चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
– फोटो : पीटीआई

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करीब 20 लाख सैनिकों वाली सेना के प्रमुख जिनपिंग ने देश में चल रहे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में हिस्सा लेने के दौरान यह निर्देश दिया। बता दें कि चीन की सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेना है। 

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक जिनपिंग ने सेना को आदेश दिया है कि वह सबसे खराब स्थिति की कल्पना करें। उसके बारे में सोचें और युद्ध के लिए अपने प्रशिक्षण और तैयारियों में तेजी लाएं और हर मुश्किल परिस्थिति से प्रभावी तरीके से तत्काल निपटें। 

जिनपिंग का यह बयान वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच करीब 20 दिन से जारी गतिरोध की पृष्ठभूमि में आई है। हाल के दिनों में लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में भारत और चीन की सेनाओं ने अपनी उपस्थिति काफी हद तक बढ़ाई है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीन सेना प्रमुखों के साथ एक बैठक की। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल थे। राजनाथ सिंह ने इससे पहले तीनों सेना प्रमुखों के साथ मुलाकात कर हालात का जायजा लिया था।

‘किसी भी आक्रामक रवैये के आगे नहीं झुकेगा भारत’

रक्षा मंत्री ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों से साफ कहा कि लद्दाख, सिक्किम, उत्तराखंड या अरुणाचल प्रदेश में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास किसी भी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है।

दोनों पक्षों के बीच लगभग 20 दिनों के गतिरोध के मद्देनजर, भारतीय सेना ने उत्तरी सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के अलावा लद्दाख में संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ ही चीन को साफ संकेत दिया है कि वो किसी भी तरह के आक्रामक रवैये के आगे नहीं झुकेगा। 

दोनों देशों की सेना के कमांडर कर चुके हैं आपस में बातचीत

वहीं, सूत्रों के मुताबिक भारत और चीन के उच्च स्तरीय सैन्य कमांडरों ने एलएसी पर 22 और 23 मई को मुलाकात की थी। हालांकि, जानकारी यह मिली है कि इन वार्ताओं का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है। पहले कहा गया था कि दोनों देशों के सैन्य कमांडर हल न निकलने तक वार्ता करते रहेंगे।  

एक ओर जहां भारत और चीन के सैन्य कमांडर लद्दाख में आमने-सामने वार्ता कर रहे हैं तो वहीं इस समस्या को दूर करने के लिए दोनों देशों की राजधानियों में राजनयिक प्रयास किए जा रहे हैं। करीब 3,500 किलोमीटर लंबी एलएसी दोनों देशों के बीच सीमा का काम करती है।

चीन को है गलवां नदी के पास सड़क निर्माण पर आपत्ति

दरअसल, चीन ने लद्दाख में गलवां नदी के आसपास भारत की ओर से एक महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी। सूत्रों के मुताबिक सड़क का निर्माण फिलहाल रोक दिया गया है। पांच मई को लगभग 250 भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और डंडों के साथ झड़प हुई थी। इसमें दोनों तरफ के कई सैनिक घायल हो गए थे। 

सार

भारत और चीन के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सबसे खराब स्थिति के बारे में सोचते हुए अपनी सेना को युद्ध की तैयारियां तेज करने का आदेश दे दिया। उन्होंने चीनी सेना से कहा है कि वह पूरी दृढ़ता के साथ देश की संप्रभुता की रक्षा करें। वहीं, इस विवाद पर भारत ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में चीन द्वारा लगातार माहौल खराब करने की कोशिश के बावजूद भारत लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी चीन-भारत सीमा के साथ रणनीतिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं को नहीं रोकेगा।

विस्तार

करीब 20 लाख सैनिकों वाली सेना के प्रमुख जिनपिंग ने देश में चल रहे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में हिस्सा लेने के दौरान यह निर्देश दिया। बता दें कि चीन की सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेना है। 

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक जिनपिंग ने सेना को आदेश दिया है कि वह सबसे खराब स्थिति की कल्पना करें। उसके बारे में सोचें और युद्ध के लिए अपने प्रशिक्षण और तैयारियों में तेजी लाएं और हर मुश्किल परिस्थिति से प्रभावी तरीके से तत्काल निपटें। 

जिनपिंग का यह बयान वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच करीब 20 दिन से जारी गतिरोध की पृष्ठभूमि में आई है। हाल के दिनों में लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में भारत और चीन की सेनाओं ने अपनी उपस्थिति काफी हद तक बढ़ाई है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीन सेना प्रमुखों के साथ एक बैठक की। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल थे। राजनाथ सिंह ने इससे पहले तीनों सेना प्रमुखों के साथ मुलाकात कर हालात का जायजा लिया था।

‘किसी भी आक्रामक रवैये के आगे नहीं झुकेगा भारत’

रक्षा मंत्री ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों से साफ कहा कि लद्दाख, सिक्किम, उत्तराखंड या अरुणाचल प्रदेश में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास किसी भी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है।

दोनों पक्षों के बीच लगभग 20 दिनों के गतिरोध के मद्देनजर, भारतीय सेना ने उत्तरी सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के अलावा लद्दाख में संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ ही चीन को साफ संकेत दिया है कि वो किसी भी तरह के आक्रामक रवैये के आगे नहीं झुकेगा। 

दोनों देशों की सेना के कमांडर कर चुके हैं आपस में बातचीत

वहीं, सूत्रों के मुताबिक भारत और चीन के उच्च स्तरीय सैन्य कमांडरों ने एलएसी पर 22 और 23 मई को मुलाकात की थी। हालांकि, जानकारी यह मिली है कि इन वार्ताओं का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है। पहले कहा गया था कि दोनों देशों के सैन्य कमांडर हल न निकलने तक वार्ता करते रहेंगे।  

एक ओर जहां भारत और चीन के सैन्य कमांडर लद्दाख में आमने-सामने वार्ता कर रहे हैं तो वहीं इस समस्या को दूर करने के लिए दोनों देशों की राजधानियों में राजनयिक प्रयास किए जा रहे हैं। करीब 3,500 किलोमीटर लंबी एलएसी दोनों देशों के बीच सीमा का काम करती है।

चीन को है गलवां नदी के पास सड़क निर्माण पर आपत्ति

दरअसल, चीन ने लद्दाख में गलवां नदी के आसपास भारत की ओर से एक महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी। सूत्रों के मुताबिक सड़क का निर्माण फिलहाल रोक दिया गया है। पांच मई को लगभग 250 भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और डंडों के साथ झड़प हुई थी। इसमें दोनों तरफ के कई सैनिक घायल हो गए थे। 

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