शहरों की तरह ज्यादातर सुविधाएं मौजूद हैं और इंटरनेट की वजह से ऑफिस के कई काम आसान हो गए हैं। ऐसे में उन पर शहरों में पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कम होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ाने पर विचार

इटली का संस्कृति मंत्रालय भी ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन, उद्योग और सुविधाओं को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। गांवों की तरफ लोगों का रुझान बढ़ने से सामाजिक-आर्थिक संगठन सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की मांग कर रहे हैं, जिससे सूने हो चुके गांवों को समृद्ध किया जा सकेगा।

यह साहसिक और व्यावहारिक निर्णय का है

मिलान में कई इकोफ्रेंडली इमारतें बना चुके प्रसिद्ध वास्तुकार स्टीफानो बोइरी कहते हैं, “यह साहसिक और व्यावहारिक निर्णय लेने का वक्त है। अब शहरों को संक्रमण बम बनने से रोकना जरूरी है।” वहीं समाजशास्त्री, मानव विज्ञानी कहते हैं कि महामारी ने लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है। उन्हें पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में खाली पड़े गांवों में बसने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

5800 से ज्यादा गांवों में 5 हजार से भी कम आबादी
आर्किटेक्ट स्टीफानो बाइरी के मुताबिक, इटली में कम से कम 5800 गांव ऐसे हैं, जिनकी आबादी 5 हजार से भी कम है। उनके अलावा लगभग 2300 गांव ऐसे हैं, जिन्हें पूरी तरह से बलिदान दिया गया है, यानी वहां भी कोई अवशेष नहीं है। ऐसे में इन गांवों को गोद लेकर आबादी बसाई जा सकती है। यहां वर्क फ्रॉम होम, इंटरनेट सुविधाएं, टैक्स में छूट, परिवहन में सुधार से शहरों का बोझ भी कम होगा।





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