नई दिल्ली: भारत के सहयोगी से मारीशस (मॉरीशस) में बने अस्पताल का इस्तेमाल कोरोना के खिलाफ लड़ाई में किया जाएगा। इस अस्पताल का उद्घाटन पिछले साल 3 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (पीएम नरेंद्र मोदी) और मारीशस के पीएम एंटरांड जगन्नाथ (प्रवींद जुगनौत) ने किया था। यह जानकारी भारतीय दूतावास ने WION को दी है।

कोरोनावायरस के बारे में बातचीत करते हुए हमारे ज़ी मीडिया संवाददाता सिद्धांत सिब्बल से भारतीय उच्चायुक्त तन्मय लाल ने कहा, महामारी को रोकने के लिए देश कई पहलुओं पर शानदार कदम उठा रहा है। इसके अलावा उन्होंने एक भारतीय मजदूर के कोरोनाशक्ति होने के बाद तमाम मजूदरों के कोरोना टेस्टिंग और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर मारीशस को शुक्रिया कहा। उन्होंने मारीशस में फंसे एक हजार भारतीयों की वापसी को लेकर भी बात की। ध्यान रहे कि मारीशस ही ऐसा पहलवान देश था, जहाँ भारत की ओर से सबसे पहले हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा भेजी गई थी। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।

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प्रश्न- भारत और मारीशस कोरोना से जंग में किस तरह से तालमेल बैठा रहे हैं? भारत ने हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन भी भीगी है?

जवाब- जैसा कि आप जानते हैं कि भारत और मारीशस के बीच एक विशेष संबंध है। मैत्रीपूर्ण रिश्तों के कारण ही दोनों देशों के बीच पब्लिक हेल्थ कैर मुद्दे पर पुरानी साझेदारी है। कोरोना महामारी पर भी हम साथ काम कर रहे हैं। वर्तमान देशों में से सबसे पहले भारत ने मॉरीशस को दवाइयां भेजी थीं। मॉरीशस सरकार की ओर से बहुत पहले ही हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और अन्य दवाओं को प्रेषक की पारितंत्र की गई थी। 15 अप्रैल को पहली खेप में लगभग 13 टन दवाएं आई थीं। हम इसकी सराहना भी करते हैं।

आपको पता होगा कि पिछले अक्टूबर में प्रधान मनोरंजन जगन्नाथ और प्रधानमंत्री मोदी ने साझेदारी बढ़ाने के लिए मॉरीशस में एक नए अस्पताल का उद्घाटन किया था। वर्तमान में अब इस अस्पताल को कोरोनावायरस से सामना करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा भी हमारे हेल्थकेयर सेक्टर में पार्टनरशिप के कई अन्य उदाहरण हैं। जैसे आयुष और ट्रेडिशनल ड्रग्स के क्षेत्रों में भी हमारी साझेदारी है। इसके अलावा हमने कोविद -19 को लेकर हुई एक ऑफ़लाइन बैठक में भारत सरकार से कहा है कि मॉरीशस में फंसे भारतीयों की सरकार विशेष प्रस्तावों को रख रही है।

सवाल- मारीशस में फंसे अपने नागरिकों तक भारत कैसे पहुंचा है?

जवाब- मारीशस में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक हैं। हमारे आंकड़ों के अनुसार, जिसमें से लगभग 1 हजार लोग भारत लौटन चाहते हैं। यह लोग मुख्यतया हॉस्टल इंटर्न, टूरिस्ट, वर्कर और अन्य कामकाजी लोग हैं। हम लगातार उन कॉलेज और होटलों के संपर्क में हैं, जहां छात्र पढ़ते हैं या फिर इंटर्नशिप कर रहे हैं। इसके अलावा उन कंपनियों से भी संपर्क किया गया है, जहां भारतीय काम करते हैं।

हमारे सहयोगी खुद मॉरीशस में फंसे सैकड़ों भारतीयों के संपर्क में हैं। इसके अलावा भारत में उनके माता-पिता और मकान मालिक से भी संपर्क बना हुआ है, जहां पर इंटर्न, छात्र और टूरिस्ट रह रहे हैं। हमने ड्रग्स, विशेष पास और ट्रांसपोर्ट के अलावा अन्य कई तरह की सुविधाएं दी हैं। हम उनकी मदद के लिए 24 घंटे और दिन दिन काम कर रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया जैसे सैटेलाइट और फेसबुक मैसेजेज को लेकर भी काफी सक्रिय हैं।

जवाब- मॉरीशस के जमीनी हालात कैसे बदल गए?

जवाब- मारीशस एक छोटा द्वीप हैं, जहाँ जनसंख्या अधिक है। देश की अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से टूरिस्ट सेक्टर में और सप्लाई काफी हद तक दूसरों पर निर्भर करती है। हालांकि कोरोना के मद्देनजर मॉरीशस सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय यातायात को रोकने, लॉकडाउन और फिर कर्फ्यू लगाने जैसे ठोस कदम उठाए। महामारी को रोकने के लिए देश हर पहलुओं पर ठोस कदम उठा रहा है। जहां इस महीने के अंत तक देश में लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है, वहीं कुछ स्थानों को सावधानीपूर्वक चरणबद्ध तरीके से खोलने की तैयारी की जा रही है। देश में टेस्ट होते रहेंगे और क्वारंटाइन की तरह नियमों का पालन भी किया जाएगा।

जवाब- क्या हमने मारीशस से कोई भारतीय नियंत्रण मॉडल साझा किया है और भारतीय राजनयिक कैसे काम कर रहे हैं?

जवाब- मैंने खुद भारत में जाकर कई कदमों और हस्तक्षेप योजनाओं की जानकारी मॉरीशस सरकार से साझा की है। इसके अलावा भारत में विशेष रूप से दवाओं और टीके के विकास और चिकित्सा उपकरणों के शोध में रुचि है। मैंने आयुष गाइडलाइंस को भी साझा किया है। हम सोशल मीडिया पर भी लगातार इसे साझा कर रहे हैं। मेरे सहयोगियों के बारे में पूछने के लिए आपका धन्यवाद। महामारी और कर्फ्यू ने हम सभी के लिए एक सीख है। हमसे से ज्यादातर घर से काम कर रहे हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक-दूसरे से लगातार जुड़े रहते हैं। हम में से कई को अपनी ड्यूटी के लिए रोज बाहर निकलना पड़ता है।





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