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भारत-चीन एक बार फिर से सीमा विवाद को लेकर आमने-सामने हैं। दोनों देशों के बीच तनातनी का महौल बन गया है। कहा जा रहा है चीन ने पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील में अपनी गश्ती नौकाओं की तैनाती बढ़ा दी है। दो हफ्ते पहले इसी झील के नजदीक भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प भी हुई थी।

ये इलाका लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास है। लगातार खबरें आती रही हैं कि चीन नियंत्रण रेखा के पास अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। भारत-चीन का इस तरह से एकदूसरे से उलझना कोई नई बात नहीं है। दोनों बार-बार अलग-अलग इलाको में इस तरह के विवादों में उलझ जाते हैं। इन विवादों के पीछे कि आखिर असली वजह क्या है।

भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। ये सीमा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। ये तीन सेक्टरों में बंटी हुई है – पश्चिमी सेक्टर यानी जम्मू-कश्मीर, मध्य सेक्टर यानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड और पूर्वी सेक्टर यानी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। दोनों देशों के बीच अभी तक पूरी तरह से सीमांकन नहीं हो पाया है, क्योंकि कई क्षेत्रों को लेकर दोनों के बीच आपसी सीमा विवाद है।

पश्चिमी सेक्टर में अक्साई चिन पर भारत अपना दावा करता है, जो फिलहाल चीन के कब्जे में है। भारत के साथ 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने इस पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया था। चीन पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है। चीन कहता है कि ये दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। चीन तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश के बीच की मैकमोहन रेखा को भी नहीं मानता। वो कहता है कि 1914 में जब अंग्रेज भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों ने ये समझौता किया था, तब वो वहां मौजूद नहीं था। 

दरअसल, वर्ष 1914 में तिब्बत एक स्वतंत्र पर कमजोर मुल्क था, लेकिन चीन ने तिब्बत को कभी स्वतंत्र मुल्क नहीं माना। 1950 में चीन ने तिब्बत को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया। सौ बात की एक बात यह है कि चीन चीन अरुणाचल प्रदेश में मैकमोहन रेखा को नहीं मानता और अक्साई चिन पर भारत के दावे को खारिज करता है।

लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल

  • यथास्थिति बनाए रखने के लिए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी टर्म का इस्तेमाल किया जाने लगा। 
  • विवाद यहा पर भी हैं, क्योंकि दोनों देश अपनी अलग-अलग लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल बताते हैं।
  • एलएसी पर कई ग्लेशियर, बर्फ के रेगिस्तान, पहाड़ और नदियां पड़ती हैं।
  • इसके साथ लगने वाले कुछ इलाकों में अक्सर भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव बढ़ता रहता है।

पैंगोंग त्सो झील

  • इस झील का 45 किलोमीटर क्षेत्र भारत में पड़ता है, जबकि 90 किलोमीटर क्षेत्र चीन में आता है।
  • वास्तविक नियंत्रण रेखा इस झील के बीच से गुजरती है।
  • पश्चिमी सेक्टर में चीन की और से अतिक्रमण के एक तिहाई मामले इसी झील के पास होते हैं।

गलवां घाटी

  • गलवां घाटी विवादित क्षेत्र अक्साई चीन में पड़ता है और भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित है।
  • यहां पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) अक्साई चीन को भारत से अलग करती है।
  • ये पाकिस्तान, चीन के शिनजियांग और लद्दाख की सीमा के साथ लगा हुआ है।
  • 1962 की जंग के दौरान भी गालवन नदी का यह क्षेत्र जंग का प्रमुख केंद्र रहा था।

 

डोकलाम

2017 में डोकलाम को लेकर भारत-चीन के बीच जमकर विवाद हुआ था। मामला तब शुरु हुआ था जब भारत ने पठारी क्षेत्र डोकलाम में चीन के सड़क बनाने की कोशिश का विरोध किया। बाद में मामला करीब दो महीनों के बाद बातचीत के स्तर पर सुलझा था। डोकलाम मुख्य रूप से चीन और भूटान के बीच का विवाद है, लेकिन सिक्किम बॉर्डर के नजदीक ही पड़ता है। भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं। भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है।

तवांग

  • अरुणाचल प्रदेश के तवांग को चीन तिब्बत का हिस्सा मानता है।
  • तवांग और तिब्बत में सांस्कृतिक समानता काफी अधिक है।
  • 1914 में जब ब्रिटिश भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों के बीच समझौता हुआ था।
  • समझौते में प्रदेश के उत्तरी हिस्से तवांग और दक्षिणी हिस्से को भारत का हिस्सा माना लिया गया था।

नाथूला

नाथूला हिमालय का एक पहाड़ी दर्रा है जो भारत के सिक्किम राज्य और दक्षिण तिब्बत में चुम्बी घाटी को जोड़ता है। नाथूला भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से होकर चीनी तिब्बत क्षेत्र में स्थित कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा के लिए भारतीयों का जत्था गुजरता है।  

1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इसे बंद कर दिया गया था। साल 2006 में कई द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के बाद नाथूला को खोला गया। 1890 की संधि के तहत भारत और चीन के बीच नाथूला सीमा पर कोई विवाद नहीं है।

भारत-चीन एक बार फिर से सीमा विवाद को लेकर आमने-सामने हैं। दोनों देशों के बीच तनातनी का महौल बन गया है। कहा जा रहा है चीन ने पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील में अपनी गश्ती नौकाओं की तैनाती बढ़ा दी है। दो हफ्ते पहले इसी झील के नजदीक भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प भी हुई थी।

ये इलाका लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास है। लगातार खबरें आती रही हैं कि चीन नियंत्रण रेखा के पास अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। भारत-चीन का इस तरह से एकदूसरे से उलझना कोई नई बात नहीं है। दोनों बार-बार अलग-अलग इलाको में इस तरह के विवादों में उलझ जाते हैं। इन विवादों के पीछे कि आखिर असली वजह क्या है।

भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। ये सीमा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। ये तीन सेक्टरों में बंटी हुई है – पश्चिमी सेक्टर यानी जम्मू-कश्मीर, मध्य सेक्टर यानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड और पूर्वी सेक्टर यानी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। दोनों देशों के बीच अभी तक पूरी तरह से सीमांकन नहीं हो पाया है, क्योंकि कई क्षेत्रों को लेकर दोनों के बीच आपसी सीमा विवाद है।

पश्चिमी सेक्टर में अक्साई चिन पर भारत अपना दावा करता है, जो फिलहाल चीन के कब्जे में है। भारत के साथ 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने इस पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया था। चीन पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है। चीन कहता है कि ये दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। चीन तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश के बीच की मैकमोहन रेखा को भी नहीं मानता। वो कहता है कि 1914 में जब अंग्रेज भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों ने ये समझौता किया था, तब वो वहां मौजूद नहीं था। 

दरअसल, वर्ष 1914 में तिब्बत एक स्वतंत्र पर कमजोर मुल्क था, लेकिन चीन ने तिब्बत को कभी स्वतंत्र मुल्क नहीं माना। 1950 में चीन ने तिब्बत को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया। सौ बात की एक बात यह है कि चीन चीन अरुणाचल प्रदेश में मैकमोहन रेखा को नहीं मानता और अक्साई चिन पर भारत के दावे को खारिज करता है।

लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल

  • यथास्थिति बनाए रखने के लिए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी टर्म का इस्तेमाल किया जाने लगा। 
  • विवाद यहा पर भी हैं, क्योंकि दोनों देश अपनी अलग-अलग लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल बताते हैं।
  • एलएसी पर कई ग्लेशियर, बर्फ के रेगिस्तान, पहाड़ और नदियां पड़ती हैं।
  • इसके साथ लगने वाले कुछ इलाकों में अक्सर भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव बढ़ता रहता है।

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इन इलाकों में है विवाद

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