अमेरिका में प्रदर्शन
– फोटो : पीटीआई

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मौजूदा हाल में अमेरिका दो बड़े मुद्दों की वजह से चर्चा में है। एक तो अमेरिका में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले हैं और मौत का आंकड़ा भी वहां सबसे ज्यादा है। वहीं दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा है जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका के कई शहरों में भड़के दंगे। अमेरिका में शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुए प्रदर्शनों ने दंगों का रूप बहुत जल्द ले लिया था।

अमेरिका में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या जल्द ही 20 लाख के पार हो जाएगी और 1,12,000 से ज्यादा लोग कोविड-19 की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। इस सबके बीच जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या और सड़कों पर निकले प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य महकमे को सकते में डाल दिया था। अश्वेत अमेरिकन जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन पर मिनीपोलिस के पुलिस अधिकारी ने करीब आठ मिनट तक अपना घुटना रखा जिससे जॉर्ज को सांस लेने में दिक्कत हुई और अस्पताल में भर्ती करने के दौरान उसकी मौत हो गई।

जॉर्ज की मौत के बाद सैकड़ों लोग अमेरिका की सड़कों पर उतरे थे और पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे। धीरे-धीरे इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप लिया और कई जगहों पर आगजनी और पुलिस की कारों पर पथराव हुआ। यहां आप पढ़ें कि अमेरिका के इतिहास में अब तक के पांच बड़े नस्लभेदी प्रदर्शन कब-कब हुए।

अमेरिका के सिनसिनाटी में साल 2001 में हुए दंगे में 800 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस दंगे का कारण यह था कि सिनसिनाटी में अलग-अलग अंतराल में होने वाली घटनाओं में बार-बार युवा अश्वेत पुलिसकर्मियों की गोली से मारे जा रहे थे। 19 साल का टिमोथी थॉमस 1995 से उस समय तक मारे जाने वाला 15वां व्यक्ति था।

टिमोथी थॉमस को एक श्वेत पुलिसकर्मी ने गोली मारी थी। ऐसी घटनाओं से रोष में आए अश्वेतों ने प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद लोगों ने पुलिस पर हमला किया और दुकानें लूटीं। चार दिन चले दंगों के बाद रात के कर्फ्यू से स्थित काबू में आई। फिर भी टिमोथी को मारने वाले पुलिसकर्मी को बरी कर दिया गया।

लॉस एंजिलिस में एक वीडियो लगातार दिखाया जाता रहा, जिसमें पुलिस अश्वेत रॉडनी किंग को लगातार डंडे से मार रही है। एक व्यक्ति इस घटना का वीडियो ले रहा था। इस मामले की सुनवाई श्वेत अमेरिकी ज्यूरी ने की और श्वेत पुलिसकर्मी को बरी कर दिया गया।

अमेरिका में श्वेत ज्यूरी के इस फैसले के बाद 20वीं सदी के सबसे बुरे दंगे शुरू हुए। इन दंगों में करीब 50 लोग मारे गए और 2,000 लोग घायल हुए। यही नहीं अमेरिका में उस दौरान दंगों की वजह से करीब एक अरब डॉलर का नुकसान हुआ था।

साल 1980 में अमेरिका की एक अदालत ने चार श्वेत पुलिसकर्मियों को निर्दोष करार दिया था। इन पुलिस कर्मियों ने एक अश्वेत बाइक चालक को रेड लाइट क्रॉस करने पर इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद लिबर्टी सिटी में विरोध प्रदर्शन हुए जिन्होंने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया। लिबर्टी सिटी में हुए दंगों में 18 मौतें हुईं थीं और चार सौ के करीब लोग घायल हुए थे। इस दौरान अमेरिका को दस करोड़ डॉलर की हानि हुई थी।

चार अप्रैल 1968 को अश्वेतों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले मार्टिन लूथर किंग की जब हत्या हुई तो अमेरिका के कई शहरों में हिंसा भड़की। इन दंगों में 36 लोगों की मौत हुई और करीब दो हजार लोग घायल हुए थे। सबसे ज्यादा हिंसा शिकागो, बाल्टिमोर और वॉशिंगटन में हुई। वॉशिंगटन में तो मार्टिन लूथर किंग की हत्या के कुछ ही समय बाद ही दंगे शुरू हो गए थे। उस समय इन दंगों को रोकने के लिए अमेरिका में दस हजार सैनिक तैनात करने पड़े थे।

23 जुलाई को डेट्रॉयट में शुरू हुए दंगे का कारण था एक अवैध बार में छापा। उस समय दो वियतनामी पार्टी कर रहे थे। पुलिस ने बार में मौजूद सभी 80 लोगों को गिरफ्तार करने की कोशिश की, जिसके बाद हिंसा शुरू हो गई। पांच दिन चले दंगों के बाद 43 लोगों की जान गई और एक हजार घायल हुए। इन दंगों के दौरान सात हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सार

  • मौजूदा दौर में दो बड़े कारणों की वजह से अमेरिका सुर्खियों में
  • अमेरिका में कोरोना संक्रमित मामले 20 लाख के पास
  • जॉर्ज फ्लॉएड की हत्या के बाद अमेरिका में भड़के दंगे

विस्तार

मौजूदा हाल में अमेरिका दो बड़े मुद्दों की वजह से चर्चा में है। एक तो अमेरिका में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले हैं और मौत का आंकड़ा भी वहां सबसे ज्यादा है। वहीं दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा है जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका के कई शहरों में भड़के दंगे। अमेरिका में शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुए प्रदर्शनों ने दंगों का रूप बहुत जल्द ले लिया था।

अमेरिका में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या जल्द ही 20 लाख के पार हो जाएगी और 1,12,000 से ज्यादा लोग कोविड-19 की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। इस सबके बीच जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या और सड़कों पर निकले प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य महकमे को सकते में डाल दिया था। अश्वेत अमेरिकन जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन पर मिनीपोलिस के पुलिस अधिकारी ने करीब आठ मिनट तक अपना घुटना रखा जिससे जॉर्ज को सांस लेने में दिक्कत हुई और अस्पताल में भर्ती करने के दौरान उसकी मौत हो गई।

जॉर्ज की मौत के बाद सैकड़ों लोग अमेरिका की सड़कों पर उतरे थे और पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे। धीरे-धीरे इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप लिया और कई जगहों पर आगजनी और पुलिस की कारों पर पथराव हुआ। यहां आप पढ़ें कि अमेरिका के इतिहास में अब तक के पांच बड़े नस्लभेदी प्रदर्शन कब-कब हुए।

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