न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
अपडेटेड सन, 10 मई 2020 12:11 PM IST

स्वास्थ्य की जांच करें स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
– फोटो: पीटीआई

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पुणे स्थित मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस अप्रैल की शुरुआत में कोरोनावायरस बीमारी के परीक्षण में इस्तेमाल होने वाली 20 हजार किट्टी की करती है। अब उसने इसका उत्पादन बढ़ाकर दो लाख कर दिया है। ऐसा वह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर कर पा रही है। इससे भरत की टेस्टिंग किट की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा जिसके इस महीने के अंत तक एक लाख पहुंचने की उम्मीद है। अब भारत को विदेश से टेस्ट किट्टी करने की जरूरत नहीं होगी।
मायलैब केंद्रीय ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) से टेस्ट किट का उत्पादन करने के लिए मंजूरी लेने वाली पहली स्थानीय कंपनियों में से एक थी। सीडीएससीओ ने अब छह अन्य कंपनियों को टेस्ट किट बनाने की मंजूरी दी है। यह सभी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मानदंड पर खरे उतरे हैं। वर्तमान में भारत रोजाना आरटी-पीसीआर के जरिए 75,000-80,000 डॉलर की जांच कर रहा है।

मई के अंत तक भारत का लक्ष्य रोजाना एक लाख और की जांच करने की है। अब तक निराशालैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस में 20 राज्यों की लगभग 140 प्रयोगशालाएं और अस्पताल 650,000 टेस्ट किटों और उत्पादों की आपूर्ति हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदार पूनावाला ने कहा, ‘निराशामब के साथ मिलकर हमारे प्रयासों को देखने मुझे अभिभूत करता है जिससे भारत को विभाजित -19 का मुकाबला करने में आत्मनिर्भर हो रहा है। हमारा उत्पादन रोजाना 20 हजार से बढ़कर दो लाख हो गया है। अब हम भारत की बढ़ती मांग को पूरा करेंगे। ‘

पिछले महीने सीरम इंडिया ने निराशालैब के साथ साझेदारी की थी ताकि उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सके। कंपनी ने ब्रिटेन में नैदानिक ​​परीक्षणों में उपयोग होने वाले टीकों का निर्माण शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास आरटी-पीसीआर का उत्पादन करने वाली छह अन्य कंपनियां हैं। इसके साथ ही हम इन किटों का एक्स तक करने में सक्षम हैं।

मुंबई की मेरिल डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने टेस्ट किट का निर्माण शुरू कर दिया है और उसके पास स्टॉक में दो लाख किट्टी हैं। दिल्ली की मेड यूनिट ओजोन बायोमेडिक्लस प्राइवेट लिमिटेड ने भी किट का निर्माण बढ़ा दिया है। राज्यों से भी किटों की मांग बढ़ रही है। खासतौर से रैपिड टेस्ट किट्स को लेकर जिससे खून में मौजूद कैंसर की जांच की जाती है।

पुणे स्थित मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस अप्रैल की शुरुआत में कोरोनावायरस बीमारी के परीक्षण में इस्तेमाल होने वाली 20 हजार किट्टी की करती है। अब उसने इसका उत्पादन बढ़ाकर दो लाख कर दिया है। ऐसा वह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर कर पा रही है। इससे भरत की टेस्टिंग किट की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा जिसके इस महीने के अंत तक एक लाख पहुंचने की उम्मीद है। अब भारत को विदेश से टेस्ट किट्टी करने की जरूरत नहीं होगी।

मायलैब केंद्रीय ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) से टेस्ट किट का उत्पादन करने के लिए मंजूरी लेने वाली पहली स्थानीय कंपनियों में से एक थी। सीडीएससीओ ने अब छह अन्य कंपनियों को टेस्ट किट बनाने की मंजूरी दी है। यह सभी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मानदंड पर खरे उतरे हैं। वर्तमान में भारत रोजाना आरटी-पीसीआर के जरिए 75,000-80,000 डॉलर की जांच कर रहा है।

मई के अंत तक भारत का लक्ष्य रोजाना एक लाख और की जांच करने की है। अब तक निराशालैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस में 20 राज्यों की लगभग 140 प्रयोगशालाएं और अस्पताल 650,000 टेस्ट किटों और उत्पादों की आपूर्ति हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदार पूनावाला ने कहा, ‘निराशामब के साथ मिलकर हमारे प्रयासों को देखने मुझे अभिभूत करता है जिससे भारत को विभाजित -19 का मुकाबला करने में आत्मनिर्भर हो रहा है। हमारा उत्पादन रोजाना 20 हजार से बढ़कर दो लाख हो गया है। अब हम भारत की बढ़ती मांग को पूरा करेंगे। ‘

पिछले महीने सीरम इंडिया ने निराशालैब के साथ साझेदारी की थी ताकि उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सके। कंपनी ने ब्रिटेन में नैदानिक ​​परीक्षणों में उपयोग होने वाले टीकों का निर्माण शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास आरटी-पीसीआर का उत्पादन करने वाली छह अन्य कंपनियां हैं। इसके साथ ही हम इन किटों का एक्स तक करने में सक्षम हैं।

मुंबई की मेरिल डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने टेस्ट किट का निर्माण शुरू कर दिया है और उसके पास स्टॉक में दो लाख किट्टी हैं। दिल्ली की मेड यूनिट ओजोन बायोमेडिक्लस प्राइवेट लिमिटेड ने भी किट का निर्माण बढ़ा दिया है। राज्यों से भी किटों की मांग बढ़ रही है। खासतौर से रैपिड टेस्ट किट्स को लेकर जिससे खून में मौजूद कैंसर की जांच की जाती है।





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