ललित मलिंगा कैसे बने इतने बड़े क्रिकेटर?

श्रीलंका के तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा (लसिथ मलिंगा) ने 17 साल की उम्र में लेदर की गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू किया लेकिन इसके बावजूद वे इतनी जल्दी दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाज बन गए। जानिए हमारी इस विशेष रिपोर्ट में

नई दिल्ली। एक पहलवान जो धीमे-धीमे दौड़ता हुआ आता है। कुछ अजीब तरीके से हाथ घुमाता है और अचानक आगंतुक के स्टम्प्स उड़ा देता है। अगर ये तीन वाक्य कोई आपको कहे तो यकीनन आपके मुंह से एक ही नाम निकलेगा …. लसिथ मलिंगा (लसिथ मलिंगा)। श्रीलंका का ये गेंदबाज यॉर्कर किंग और स्लिंगा मलिंगा नाम से प्रसिद्ध है। मलिंगा वो गेंदबाज हैं जिनके पास भी हैं और धार भी हैं। यही कारण है कि दाएं हाथ के इस गेंदबाज ने एक नहीं, दो नहीं बल्कि 4-4 बार हैट्रिक लेने का कारनामा किया है। मलिंगा ने अपने पूरे क्रिकेट करियर (फर्स्ट क्लास, लिस्ट ए, टी 20) में कुल 1093 विकेट झटके हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट की बात करें तो मलिंगा के नाम टेस्ट में 101, वनडे में 338 और टी 20 में 107 विकेट हैं। गजब की बात ये है कि लसिथ मलिंगा ने 17 साल की उम्र में पहली बार लेदर की गेंद पकड़ी थी और इसके बावजूद उन्होंने बेहद कम समय में घरेलू क्रिकेट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया। आखिर मलिंगा की कहानी क्या है? मलिंगा के क्रिकेट करियर का टर्निंग पॉइंट क्या है? जानिए हमारी इस रिपोर्ट में।

मलिंगा की शुरुआत

लसिथ मलिंगा (लसिथ मलिंगा) का जन्म गॉल के रतगमा में हुआ था। तीन मुसलमानों में मलिंगा दूसरे नंबर पर थे। उनके पिता एक बस मैकेनिक थे, वहीं माँ एक ग्रामीण बैंक में काम करती थी। लसिथ मलिंगा ने क्रिकेट खेलने की शुरुआत 13 साल की उम्र में की थी। ये वो उम्र है जब बड़े-बड़े क्रिकेटर्स अपने जिले या राज्य की टीमों की एंट्री करने लगते हैं। गॉल के रतगमा में जन्मे मलिंगा समंदर किनारे क्रिकेट खेलने जा रहे थे। समंदर की रेत पर वो टेनिस बॉल से खेलते थे। अब चूंकि रेत पर टेनिस की गेंद उछलती नहीं है तो मलिंगा अपने अजीबोगरीब एक्शन से दंत चिकित्सक तक तेजी से गेंद पहुंचाने की कोशिश करते थे।

मलिंगा के करियर का टर्निंग पॉइंटमहेद कॉलेज के लिए खेलने से पहले मलिंगा (लसिथ मलिंगा) गॉल क्रिकेट क्लब में क्रिकेट सीखने गए थे। वहां श्रीलंका के पूर्व तेज गेंदबाज चंपका रामानायके कोच थे। वो वहाँ की टीम से बतौर खिलाड़ी भी खेलते थे। एक दिन चंपका की गर्दन में मोच आ गई और मलिंगा को मैच में खेलने के लिए कहा गया। 17 साल के मलिंगा का ये लेदर की बॉल से पहला मैच था। मलिंगा के हाथ में अब टेनिस की जगह लेदर बॉल थी। हालांकि इससे उनकी गेंदबाजी में कोई फर्क नहीं पड़ा और उन्होंने उस मैच में 8 विकेट लिए।

कोच चंपक रामानायके समझ गए कि उन्हें मलिंगा (लसिथ मलिंगा) के तौर पर एक हीरा मिल चुका है। चंपक ने मलिंगा को तीन महीने तक ट्रेनिंग दी। उन्होंने मलिंगा को और अधिक सटीक गेंदबाज बनाने के लिए उन्हें विशेष अंजज में कड़ी मेहनत की। उन्होंने कुछ निश्चित स्थानों में ही गेंद फेंकने को कहा और मलिंगा ने अपने अजीब एश से उन कर को भी दिखाया। इसके बाद चंपक रामानायके ने उनका हाथ सीधा करने की कोशिश की लेकिन इसके बाद मलिंगा की गति बिलकुल कम हो गई। रामानायके समझ गए और उसके बाद उन्होंने मलिंगा के एनेस से बिलकुल छेड़छाड़ नहीं की।

कॉलेज में मलिंगा की एंट्री

मलिंगा (लसिथ मलिंगा) जब 17 साल के हुए तो उन्होंने विडालोका कॉलेज में एडमिशन लिया। मलिंगा ने पहली बार लेदर की गेंद हाथ में ली। उनका ऐज अजीब था, वो अपने शरीर के काफी दूर से गेंद फेंकते थे जिसका मलिंगा को फायदा मिला। मलिंगा ने अपनी पारी से दूसरे ही मैच नेलुवा कॉलेज के खिलाफ 6 विकेट लिए। इसके मुकाबले में कीर्ति धनप्रिया अंपायरिंग कर रहे थे जो कि महेड कॉलेज के प्रिंसिपल भी थे। मलिंगा की गेंदबाजी ने धनप्रिया को हैरान कर दिया और उन्होंने मलिंगा को महेड कॉलेज जॉइन करने का ऑफर दिया। मलिंगा ने इस ऑफर को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया क्योंकि महेड कॉलेज अपने क्रिकेट की वजह से जाना जाता था।

श्री के आगंतुक डर कर भागे!

मलिंगा (लसिथ मलिंगा) ने कॉलेज क्रिकेट में जैसे धूम ही मचा दी। उन्होंने हर मैच में विकेटों का अंबार लगा दिया। ये खबर श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड तक पहुंच गई और 2001 में मलिंगा को श्रीलंका क्रिकेट टीम के साथ नेट प्रैक्टिस के लिए बुलाया गया। मलिंगा ने अपनी गेंदबाजी से श्रीलंका के बल्लेबाजों को बुरी तरह से डरा दिया। श्री के दंत चिकित्सकों को मलिंगा की गेंद तक नहीं दिख रही थी। उनका अजीबोगरीब एनेस उन्हें बेहद खतरनाक बना रहा था। मलिंगा की यॉर्कर ने इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले बल्लेबाजों की नाक में दम कर दिया और अंत में उन्होंने मलिंगा को खेलने से ही इनकार कर दिया। इस घटना के बाद मलिंगा पूरे श्री में प्रसिद्ध हो गए।

मलिंगा का बेमिसाल डेब्यू

श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने बिलकुल देरी ना करते हुए मलिंगा (लसिथ मलिंगा) को ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए चुना। डार्विन की तस्वीर पर मलिंगा ने जैसे कहर ही मचा दिया। मलिंगा ने पहली पारी में दो विकेट हासिल किए। उन्होंने डैरेन लेहमन और एडम गिलक्रिस्ट के बड़े विकेट झटके। अगली पारी में मलिंगा ने चार विकेट लिए जिसमें डामियन मार्टिन, डैरेन लेहमन, शेन वॉर्न और मार्कस कास्प्रोविच के विकेट शामिल थे। हालांकि श्रीलंका को टेस्ट मैच 149 रनों से हार गए लेकिन मैच के बाद एडम गिलक्रिस्ट एक स्टंप के साथ श्रीलंका के ड्रेसिंग रूम में चले गए और उन्होंने मलिंगा वो स्टंप दिया। गिलक्रिस्ट भी समझ गए थे कि क्रिकेट की दुनिया में एक ऐसा गेंदबाज आ चुका है जो बल्लेबाजों की नाक में दम करने वाला है। इसके बाद मलिंगा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मलिंगा के रिकॉर्ड इसकी तस्दीक करते हैं। श्रीलंका क्रिकेट इतिहास में अगर आप झगड़ेंगे तो आपको शायद ही मलिंगा जैसा खतरनाक तेज गेंदबाज मिलेगा, जिसके सामने बल्लेबाज के पांव कांप रहे हैं।

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प्रथम प्रकाशित: 11 मई, 2020, शाम 5:45 बजे IST


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