• बिजनेस टाइकून रतन टाटा ने 3 से 4 महीने पहले ही अपने प्रस्ताव को सुन लिया था
  • जेनेरिक आधार के तहत एक साल के अंदर 1,000 छोटे फ्रेंचाइजी मेडिकल स्टोर खोलने की योजना है

दैनिक भास्कर

07 मई, 2020, दोपहर 01:32 बजे IST

मुंबई। टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने मुंबई स्थित ‘जेनेरिक आधार’ फार्मेसी में 50 प्रतिशत हिस्सा खरीद ली है। इस कंपनी के मालिक के 18 वर्षीय अर्जुन देशपांडे हैं। अन्य ऑफ़लाइन फार्मेसी की तुलना में जेनेरिक आधार अपनी दवाओं के बाजार मूल्य से काफी सस्ती कीमतों पर बेचती है। देशपांडे ने इस डील की पुष्टि की है, लेकिन डील की कीमत बताने से इनकार कर दिया है।

उन्होंने कहा कि बिजनेस टाइकून रतन टाटा ने 3 से 4 महीने पहले ही उनके प्रस्ताव को सुन लिया था। टाटा पे पार्टनरशिप की पसंद थी और वे मेंटर बनकर बिजनेस चलाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जल्दी ही इस सौदे के किए गए निवेश की औसत घोषणा की जाएगी।

कई स्टार्टअप में निवेश कर रतन टाटा हैं
सूत्रों के मुताबिक रतन टाटा ने इस कंपनी में निजी तौर पर निवेश किया है। ये टाटा ग्रुप से जुड़ा नहीं है। रतन टाटा ने पहले भी ऐसे कई स्टार्टअप में निवेश किया है, जिसमें ओला, पेटीएम, जेडीएल, क्योरफिट, अर्बन लैडर, लेंसकार्ट और लाइब्रेट शामिल हैं।

रिटेलर्स को 20% तक मुनाफा
देशपांडे ने जेनेरिक आधार कंपनी की शुरुआत दो साल पहले की थी। तब वे महज 16 साल के थे। अब उनकी कंपनी हर साल 6 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का दावा करती है। ये स्टार्टअप यूनिक फार्मेसी-एग्रीगेटर बिजनेस मॉडल को फॉलो करता है। उन्होंने मैन्युफैक्चरर्स को डायरेक्ट सोर्स बनाया है और रिटेल फार्मेसी तक जेनेरिक दवाओं को बेचती है। इससे रिटेल रेस के 16-20 प्रतिशत मार्जिन बच जाता है, जो बुलियम और कमाते हैं।

प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल का फॉलो करती हैं कंपनी
मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और ओडिशा के लगभग 30 रिटेलर्स इस श्रृंखला का हिस्सा बनाकर प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल का फॉलिंग कर रहे हैं। ये मुख्य रूप से स्टैंडअलोन फार्मेसी हैं। थाने के हेड ऑफिस में जेनरिक आधार ब्रांडिंग के लिए मुफ्त फेस-लिफ्ट, लोगो और एक्सपैक्ट आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टोर्स की पेशकश की जाती है। जेनेरिक आधार में लगभग 55 कर्मचारी हैं। इसमें कैमिस्ट, आईटी इंजीनियर और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स शामिल हैं।

देशपांडे ने कहा, “एक साल के अंदर जेनेरिक आधार के तहत 1,000 छोटे फ्रेंचाइजी मेडिकल स्टोर खोलने की योजना है। ये महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली तक फैला हुआ है।”

कंपनी मुख्य रूप से डायबिटीज और हाइपर दवाओं की दवाओं की आपूर्ति करती है, लेकिन जल्द ही बाजार मूल्य से बहुत कम दरों पर कैंसर की दवाओं की पेशकश शुरू कर देगी। इसके लिए पालघर, अहमदाबाद, पांडिचेरी और नागपुर में चार डब्ल्यूएचओ-जीएमपी प्रमाणित निर्माताओं के साथ टाइअप है। हिमाचल प्रदेश के बद्दी में एक निर्माता से कैंसर की दवाओं की खरीद की जाएगी।

फार्मास्युटिकल इवेंट से बिजनेस का आइडिया आया
देशपांडे ने अपने माता-पिता से मिली फंडिग के आधार पर बिजनेस शुरू किया था, जो खुद भी अपने बिजनेस चला रहे हैं। उनकी मां एक औषधीय मार्केटिंग कंपनी की बॉस हैं, जो इंटरनेशनल मार्केट में ड्रग्स बेचती है। वहीं, पिता एक मैसेज एजेंसी चलाते हैं। देशपांडे का कहना है कि उसने अपनी मां के साथ अमेरिका, दुबई और कुछ अन्य देशों में गर्मी की छुट्टी के दौरान फार्मास्युटिकल इवेंट में शामिल होने के दौरान बिजनेस करने का विचार आया था।

एक प्रमुख रिटेल चेन के मालिक ने सालभर पहले जेनेरिक आधार में हिस्सा लेने में इंटरेस्ट दिखाया था, लेकिन इसमें तेजी नहीं आई। पिछले साल जब देशपांडे मुंबई कॉलेज में स्टूडेंट थे, तब उन्हें सिलिकॉन वैली में थिएल फैलोशिप के लिए गया था। इसमें व्यवसाय में आने वाले युवाओं के लिए दो साल का कार्यक्रम शामिल है।

पिछले कुछ वर्षों से सरकार सभी तरह की आवश्यक दवाओं के मूल्य में नियंत्रण लाने की कोशिश कर रही है। देश में लगभग 80 प्रतिशत दवाएं ऐसी बेची जाती हैं, जिन्हें देश की ही 50,000 से अधिक कंपनियों द्वारा तैयार किया जाता है। ये कंपनियां लगभग 30 फीसदी से ज्यादा का मार्जिन लेती हैं, जिसमें बुल मार्कर का 20 प्रतिशत और रिटेलर का 10 प्रतिशत मार्जिन शामिल है।





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *