तरनजीत सिंह संधू, डोनाल्ड ट्रम्प (फाइल फोटो)

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अमेरिका में भारतीय राजदूत टीएस संधू ने कहा है कि भारत ने साबित कर दिया है कि कोरोनावायरस महामारी के दौरान पूरी दुनिया में अमेरिका के लिए भारत से मजबूत कोई साझेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट ने अमेरिका को दिखाया कि उसके लिए भारत से बड़ा साझेदार नहीं है।

टीएस संधू ने रविवार को कहा कि अभी तक दोनों देश कम से कम तीन वैक्सीन पर साथ काम कर रहे हैं। संधू ने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और अमेरिका की सीडीसी और एनआईएच कई वर्षों से मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि दो-तीन साल पहले दोनों देशों ने रोटावायरस नाम के अन्य वायरस की वैक्सीन भी विकसित की थी। इससे न केवल भारत और अमेरिका, बल्कि कई अन्य देशों को मदद मिली।

भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत और अमेरिका सप्लाई चैन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारत ने पिछले महीने ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध के बाद मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की खेप वहाँ पर लाइज़ की थी।

उन्होंने कहा कि चीन के बावजूद, भारत एक आकर्षक बनाने वाला है। यह थोड़ा जल्दी है लेकिन कोरोना के बाद के समय में भारत रिकवरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है। मुझे लगता है कि अमेरिकी निवेश और कंपनियां समझदार हैं और वे हमसे जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।

अमेरिका में भारतीय राजदूत टीएस संधू ने कहा है कि भारत ने साबित कर दिया है कि कोरोनावायरस महामारी के दौरान पूरी दुनिया में अमेरिका के लिए भारत से मजबूत कोई साझेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट ने अमेरिका को दिखाया कि उसके लिए भारत से बड़ा साझेदार नहीं है।

टीएस संधू ने रविवार को कहा कि अभी तक दोनों देश कम से कम तीन वैक्सीन पर साथ काम कर रहे हैं। संधू ने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और अमेरिका की सीडीसी और एनआईएच कई वर्षों से मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि दो-तीन साल पहले दोनों देशों ने रोटावायरस नाम के अन्य वायरस की वैक्सीन भी विकसित की थी। इससे न केवल भारत और अमेरिका, बल्कि कई अन्य देशों को मदद मिली।

भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत और अमेरिका सप्लाई चैन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारत ने पिछले महीने ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध के बाद मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की खेप वहाँ पर लाइज़ की थी।

उन्होंने कहा कि चीन के बावजूद, भारत एक आकर्षक बनाने वाला है। यह थोड़ा जल्दी है लेकिन कोरोना के बाद के समय में भारत रिकवरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है। मुझे लगता है कि अमेरिकी निवेश और कंपनियां समझदार हैं और वे हमसे जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।





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