बहुत जल्द, Covid 19 संक्रमण आयुर्वेद के साथ इलाज किया जाएगा, Icmr भी इसके परिणामों की पुष्टि करता है! – जल्द ही कोविद -19 संक्रमण का आयुर्वेद से उपचार, नतीजे पर ICMR ने भी लगाई मुहर!

Bytechkibaat7

May 6, 2020 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


ख़बर सुनता है

कई राज्यों ने थक हार कर आयुर्वेद को अपनााना शुरू कर दिया। अहमदाबाद में पुलिस प्रशासन ने राजस्थान के चुर शहर से को विभाजित -19 संक्रमण से निपटने के लिए काढ़ा मंगवाया तो भीलवाड़ा के जिलाधिकारी और राजस्थान सरकार ने भी इसी तरह की पहल शुरू कर दी है।

पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में भी अब का का का का जोर चल रहा है। लिंग से ही सही केंद्र सरकार भी इस तरह पर आई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय की पहल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हस्तक्षेप किया। जेएलएन शास्त्री के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था।

टास्क फोर्स अब इसके पक्ष में है कि कोविड -19 संक्रमण का ईलाज आयुर्वेद की पद्धति से किया जाए।

सकारात्मक परिणामजे आने की उम्मीद

डा। जेएलएन शास्त्री ने जानकारी दी कि 20 हजार 55 घंटे काम करके डा। भूषण पटवर्धन सहित अन्य के साथ गाइड लाइन तैयार कर ली गई है। आयुर्वेदिक पद्धति से कोविड -19 के संक्रमण का ईलाज करने का प्रोटोकॉल भी तैयार हो चुका है।

डा। शास्त्री बताते हैं कि इसमें आईसीएमआर, सीएसआर जैसी भारत सरकार की संस्था शामिल है। डा। शास्त्री इसको लेकर हुए डेल के सवाल पर कहते हैं कि पहले तो आयुर्वेद या आयुष पद्धति से ही छुआछूत किया जा रहा था।

लोग इसे कोविड -19 के संक्रमण के ईलाज से बाहर रख रहे थे। सरकार ने ही टास्क फोर्स बनाने में लिंग की। दो अप्रैल को इसके बारे में निर्णय लिया गया, इसके बाद युद्ध स्तर पर काम हुआ। उनका दावा है कि आयुष पद्धति में को विभाजित -19 संक्रमण का प्रभावी ईलाज है। इसके प्रयोग से जल्द ही देश में सकारात्मक परिणामजे में आयांगे।

सभी ज्वरहर चूर्ण की अहमदाबाद को भी जरूरत है

श्री भंवर लाल दूगड़ विश्वभारती रसायनशाला ने सर्व ज्वरहर चूर्ण बनाया है। इसकी रेटिंग और गुजरात के अहमदाबाद में काफी मांग है। चूरू जिले के गांधी विद्या मंदिर, सरदार शहर में स्थित इस रसायनशाला के चूर्ण को संरक्षित आयुर्वेद की मान्यता प्राप्त है।

उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रसायनशाला के अधिकारी इस चूर्ण को हर तरह के विषाणु (वायरस) से होने वाले ज्वर का नाशक बता रहे हैं। आयुष मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कई राज्य में इस तरह का अलग-अलग प्रयोग चल रहा है।

डा। जेएलएन शास्त्री ने कहा कि कुछ राज्य इसे दवा के रूप में अपनाने लगे हैं, लेकिन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और आयुष पद्धति के विशेषज्ञों, आईसीएमआर और एनएमआर की निगरानी में अब इसके प्रमाणिक ईलाज पर मुहर लगने जा रही है।

प्रयोग के बाद तैयार हो रहा है ईलाज में आयुर्वेद का प्रयोग

सूत्र बताते हैं कि आईसीएमआर के सहयोग से आयुष विशेषज्ञों ने एर्नाकुलम ड्रग का प्रयोग को विभाजित -19 के भिन्ननों पर किया है। इसके बहुत उत्साहजनक परिणाम आए हैं। इसके बाद ICMR ने भी इस पर अपनी मुहर लगाई है।

माना जा रहा है कि यह ईलाज के प्रभावी रूप में सामने आने के बाद आप पूरी दुनिया में आयुष पद्धति का डंका बज सकता है। डा। जेएलएन शास्त्री कहते हैं कि कुछ घंटे इंतजार करेंगे। आपको खुद काफी कुछ पता चल जाएगा।

सरकार के आईएएस अफसर क्या जानें आयुर्वेद का महत्व: बरनी बाबा

महरौली स्थिति प्रचीन शक्तियोग पीठ मंदिर के प्रमुख रामजीदास (रजनी बाबा) स्वयं भस्म, रसायन, अवलेह, आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के मर्मज्ञ है। बरनी बाबा का कहना है कि जीवाणु, विषाणु या किसी भी कीट से होने वाले रोग को लेकर आयुर्वेद में काफी प्रभावी उपाय हैं।

आयुष पद्धति से गंभीर से गंभीर बीमारियों का ईलाज किया जा सकता है। बेटनी बाबा का कहना है कि देश आईएएस अफसर चलाते हैं। जो अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान पद्धति पर ही निर्भर करते हैं। इसलिए वे आयुष के महत्व की जानकारी नहीं है। केंद्र सरकार को इस ओर पहले ध्यान देना चाहिए था।

सार

  • आयुर्वेदिक पद्धति से कोविड -19 के संक्रमण का ईलाज करने का प्रोटोकॉल भी तैयार है
  • चूरू जिले की श्री भंवर लाल दूगड़ विश्वभारती रसायनशाला ने सर्व ज्वरहर चूर्ण बनाया
  • चर्न हर तरह के विषाणु (वायरस) से होने वाले ज्वर का नाशक
  • पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में भी अब एलायंस की मांग है

विस्तार

कई राज्यों ने थक हार कर आयुर्वेद को अपनााना शुरू कर दिया। अहमदाबाद में पुलिस प्रशासन ने राजस्थान के चुर शहर से को विभाजित -19 संक्रमण से निपटने के लिए काढ़ा मंगवाया तो भीलवाड़ा के जिलाधिकारी और राजस्थान सरकार ने भी इसी तरह की पहल शुरू कर दी है।

पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में भी अब का का का का जोर चल रहा है। लिंग से ही सही केंद्र सरकार भी इस तरह पर आई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय की पहल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हस्तक्षेप किया। जेएलएन शास्त्री के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था।

टास्क फोर्स अब इसके पक्ष में है कि कोविड -19 संक्रमण का ईलाज आयुर्वेद की पद्धति से किया जाए।

सकारात्मक परिणामजे आने की उम्मीद

डा। जेएलएन शास्त्री ने जानकारी दी कि 20 हजार 55 घंटे काम करके डा। भूषण पटवर्धन सहित अन्य के साथ गाइड लाइन तैयार कर ली गई है। आयुर्वेदिक पद्धति से कोविड -19 के संक्रमण का ईलाज करने का प्रोटोकॉल भी तैयार हो चुका है।

डा। शास्त्री बताते हैं कि इसमें आईसीएमआर, सीएसआर जैसी भारत सरकार की संस्था शामिल है। डा। शास्त्री इसको लेकर हुए डेल के सवाल पर कहते हैं कि पहले तो आयुर्वेद या आयुष पद्धति से ही छुआछूत किया जा रहा था।

लोग इसे कोविड -19 के संक्रमण के ईलाज से बाहर रख रहे थे। सरकार ने ही टास्क फोर्स बनाने में लिंग की। दो अप्रैल को इसके बारे में निर्णय लिया गया, इसके बाद युद्ध स्तर पर काम हुआ। उनका दावा है कि आयुष पद्धति में को विभाजित -19 संक्रमण का प्रभावी ईलाज है। इसके प्रयोग से जल्द ही देश में सकारात्मक परिणामजे में आयांगे।

सभी ज्वरहर चूर्ण की अहमदाबाद को भी जरूरत है

श्री भंवर लाल दूगड़ विश्वभारती रसायनशाला ने सर्व ज्वरहर चूर्ण बनाया है। इसकी रेटिंग और गुजरात के अहमदाबाद में काफी मांग है। चूरू जिले के गांधी विद्या मंदिर, सरदार शहर में स्थित इस रसायनशाला के चूर्ण को संरक्षित आयुर्वेद की मान्यता प्राप्त है।

उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रसायनशाला के अधिकारी इस चूर्ण को हर तरह के विषाणु (वायरस) से होने वाले ज्वर का नाशक बता रहे हैं। आयुष मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कई राज्य में इस तरह का अलग-अलग प्रयोग चल रहा है।

डा। जेएलएन शास्त्री ने कहा कि कुछ राज्य इसे दवा के रूप में अपनाने लगे हैं, लेकिन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और आयुष पद्धति के विशेषज्ञों, आईसीएमआर और एनएमआर की निगरानी में अब इसके प्रमाणिक ईलाज पर मुहर लगने जा रही है।

प्रयोग के बाद तैयार हो रहा है ईलाज में आयुर्वेद का प्रयोग

सूत्र बताते हैं कि आईसीएमआर के सहयोग से आयुष विशेषज्ञों ने एर्नाकुलम ड्रग का प्रयोग को विभाजित -19 के भिन्ननों पर किया है। इसके बहुत उत्साहजनक परिणाम आए हैं। इसके बाद ICMR ने भी इस पर अपनी मुहर लगाई है।

माना जा रहा है कि यह ईलाज के प्रभावी रूप में सामने आने के बाद आप पूरी दुनिया में आयुष पद्धति का डंका बज सकता है। डा। जेएलएन शास्त्री कहते हैं कि कुछ घंटे इंतजार करेंगे। आपको खुद काफी कुछ पता चल जाएगा।

सरकार के आईएएस अफसर क्या जानें आयुर्वेद का महत्व: बरनी बाबा

महरौली स्थिति प्रचीन शक्तियोग पीठ मंदिर के प्रमुख रामजीदास (रजनी बाबा) स्वयं भस्म, रसायन, अवलेह, आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के मर्मज्ञ है। बरनी बाबा का कहना है कि जीवाणु, विषाणु या किसी भी कीट से होने वाले रोग को लेकर आयुर्वेद में काफी प्रभावी उपाय हैं।

आयुष पद्धति से गंभीर से गंभीर बीमारियों का ईलाज किया जा सकता है। बेटनी बाबा का कहना है कि देश आईएएस अफसर चलाते हैं। जो अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान पद्धति पर ही निर्भर करते हैं। इसलिए वे आयुष के महत्व की जानकारी नहीं है। केंद्र सरकार को इस ओर पहले ध्यान देना चाहिए था।





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