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कोरोना वायरस से निपटने को लेकर चीन के खिलाफ अमेरिका पहले से ही सख्त रहा है। इस बीच, व्हाइट हाउस ने आक्रामक आर्थिक नीतियों, सैन्य ढांचा बढ़ाने, गलत सूचना फैलाने का अभियान चलाने और मानवाधिकारों का उल्लंघन को लेकर बीजिंग पर निशाना साधा है। 20 पन्नों की इस रिपोर्ट में अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं दिखाया गया है।

इस रिपोर्ट में राष्ट्रपति ट्रंप को इस उम्मीद से कड़ा रुख अपनाने को कहा गया है क्योंकि इस संक्रामक रोग से करोड़ों अमेरिकी बेरोजगार हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सख्ती चीन पर मतदाताओं के आक्रोश को भुनाने का काम करेगी। व्हाइट हाउस द्वारा रिपोर्ट जारी करने से पहले विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, ‘मीडिया का ध्यान वैश्विक महामारी के खतरों पर केंद्रित तो है लेकिन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पेश की गई सबसे बड़ी चुनौती पर नहीं है।’

उन्होंने कहा, ‘चीन में 1949 से एक क्रूर तानाशाही सरकार शासन करती रही है। कई दशकों तक हम सोचते रहे कि सरकार हमारी तरह बनेगी, कारोबार के माध्यम से, वैज्ञानिक आदान-प्रदान से, या राजनयिक पहुंच के जरिए। उन्हें डब्ल्यूटीओ में भी एक विकासशील देश के तौर पर शामिल किया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’

ताइवान: अमेरिका ने दी 18 करोड़ डॉलर की टॉरपीडो, चीन नाराज
अमेरिकी सरकार ने ताइवान को लगभग 18 करोड़ डॉलर के उन्नत टॉरपीडो की संभावित बिक्री के लिए संसद को अवगत कराया है। इससे वाशिंगटन और बीजिंग के बीच पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे संबंधों में खटास आने की एक और वजह बन सकती है।

चीन पहले से ही ताइवान को चीनी क्षेत्र होने का दावा करता रहा है। अधिकांश देशों की तरह संयुक्त राज्य अमेरिका का ताइवान के साथ कोई आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं है, लेकिन वह अपनी रक्षा के लिए लोकतांत्रिक द्वीप प्रदान करने के कानून से बाध्य है। अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री की चीन ने हमेशा की तरह निंदा की है।

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग ने 18 करोड़ डॉलर की अनुमानित लागत के लिए 18 एमके -48 मॉड 6 उन्नत प्रौद्योगिकी हैवी वेट टॉरपीडो और संबंधित उपकरणों के ताइवान को संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी है। रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने इस संभावित बिक्री के बारे में संसद को अवगत कराते हुए आवश्यक प्रमाण पत्र दे दिया है।

सार

20 पन्नों की रिपोर्ट में कहा कि मौजूदा महामारी से अमेरिका में करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं।

विस्तार

कोरोना वायरस से निपटने को लेकर चीन के खिलाफ अमेरिका पहले से ही सख्त रहा है। इस बीच, व्हाइट हाउस ने आक्रामक आर्थिक नीतियों, सैन्य ढांचा बढ़ाने, गलत सूचना फैलाने का अभियान चलाने और मानवाधिकारों का उल्लंघन को लेकर बीजिंग पर निशाना साधा है। 20 पन्नों की इस रिपोर्ट में अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं दिखाया गया है।

इस रिपोर्ट में राष्ट्रपति ट्रंप को इस उम्मीद से कड़ा रुख अपनाने को कहा गया है क्योंकि इस संक्रामक रोग से करोड़ों अमेरिकी बेरोजगार हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सख्ती चीन पर मतदाताओं के आक्रोश को भुनाने का काम करेगी। व्हाइट हाउस द्वारा रिपोर्ट जारी करने से पहले विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, ‘मीडिया का ध्यान वैश्विक महामारी के खतरों पर केंद्रित तो है लेकिन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पेश की गई सबसे बड़ी चुनौती पर नहीं है।’

उन्होंने कहा, ‘चीन में 1949 से एक क्रूर तानाशाही सरकार शासन करती रही है। कई दशकों तक हम सोचते रहे कि सरकार हमारी तरह बनेगी, कारोबार के माध्यम से, वैज्ञानिक आदान-प्रदान से, या राजनयिक पहुंच के जरिए। उन्हें डब्ल्यूटीओ में भी एक विकासशील देश के तौर पर शामिल किया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’

ताइवान: अमेरिका ने दी 18 करोड़ डॉलर की टॉरपीडो, चीन नाराज
अमेरिकी सरकार ने ताइवान को लगभग 18 करोड़ डॉलर के उन्नत टॉरपीडो की संभावित बिक्री के लिए संसद को अवगत कराया है। इससे वाशिंगटन और बीजिंग के बीच पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे संबंधों में खटास आने की एक और वजह बन सकती है।

चीन पहले से ही ताइवान को चीनी क्षेत्र होने का दावा करता रहा है। अधिकांश देशों की तरह संयुक्त राज्य अमेरिका का ताइवान के साथ कोई आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं है, लेकिन वह अपनी रक्षा के लिए लोकतांत्रिक द्वीप प्रदान करने के कानून से बाध्य है। अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री की चीन ने हमेशा की तरह निंदा की है।

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग ने 18 करोड़ डॉलर की अनुमानित लागत के लिए 18 एमके -48 मॉड 6 उन्नत प्रौद्योगिकी हैवी वेट टॉरपीडो और संबंधित उपकरणों के ताइवान को संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी है। रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने इस संभावित बिक्री के बारे में संसद को अवगत कराते हुए आवश्यक प्रमाण पत्र दे दिया है।

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