• भारत का नेपाल को जवाब- यह क्षेत्र हमारी सीमा में है, लिपूलेख से पहले भी मानसरोवर यात्रा होती है

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को 80 किलोमीटर लंबे लिपूलेख-धाराचूला मार्ग का उद्घाटन किया था

  • इस तरह के शुरू होने से मानसरोवर जाने वाले तीर्थ यात्रियों को आसानी से, सेना के लिए भी फायदेमंद होगा

दैनिक भास्कर

10 मई, 2020, 02:46 AM IST

नई दिल्ली / काठमांडू। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारत ने शुक्रवार को लिपूलेख-धाराचूला मार्ग का उद्घाटन किया। नेपाल ने इसे एकतरफा गतिविधि बताते हुए शनिवार को आपत्ति जताई। वहाँ के विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि महाकाली नदी के पूर्व का पूरा इलाका नेपाल की सीमा में आता है। भारत को दूसरे देश की सीमा में किसी भी तरह की गतिविधि से बचना चाहिए। नवंबर के बाद यह दूसरा मौका है जब नेपाल ने इस तरह से नाराजगी जाहिर की है। इससे पहले उसे कालापन, लिपूलेख और लिंपियाधुरा को भारत के नक्शे में दिखाया जाना पर ऐतराज था।

विदेश मंत्रालय ने नेपाल को जवाब दिया- लपेटूलेख हमारी सीमा क्षेत्र में आता है और लिपूलेख मार्ग से पहले भी मानसरोवर यात्रा होती है। अब हम इसी तरह से निर्माण पर तीर्थ यात्रियों, स्थानीय लोगों और व्यवसायों के लिए कथा को सुगम बनाया गया है। दूसरी ओर, नेपाल के इस रवैये से दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ती दिख रही है। भारत ने कोरोना महामारी को लेकर नेपाल के साथ होने से सचिवरी लेवल की बातचीत विज्ञापन कर दी है।

एकतरफा गतिविधि प्रधान लोगों की पहल के खिलाफ: नेपाल

  • नेपाल सरकार ने लिपूलेख मार्ग के उद्घाटन पर भारत से कहा है कि हमारी सीमा में किसी भी तरह की गतिविधि को अंजाम देने से बचा लेना चाहिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल के विदेश सचिव शंकर दास बैरागी ने भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा से इसकी शिकायत भी की।
  • नेपाल ने कहा- यह एकतरफा गतिविधि दोनों देशों के प्रधान नेताओं के बीच बातचीत से सीमा क्षेत्र का हल निकालने के खिलाफ है। 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक, काली (महाकाली) नदी के पूर्व का पूरा हिस्सा पास के क्षेत्र में आता है। यह बात पहले भी भारत को बताई जा चुकी है।

यह रास्ता सेना के लिए भी फायदेमंद है
उत्तराखंड में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर लपेटूलेख-धाराचूला मार्ग की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की थी। यह रास्ता 80 किलोमीटर लंबा है। इसे बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन ने तैयार किया है। नया रास्ता से कैलाश मानसरोवर की यात्रा अब सुगम होगी। यह इलाका अत्यंत दुर्गम है। इसके अलावा चीन की सीमा भी यहां से काफी करीब है। सेना के लिए भी इस सड़क का विशेष महत्व है। चीन सीमा पर सैनिकों की तैनाती और सुरक्षा की आपूर्ति आसान होगी।





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