नई दिल्ली: चीन (China) सालों से भारत (India) के खिलाफ चालबाजी करता आया है. उसके धोखे की लंबी फेहरिस्त है. भारत की बढ़ती ताकत और सामरिक शक्ति चीन को कभी रास नहीं आई है. मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत ने चीन से लगने वाली सीमा के करीब काफी तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया है. यही बात चीन को पच नहीं रही है, इसी की खीझ निकालने के लिए चीन लद्दाख में एक नहीं चार-चार जगहों पर हिंदुस्तान को आंख दिखाने की हिमाकत कर रहा है. 

टाइमलाइन-

– अप्रैल के अंत से लद्दाख के पेंगांग झील के किनारे भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव बढ़ना शुरू हुआ. 

– 5-6 मई को लद्दाख में पेंगांग झील के पास दोनों देशों के सैकड़ों सैनिक इकट्ठा हो गए. दोनों ओर के सैनिकों के बीच झड़प हुई. इस झड़प में दोनों ओर से कई सैनिक घायल हुए. 

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– पेंगांग झील के किनारे झड़प 5 मई की रात से शुरू हुई थी जो 6 मई की सुबह तक चलती रही. झड़प में लोहे की रॉड, डंडों और पत्थरों का भी जमकर इस्तेमाल किया गया. 

– 9 मई को उत्तरी सिक्किम में बॉर्डर के पास चीनी सैनिकों की भारतीय सैनिकों के साथ झड़प हो गई. यहां भी झड़प में दोनों ओर से सैनिक घायल हुए. हालांकि सैन्य स्तर पर मामले को सुलझा लिया गया.

– 12 मई को चीन के हेलिकॉप्टर LAC के पास उड़ान भरते रहे, लेकिन भारत के सुखोई लड़ाकू विमानों ने उन्हें खदेड़ दिया.

– इसी दौरान चीन के सैनिक गलवान घाटी के पास भी इकट्ठा हो गए, उनका जवाब देने के लिए भारतीय सेना के जवान भी डट गए.

– 23 मई को आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने लद्दाख में सीमा का दौरा किया और चीन से तनाव के हालात का जायजा लिया.

– 25 मई को लद्दाख के पेगांग झील और  गलवान घाटी में चीन से तनाव और बढ़ गया.

– 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के हालात पर अहम बैठक की. 

– 26 मई को ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सेना को युद्ध की तैयारी का आदेश दिया. 

अब भारत की रणनीति, कूटनीति और तेवर देखकर चीन बदल गया है और भारत से दोस्ती की दुहाई देते हुए शांति की बात की है. 

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ब्यूरो रिपोर्ट

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