• सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट- प्लांट बंद होने से एयर क्वालिटी में सुधार हुआ
  • एक महीन में शिशुैच्योर जन्म के मामले भी 600 तक कम हुए, 1900 बच्चे इमरजेंसी इलाज से बचे गए

दैनिक भास्कर

08 मई, 2020, 06:07 बजे IST

लंदन। कोरोनासिस की वजह से सीखने में लॉकडाउन का असर पर्यावरण पर भी पड़ा है। कई स्थानों पर बिजली, मुर्गा और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले प्लांट बंद हैं। महामारी से निपटने के लिए अपनाए गए उपायों से पर्यावरण में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का प्रदूषण औसतन 40% घट गया। इससे पिछले 30 दिनों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) प्रदूषण के औसत स्तर में 10% की कमी आई। यही कारण है कि यूरोप में हवा साफ हो गई है।

इसका नतीजा यह रहा कि एक महीने में लगभग 11 हजार लोगों को असमय मौत से लगभग बचाया जा चुका है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान सबसे ज्यादा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर हुआ। पिछले एक महीने में यूरोप में बच्चों में अस्थमा के करीब 6 हजार मामले कम आए। इसके अलावा विसैच्योर जन्म के मामलों में भी 600 से ज्यादा की गिरावट हो रही है। उनके अलावा लगभग 1900 बच्चों को इमरजेंसी इलाज से बचाया जा चुका है।

कोयले और बिजली के 37% प्लांट बंद, हवा साफ

रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान कोयले और बिजली के 37% प्लांट बंद रहे, जबकि एक स्टॉक ऑयल प्लाजा बंद रहा। इनकी वजह से नाइट्रोजन ऑक्साइड का क्रिया भी कम हुआ, जो विशेष रूप से अस्थमा के रोगियों के लिए ज्यादा नुकसानदायक है। जिन बीमारियों या कारणों से लोगों की जान बची है, उनमें ज्यादातर सांस और फेफड़ों के संक्रमण से जुड़े हैं, जिन्हें कोरोना का भी खतरा ज्यादा है। ‘ स्वच्छ हवा से उनके स्वास्थ्य पर भी बेहतर असर पड़ा है।

जर्मनी में यूरोप के दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा जानें बचीं

यूरोप 21 देशों में सबसे ज्यादा फायदा जर्मनी को हुआ। वहाँ मौतों की संख्या 2083 घटी। स्वीडन, ब्रिटेन, पुर्तगाल सहित 10 देशों में यह आंकड़ा 120 से 770 के बीच है।

देश जानें अजवाइन
जर्मनी 2083
ब्रिटेन 1752
इटली 1490
फ्रांस 1230
स्पेन 1081





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