रिपोर्टर डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
अपडेटेड सत, 09 मई 2020 05:54 PM IST

सांकेतिक चित्र
– फोटो: पेक्सेल्स

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पश्चिम बंगाल में दक्षिण कोलकाता के रहने वाले निताईदास मुखर्जी (52) कोरोनावायरस से विकृत हुए थे। मुखर्जी 38 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद कोरोनावायरस से मुक्त हुए हैं। उनके अस्पताल से घर वापसी पर उनके पड़ोसियों ने उनकी किसी हूर की तरह स्वागत किया। माना जा रहा है कि वह देश के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने इतने लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद कोरोना मुक्त हुए हैं।

चिकित्सकों ने कहा कि यह अस्पताल के अधिकारियों के लिए एक बेहतरीन उपलब्धि है और यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। चिकित्सकों ने कहा कि किसी को विभाजित -19 के मरीज को बहुत दिन वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है तो उसके बचने की संभावना बहुत कम होती है। अस्पताल ने एक बयान में कहा, ‘उन्होंने (निताईदास मुखर्जी) देश में पहले ऐसे व्यक्ति होने का रिकॉर्ड बनाया है जो 38 जिन कर वेंटिलेटर पर रहा हो और उसके बाद भी कोविड -19 से ठीक हो गए हों।’

सोमवार को अस्पताल से घर वापस लौटे मुखर्जी ने कहा, ‘मैं अस्पताल और चिकित्सकों को धन्यवाद देता हूं जो मुझे नया जीवन दिया। आप कह सकते हैं कि यह मेरा दूसरा जीवन है। उनके बिना, अब तक मेरी मृत्यु हो चुकी है। वे असली हूर हैं। ‘ हालांकि, मुखर्जी अभी भी शारीरिक रूप से काफी कमजोर हैं।

मुखर्जी की पत्नी अपराजिता मुखर्जी ने बताया कि कोरोनावायरस जैसे लक्षण सामने आने पर मुखर्जी को 29 मार्च को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर उन्हें उसी रात वेंटिलेटर पर रख दिया गया था। अगले दिन उनकी कोरोना जांच पॉजिटिव आई थी।

अपराजिता ने कहा, ‘उनकी हालत और बिगड़ी तो डॉक्टरों ने एक सर्जरी की। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी स्थिति बहुत नाजुक है। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मैं उन्हें फिर कभी पाऊंगी और मैं भगवान से उनके ठीक होने की प्रार्थना कर रही हूं। वह एक समाजसेवी रहे हैं और एक एनजीओ चला रहे हैं। मैं मानती हूँ कि उन सभी लोगों की दुआओं ने जिनकी उन्होंने मदद की थी, वह ठीक हुए हैं। ‘

पश्चिम बंगाल में दक्षिण कोलकाता के रहने वाले निताईदास मुखर्जी (52) कोरोनावायरस से विकृत हुए थे। मुखर्जी 38 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद कोरोनावायरस से मुक्त हुए हैं। उनके अस्पताल से घर वापसी पर उनके पड़ोसियों ने उनकी किसी हूर की तरह स्वागत किया। माना जा रहा है कि वह देश के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने इतने लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद कोरोना मुक्त हुए हैं।

चिकित्सकों ने कहा कि यह अस्पताल के अधिकारियों के लिए एक बेहतरीन उपलब्धि है और यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। चिकित्सकों ने कहा कि किसी को विभाजित -19 के मरीज को बहुत दिन वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है तो उसके बचने की संभावना बहुत कम होती है। अस्पताल ने एक बयान में कहा, ‘उन्होंने (निताईदास मुखर्जी) देश में पहले ऐसे व्यक्ति होने का रिकॉर्ड बनाया है जो 38 जिन कर वेंटिलेटर पर रहा हो और उसके बाद भी कोविड -19 से ठीक हो गए हों।’

सोमवार को अस्पताल से घर वापस लौटे मुखर्जी ने कहा, ‘मैं अस्पताल और चिकित्सकों को धन्यवाद देता हूं जो मुझे नया जीवन दिया है। आप कह सकते हैं कि यह मेरा दूसरा जीवन है। उनके बिना, अब तक मेरी मृत्यु हो चुकी है। वे असली हूर हैं। ‘ हालांकि, मुखर्जी अभी भी शारीरिक रूप से काफी कमजोर हैं।

मुखर्जी की पत्नी अपराजिता मुखर्जी ने बताया कि कोरोनावायरस जैसे लक्षण सामने आने पर मुखर्जी को 29 मार्च को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर उन्हें उसी रात वेंटिलेटर पर रख दिया गया था। अगले दिन उनकी कोरोना जांच पॉजिटिव आई थी।

अपराजिता ने कहा, ‘उनकी हालत और बिगड़ी तो डॉक्टरों ने एक सर्जरी की। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी स्थिति बहुत नाजुक है। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मैं उन्हें फिर कभी पाऊंगी और मैं भगवान से उनके ठीक होने की प्रार्थना कर रही हूं। वह एक समाजसेवी रहे हैं और एक एनजीओ चला रहे हैं। मैं मानती हूँ कि उन सभी लोगों की दुआओं ने जिनकी उन्होंने मदद की थी, वह ठीक हुए हैं। ‘





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