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साल के छह महीने भी पारित नहीं हुए हैं कि कोरोना और तूफान अम्फान के बाद अब एक और बड़ा संकट देश के सामने है। मूल्यांकन में घुसीं टिड्डियां अब देश के दूसरे हिस्सों की ओर बढ़ रही हैं। इस पाकिस्तानी हमले का निशाना अब यूपी, पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश हैं। आमतौर पर जून-जुलाई में आने वालीं ये टिड्डियां अपनी राह में आने वाली सारी फसलें चट करते हुए दिल्ली की ओर से हो रही हैं।

ध्रियों के दौर वाले इस महीने में टिड्डियां जहां की तरफ हवा चली गई, वहीं एक-एक दिन में 200-200 किलोमीटर तक तेजी से आगे बढ़ती चली गई। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार फसलों और सब्जियों को इनसे हरियाली है। मंत्रालय ने सभी राज्यों को खोजने के लिए भी जारी किया है। इनकी वजह से सिर्फ मूल्यांकन में बीते वर्ष 1000 करोड़ का नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार इस बार इनका लगान और बड़ा रहना की आशंका है। ऐसे में पहले से ही संकट झेल रहे किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है।

टिड्डी समूह रेज में जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर से दाखिल होकर अब दौसा, सवाईमाधोपुर, करौली और धौलपुर तक पहुंच गए हैं। दो दिन पूर्व टिड्डियों का अत्यधिक बड़ा दल शिवाड़ क्षेत्र में दो दलों में बंट गया था। एक दल इंद्रगढ़ लाखेरी की ओर से, तो दूसरा दल बनास नदी की ओर से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर बड़ता। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि ये कीट एक बार इलाके में घुस गए तो इनका प्रकोप कम से कम तीन साल तक रहेगा। उनके अंडों से करोड़ों की तादाद में टिड्डियां बढ़ेंगी।

पर्यावारण मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा को भी जारी किया

  • जर्नी के साथ एक दिन में 200 किलोमीटर तक आगे बढ़ीं टिड्डियां
  • सिर्फ रेटेड में बीते साल किया गया था 1000 करोड़ का नुकसान

आगरा में भी प्रकट
आगरार में किसानों को सतर्क रहने को कहा गया है। हालाँकि यह भी कहा गया है कि तुरंत कोई चिंता की बात नहीं है। इससे पहले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बगापत, हापुड़, मथुरा, गाजियाबाद, और अलीगढ़ में भी समीक्षा जारी की गई थी।

रेज में घुसने के बाद टिड्डियां लगातार हवा के साथ बह रही हैं, ये पर नियंत्रण केवल हो सकता है, जब यह जमीन बैठ जाती है। रात को ये पर कीटनाशक स्ट्रोकका जा रहा है, लेकिन पीछे से फिर उतनी ही संख्या में टिड्डी आ रहे हैं। अफ्रीका, ईरान, भूमध्य सागर के देशों में बड़ी संख्या में टिड्डियों के प्रजनन के समाचार भी आ रहे हैं।

इस साल जल्दी प्रवेश होगा
पाकिस्तान से टिड्डियों की दल राजस्थान, हरियाणा और मध्यप्रदेश में प्रवेश कर चुका है। इससे कपास की फसल और सब्जियों को भारी नुकसान का अंदेशा है। रेटेड सबसे ज्यादा प्रभावित अवस्था है। इस साल टिड्डियों का दल जल्दी आ गया है। आम तौर पर ये जून-जुलाई में आते हैं। सभी राज्य इन पर नियंत्रण के लिए अलग-अलग प्रयास कर रहे हैं। -प्रवक्ता, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

सार

पाकिस्तान से आया इस संकट ने दी यूपी और एमपी की सीमा पर दस्तक दी है। राह में आने वाली फसलोंें चट करते हुए टिड्डियों का दल दिल्ली की ओर बढ़ रहा है।

विस्तार

साल के छह महीने भी पारित नहीं हुए हैं कि कोरोना और तूफान अम्फान के बाद अब एक और बड़ा संकट देश के सामने है। मूल्यांकन में घुसीं टिड्डियां अब देश के दूसरे हिस्सों की ओर बढ़ रही हैं। इस पाकिस्तानी हमले का निशाना अब यूपी, पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश हैं। आमतौर पर जून-जुलाई में आने वालीं ये टिड्डियां अपनी राह में आने वाली सारी फसलें चट करते हुए दिल्ली की ओर से हो रही हैं।

ध्रियों के दौर वाले इस महीने में टिड्डियां जहां की तरफ हवा चली गई, वहीं एक-एक दिन में 200-200 किलोमीटर तक तेजी से आगे बढ़ती चली गई। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार फसलों और सब्जियों को इनसे हरियाली है। मंत्रालय ने सभी राज्यों को खोजने के लिए भी जारी किया है। इनकी वजह से सिर्फ मूल्यांकन में बीते वर्ष 1000 करोड़ का नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार इस बार इनका लगान और बड़ा रहना की आशंका है। ऐसे में पहले से ही संकट झेल रहे किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है।

टिड्डी समूह रेज में जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर से दाखिल होकर अब दौसा, सवाईमाधोपुर, करौली और धौलपुर तक पहुंच गए हैं। दो दिन पूर्व टिड्डियों का अत्यधिक बड़ा दल शिवाड़ क्षेत्र में दो दलों में बंट गया था। एक दल इंद्रगढ़ लाखेरी की ओर से, तो दूसरा दल बनास नदी की ओर से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर बड़ता। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि ये कीट एक बार इलाके में घुस गए तो इनका प्रकोप कम से कम तीन साल तक रहेगा। उनके अंडों से करोड़ों की तादाद में टिड्डियां बढ़ेंगी।

पर्यावारण मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा को भी जारी किया

  • जर्नी के साथ एक दिन में 200 किलोमीटर तक आगे बढ़ीं टिड्डियां
  • सिर्फ रेटेड में बीते साल किया गया था 1000 करोड़ का नुकसान

आगरा में भी प्रकट
आगरार में किसानों को सतर्क रहने को कहा गया है। हालाँकि यह भी कहा गया है कि तुरंत कोई चिंता की बात नहीं है। इससे पहले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बगापत, हापुड़, मथुरा, गाजियाबाद, और अलीगढ़ में भी समीक्षा जारी की गई थी।


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