विजाग गैस रिसाव: विजाग के विभिन्न अस्पतालों में गैस रिसाव के शिकार लोगों के दिल के घूमने के दृश्य – विजाग गैस रिसाव: ‘इस बच्ची को कोई अस्पताल में नहीं छोड़ा गया, माता-पिता के बारे में पता नहीं’

Bytechkibaat7

May 6, 2020 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


विजाग गैस त्रासदी
– फोटो: पीटीआई

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जब नींद खुली तो पांच साल की उस मासूम बच्ची ने खुद को डॉक्टर्स और नर्स के बीच पाया। यह गोपालपट्टनम में 30 बिस्तरों वाला एक अस्पताल था। वह अब भी चारों ओर नजर घुमाकर इन अनजान लोगों को पहचानने की कोशिश कर रही थी। चिकित्साकर्मियों ने हालत सुधरती देख उसे बिस्तर पर बिठा दिया।

कोई भी उसे यहाँ नहीं लाया था। बिस्तर पर रखा और छोड़ दिया। हम नहीं जानते कि उसके माता-पिता कौन हैं या उसके रिश्तेदार कहां हैं। जब उसे यहां लाया गया तो उसकी हालत गंभीर थी। अब वह खतरे से बाहर है। एक महिला डॉ। अन्य मरीजों की देखभाल करते हुए बताती हैं।

दरअसल, गुरुवार सुबह आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में पॉलिमर उद्योग से रासायनिक गैस रिसाव हो गया। ताजा जानकारी के मुताबिक 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। हजारों लोगों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। वर्तमान में गैस के टन पर अधिक पा लिया गया है।

कई स्थानीय युवाओं ने मौके पर पहुंचकर बीमारों को अस्पताल पहुंचाया। कई दुखी बच्चों और अन्य लोगों को पहियाहिया वाहनों से लगभग पांच किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा गया। गोपालपट्टनम के अस्तपाल में पहुंचाई गई वह पांच साल की मासूम बच्ची ऐसे ही किसी के द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सुरक्षित पहुंचाई गई होगी और फिर उसे वहां लाने वाले अन्य लोगों को बचाने निकल गए। अस्पताल के बाहर एक युवक अपनी कलाकार से बहते खून को रूमाल से रोकने का प्रयास कर रहा था।

‘मैंने, एक खिड़की को तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला, इस दौरान कांच से मेरी मुट्ठी में काट गया। अगर हम कुछ देर पहले सूचना मिल जाते हैं, तो शायद हम अधिकतम लोगों को बचा सकते थे। फिर बिना नाम बताए यह युवक अपने संपर्कों को भी नजरअंदाज करते हुए अन्य लोगों की मदद करने निकल पड़ा।

ऐसा ही कुछ ह्रदय विदारक न्योर किंग जॉर्ज अस्पताल में भी देखने को मिला, जहां अलग-अलग वॉर्ड्स में 100 से ज्यादा लोगों को भर्ती करवाया गया।

लगभग हर अस्पताल परिसर में एकारेंस, आंध्र प्रदेश परिवहन की बस, पुलिस की गाड़ियां जमा दिखीं। लॉकडाउन के बावजूद ऑटो वाले भी बीमारों को अस्पताल पहुंचाने में जुटे रहे, ताकि किसी के प्राण पखेरु इलाज के अभाव में न उड़ जाए।

पुलिस इंस्पेक्टर रघुवीर विष्णु ने बताया कि, ‘घरों और सड़कों के किनारे बेहोश पड़े लोगों को प्राथमिक उपचार दिलवाना हमारी प्राथमिक प्राथमिकता थी। बच्चे, बुढ़े अपने परिवार से अलग हो गए, बाद में उन्हें मिलाया भी जा सकता है, लेकिन जान नहीं लौटाई जा सकती है।

दुर्घटना स्थल से लगभग पांच किलोमीटर दूर अप्पयनगर स्थित श्री शिरडी साईं बाबा मंदिर के लाउड स्पीकर्स पर सुबह 9 बजे के करीब घोषणा की गई, जिसमें लोगों से गली गली के मद्देनजर घर के अंदर रहने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने मृतकों के परिवार को एक-एक करोड़ की आर्थिक मदद का एलान किया है।

पॉलीमर प्लांट का स्वामित्व दक्षिण कोरिया की बैटरी निर्माता कंपनी ने केमिकल लिमिटेड के पास है जो कंपनी की वेबसाइट के अनुसार पॉलीस्टाइरीन का उत्पादन करती है। कंपनी इलेक्ट्रिक फैन ब्लेड, कप और कटलरी और मेक जैसे कॉस्मेटिक उत्पादों के लिए कंटेनर बनाने का काम करती है। प्लांट अपने उत्पादों को बनाने के लिए स्टाइरीन के कच्चे माल का उपयोग करता है। स्टाइरीन अत्यधिक ज्वलनशील होता है और जलने पर एक जहरली गैस छोड़ता है। इस कंपनी की स्थापना 1961 में पॉलीस्टाइरीन और को-पॉलिमर्स का निर्माण करने के लिए हिंदुस्तान पॉलीमर्स के तौर पर हुई थी। 1978 में इसके यूबी समूह के मैक डॉवेल एंड कंपनी लिमिटेड के साथ विलय हो गया था। 1997 में कंपनी को ब्रांड केमिकल ने अपने कब्जे में ले लिया और इसका नाम बदलकर कंपनी पॉलिमर इंडिया प्राइवेट लिमिटिड कर दिया। केमिकल की दक्षिण कोरिया में स्टाइरेनिक्स के कारोबार में बहुत मजबूत उपस्थिति है। कंपनी वर्तमान में भारत में पॉलीस्टाइरीन और विस्तार योग्य पॉलीस्टाइरिंस के अग्रणी निर्माताओं में से एक है।

जब नींद खुली तो पांच साल की उस मासूम बच्ची ने खुद को डॉक्टर्स और नर्स के बीच पाया। यह गोपालपट्टनम में 30 बिस्तरों वाला एक अस्पताल था। वह अब भी चारों ओर नजर घुमाकर इन अनजान लोगों को पहचानने की कोशिश कर रही थी। चिकित्साकर्मियों ने हालत सुधरती देख उसे बिस्तर पर बिठा दिया।

कोई भी उसे यहाँ नहीं लाया था। बिस्तर पर रखा और छोड़ दिया। हम नहीं जानते कि उसके माता-पिता कौन हैं या उसके रिश्तेदार कहां हैं। जब उसे यहां लाया गया तो उसकी हालत गंभीर थी। अब वह खतरे से बाहर है। एक महिला डॉ। अन्य मरीजों की देखभाल करते हुए बताती हैं।

दरअसल, गुरुवार सुबह आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में पॉलिमर उद्योग से रासायनिक गैस रिसाव हो गया। ताजा जानकारी के मुताबिक 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। हजारों लोगों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। वर्तमान में गैस के टन पर अधिक पा लिया गया है।


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